
बिहार की नई सरकार की कैबिनेट बैठक के बाद मंत्रियों के बड़े काफिले को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री Samrat Choudhary की अध्यक्षता में मुख्य सचिवालय में हुई बैठक में शामिल होने के लिए मंत्रियों के भारी वाहन काफिले ने विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका दे दिया।
32 मंत्रियों के साथ पहुंचीं करीब 90 गाड़ियां
जानकारी के मुताबिक, कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री समेत कुल 32 मंत्री शामिल हुए। मुख्य सचिवालय से मंत्रियों के सरकारी आवास की दूरी करीब 100 से 200 मीटर बताई जा रही है, लेकिन इसके बावजूद सभी मंत्री अलग-अलग सरकारी वाहनों से बैठक में पहुंचे।
बताया जा रहा है कि हर मंत्री के साथ पायलट, एस्कॉर्ट और स्टाफ वाहन भी शामिल थे, जिससे कुल वाहनों की संख्या करीब 90 तक पहुंच गई। सचिवालय परिसर के बाहर लंबी कतार में खड़ी सरकारी गाड़ियों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री की अपील का हवाला देकर विपक्ष का हमला
विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi लगातार पेट्रोल-डीजल की बचत, कार पूलिंग और छोटी दूरी पैदल तय करने की अपील करते रहे हैं, लेकिन बिहार में सत्ताधारी दल के मंत्री ही इसका पालन करते नहीं दिखे।
Shakti Singh Yadav ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सचिवालय और मंत्रियों के आवास के बीच इतनी कम दूरी है, तब इतने बड़े काफिले की जरूरत समझ से परे है।
सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
मामले को लेकर अभी तक मुख्यमंत्री कार्यालय या भाजपा प्रदेश इकाई की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि भाजपा के कुछ नेताओं ने कहा है कि मंत्रियों की आवाजाही सुरक्षा प्रोटोकॉल और तय दिशा-निर्देशों के अनुसार हुई।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। कई यूजर्स ने सचिवालय के बाहर खड़ी गाड़ियों की तस्वीरें साझा करते हुए सरकार से सवाल किए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वीआईपी संस्कृति और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर जनता के बीच लगातार संवेदनशीलता बढ़ रही है। ऐसे में छोटी दूरी के लिए बड़े काफिले का इस्तेमाल राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।


