
बांका। बिहार के बांका जिले से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक रिश्तों को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है। जिले के अमरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत सलेमपुर गांव में एक बहू ने अपनी वृद्ध सास की न केवल जान ले ली, बल्कि जिस बेरहमी से इस कत्ल को अंजाम दिया गया, उसे सुनकर हर किसी की रूह कांप उठी है। मंगलवार को घटी इस घटना ने समाज के उस कुरूप चेहरे को सामने ला दिया है जहाँ आपसी विवाद और नफरत का अंत खौफनाक तरीके से होता है। सलेमपुर के वार्ड नंबर नौ में घटी इस वारदात के बाद पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और हर कोई इस ‘कलयुगी बहू’ की निर्दयता की चर्चा कर रहा है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी महिला को अपनी हिरासत में ले लिया है, जिसने पूछताछ के दौरान अपना जुर्म भी स्वीकार कर लिया है।
हैवानियत की पराकाष्ठा: लाठी से पीटा और कचिया से रेता गला
सलेमपुर गांव के वार्ड नंबर नौ निवासी सहदेव राय के घर में मंगलवार का दिन किसी काल के समान आया। घर की बहू ने अपनी 70 वर्षीया सास सुलोचना देवी पर अचानक हमला बोल दिया। वारदात की शुरुआत मामूली कहासुनी से हुई या इसके पीछे कोई पुरानी रंजिश थी, इसकी जांच पुलिस कर रही है, लेकिन हमले का तरीका किसी पेशेवर अपराधी से भी अधिक खौफनाक था। बहू ने पहले अपनी वृद्ध सास को लाठी-डंडों से बेतहाशा पीटना शुरू किया। असहाय सुलोचना देवी खुद को बचाने की गुहार लगाती रहीं, लेकिन बहू का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा था।
लाठी से वार करने के बाद जब सास अधमरी स्थिति में पहुँच गई, तब बहू ने घर में रखे ‘कचिया’ (हंसिया/दरांती) को हथियार बनाया। उसने कचिया से अपनी सास का गला बेरहमी से रेत दिया। गले पर गहरा घाव होने के कारण सुलोचना देवी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। लेकिन बहू की निर्दयता यहीं नहीं रुकी; उसने कत्ल के दौरान अपनी सास की दोनों आंखें भी फोड़ दीं। इस नृशंसता ने यह साबित कर दिया कि हत्या के दौरान आरोपी महिला पर किस कदर खून सवार था। 70 वर्ष की बुजुर्ग महिला, जो शारीरिक रूप से कमजोर थी, वह अपनी ही बहू के इस क्रूर प्रहार का मुकाबला नहीं कर सकी।
ग्रामीणों की सूचना पर पहुँची पुलिस, आरोपी हिरासत में
घर के भीतर मचे कोहराम और चीख-पुकार की आहट जब पड़ोसियों और ग्रामीणों तक पहुँची, तो वे मौके पर जमा हो गए। घर के भीतर का मंजर देख लोगों के होश उड़ गए। खून से लथपथ सुलोचना देवी का शव जमीन पर पड़ा था और उनकी आंखों की स्थिति देख लोग सिहर उठे। ग्रामीणों ने तुरंत इस घटना की जानकारी अमरपुर थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
थानाध्यक्ष राकेश कुमार और पुलिस इंस्पेक्टर रमाशंकर सिंह पुलिस बल के साथ बिना किसी देरी के सलेमपुर गांव पहुँचे। पुलिस टीम में महिला पुलिसकर्मियों को भी शामिल किया गया था ताकि आरोपी महिला को हिरासत में लेने के दौरान किसी प्रकार की समस्या न हो। घटनास्थल पर पहुँचकर पुलिस ने साक्ष्य जुटाए और आरोपी बहू को पुलिस सुरक्षा में ले लिया गया। जिस समय पुलिस पहुँची, आरोपी महिला के चेहरे पर अपने किए का कोई पछतावा नजर नहीं आ रहा था। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि मौत के कारणों और चोटों की गंभीरता का विस्तृत विवरण प्राप्त किया जा सके।
जुर्म की स्वीकारोक्ति और पुलिसिया कार्रवाई
थाने ले जाने के बाद जब पुलिस ने आरोपी महिला से कड़ी पूछताछ की, तो उसने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना गुनाह कबूल कर लिया। उसने स्वीकार किया कि उसने ही लाठी-डंडों और कचिया का उपयोग कर अपनी सास की हत्या की है। पुलिस अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि आखिर एक महिला इतनी हिंसक कैसे हो गई कि उसने अपनी ही सास की आंखें तक निकाल लीं। क्या घर में अक्सर कलह होती थी या फिर मानसिक अवसाद के कारण उसने इस घटना को अंजाम दिया, इन सभी बिंदुओं पर गहनता से विचार किया जा रहा है।
अमरपुर थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने इस घटना को अत्यंत निर्मम और नृशंस करार दिया है। उन्होंने बताया कि आरोपी महिला ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है और उसे हिरासत में रखा गया है। पुलिस अब मृतका के पति सहदेव राय या अन्य परिजनों की ओर से औपचारिक आवेदन (एफआईआर) मिलने की प्रतीक्षा कर रही है, जिसके आधार पर कड़ी कानूनी धाराएं लगाते हुए आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस इंस्पेक्टर रमाशंकर सिंह ने भी घटनास्थल का मुआयना करने के बाद कहा कि कानून इस तरह के जघन्य अपराध को बर्दाश्त नहीं करेगा और आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए पुख्ता चार्जशीट तैयार की जाएगी।
इलाके में खौफ और शोक का माहौल
सलेमपुर गांव की इस घटना ने केवल बांका ही नहीं बल्कि पूरे बिहार में सनसनी फैला दी है। लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि पारिवारिक कलह का अंत इतना भयावह भी हो सकता है। सुलोचना देवी के पति सहदेव राय का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस घर में खुशियाँ होनी चाहिए थीं, वहां अब केवल मातम और खौफ पसरा हुआ है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी हैवानियत कभी नहीं देखी जहाँ किसी की आंखें तक फोड़ दी गई हों।
ग्रामीणों में आरोपी महिला के प्रति भारी आक्रोश है। लोगों की मांग है कि इस तरह की प्रवृत्तियों को समाज में कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए और प्रशासन को ऐसी सजा तय करनी चाहिए जो नजीर बन सके। फिलहाल सलेमपुर गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को टाला जा सके। पुलिस के आला अधिकारियों ने भी मामले का संज्ञान लिया है और त्वरित न्यायालय (Fast Track Court) के माध्यम से मामले की सुनवाई कराने के संकेत दिए हैं। सुलोचना देवी की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर समाज में बुजुर्गों की सुरक्षा और गिरते नैतिक मूल्यों पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है।


