
गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज जिले में मानव तस्करी और बाल शोषण के संगठित नेटवर्क के विरुद्ध पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जिले के कुचायकोट थाना क्षेत्र में मंगलवार को चलाए गए एक विशेष महाभियान के दौरान पुलिस और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं की संयुक्त टीम ने अलग-अलग आर्केस्ट्रा समूहों के ठिकानों पर छापेमारी की। इस सघन तलाशी अभियान में 44 से अधिक नाबालिग लड़कियों को आर्केस्ट्रा संचालकों के चंगुल से सुरक्षित मुक्त कराया गया है। पुलिस की इस दबिश ने सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय उन गिरोहों की कमर तोड़ दी है जो मासूम बच्चियों को दूसरे राज्यों से बहला-फुसलाकर लाते थे और उनका शारीरिक व मानसिक शोषण करते थे। इस पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने तस्करी और शोषण के गंभीर आरोपों में 21 संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जिनमें 5 महिलाएं भी शामिल हैं।
15 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी
कुचायकोट थाना क्षेत्र में आर्केस्ट्रा संचालकों की बढ़ती संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय ने इसे गंभीरता से लिया था। मंगलवार को पुलिस की विभिन्न टीमों ने सुनियोजित तरीके से 15 से अधिक आर्केस्ट्रा समूहों के ठिकानों पर एक साथ धावा बोला। अचानक हुई इस छापेमारी से आर्केस्ट्रा संचालकों के बीच हड़कंप मच गया। पुलिस ने जब इन समूहों के रहने के स्थानों और कार्यस्थलों की जांच की, तो वहां बड़ी संख्या में नाबालिग बच्चियां पाई गईं। पुलिस के अनुसार, मुक्त कराई गई इन बच्चियों की उम्र महज 10 से 17 वर्ष के बीच है, जिन्हें कानूनन इस प्रकार के कार्यों में लगाना दंडनीय अपराध है।
इस सफल अभियान का नेतृत्व अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित जैन और गोपालगंज के एसपी विनय तिवारी खुद कर रहे थे। अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए कुचायकोट पुलिस के साथ-साथ एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन, नारायणी सेवा संस्थान और बिहार पुलिस मुख्यालय की एक विशेष संयुक्त टीम गठित की गई थी। इन संस्थाओं के विशेषज्ञों ने छापेमारी के दौरान बच्चियों की पहचान करने और उनके साथ संवेदनशीलता से पेश आने में पुलिस की मदद की।
6 राज्यों से जुड़ा है तस्करी का नेटवर्क
पुलिस की प्रारंभिक जांच और मुक्त कराई गई बच्चियों से की गई पूछताछ में एक चौंकाने वाले अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि इन मासूम बच्चियों को किसी एक स्थान से नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग कोनों से झांसा देकर गोपालगंज लाया गया था। तस्करों के इस नेटवर्क के तार पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से जुड़े हुए हैं।
आर्केस्ट्रा संचालकों और तस्करों ने इन राज्यों के गरीब परिवारों की बच्चियों को अच्छी नौकरी, पढ़ाई या बेहतर जीवन का लालच देकर उनके घरों से दूर किया था। एक बार जब ये बच्चियां गोपालगंज पहुँच जाती थीं, तो उन्हें डरा-धमकाकर आर्केस्ट्रा समूहों में नाचने और अन्य अनैतिक कार्यों के लिए मजबूर किया जाता था। पुलिस अब उन बिचौलियों और तस्करों की पहचान करने में जुटी है जो इन राज्यों से बच्चियों को लाने और उनकी ‘सप्लाई’ करने का काम करते थे।
21 संदिग्धों से पुलिस कर रही कड़ी पूछताछ
इस महाभियान के दौरान पुलिस ने 21 ऐसे संदिग्धों को गिरफ्तार किया है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन आर्केस्ट्रा समूहों के संचालन और लड़कियों के शोषण में शामिल थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में 5 महिलाएं भी शामिल हैं, जो गिरोह के भीतर लड़कियों की निगरानी और उन्हें नियंत्रित करने का काम करती थीं। पुलिस इन सभी आरोपियों से ट्रैफिकिंग (मानव तस्करी) और बच्चियों के क्रूर शोषण के आरोपों में कड़ी पूछताछ कर रही है।
गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेजों को भी खंगाला जा रहा है ताकि इस काले कारोबार में शामिल अन्य सफेदपोशों और मास्टरमाइंड तक पहुँचा जा सके। पुलिस का मानना है कि इन गिरफ्तारियों से जिले में लंबे समय से फल-फूल रहे आर्केस्ट्रा आधारित शोषण नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगेगा। आरोपियों के विरुद्ध पोक्सो (POCSO) एक्ट और अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।
काउंसलिंग के बाद सुरक्षित स्थानों पर भेजी गईं बच्चियां
रेस्क्यू के बाद सबसे बड़ी चुनौती इन डरी-सहमी बच्चियों के मानसिक स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा की थी। पुलिस प्रशासन ने एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान के सहयोग से सभी 44 बच्चियों की विस्तृत काउंसलिंग कराई। काउंसलिंग के दौरान कई बच्चियों ने अपने ऊपर हुए अत्याचारों और घर से दूर लाए जाने की दर्दनाक दास्तां सुनाई।
चिकित्सीय जांच और कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद, सुरक्षा के मद्देनजर सभी बच्चियों को सरकारी संरक्षण में लेते हुए सुरक्षित स्थानों और शेल्टर होम्स में भेज दिया गया है। पुलिस विभाग अब संबंधित राज्यों की पुलिस और बाल कल्याण समितियों से संपर्क साध रहा है ताकि इन बच्चियों के परिजनों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित घर वापसी कराई जा सके। गोपालगंज पुलिस का यह अभियान आने वाले दिनों में अन्य संदिग्ध इलाकों में भी जारी रहने की संभावना है।


