शहनाई बजने से पहले पसरा सन्नाटा: मुजफ्फरपुर में तीसरी शादी की खरीदारी करने निकले दूल्हे की हार्ट अटैक से मौत; सीसीटीवी में कैद हुआ खौफनाक मंजर

मुजफ्फरपुर। उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने नियति की क्रूरता को एक बार फिर सार्वजनिक कर दिया है। जहाँ एक घर में बारात निकलने की तैयारियां जोरों पर थीं, आंगन में मंगल गीत गाए जा रहे थे और नए जीवन की शुरुआत को लेकर उत्साह का माहौल था, वहां अचानक मौत ने ऐसी दस्तक दी कि खुशियों का शोर चीखों में तब्दील हो गया। जिले के कुढ़नी प्रखंड स्थित केरमा गांव में घोड़ी चढ़ने से ठीक दो दिन पहले दूल्हे की अर्थी उठ गई। तीसरी शादी की दहलीज पर खड़े 45 वर्षीय रंजीत भगत की मौत का मंजर इतना अचानक और खौफनाक था कि पास खड़े लोग भी कुछ समझ नहीं पाए। महज 10 सेकंड के भीतर एक हंसता-खेलता व्यक्ति काल के गाल में समा गया। इस घटना ने न केवल पीड़ित परिवार को तोड़ा है, बल्कि पूरे मुजफ्फरपुर में बढ़ते ‘सडन हार्ट अटैक’ के खतरों पर भी एक नई बहस छेड़ दी है।

बाजार में मौत का साया: महज 10 सेकंड और सब खत्म

​घटना के संदर्भ में प्राप्त जानकारी के अनुसार, रंजीत भगत अपनी शादी की तैयारियों में व्यस्त थे। 13 मई 2026, यानी बुधवार को उनकी बारात निकलने वाली थी। शादी के घर में अक्सर अंतिम समय में कुछ न कुछ सामान कम पड़ ही जाता है, और इसी सिलसिले में रंजीत रविवार को अपने घर के पास के बाजार में खरीदारी करने निकले थे। वे अपनी मोटरसाइकिल के पास खड़े होकर अपने एक मित्र से सहज भाव में बातचीत कर रहे थे। सीसीटीवी फुटेज में कैद हुए दृश्यों के अनुसार, रंजीत बिल्कुल सामान्य दिख रहे थे और उनकी बातचीत में कहीं से भी अस्वस्थता के संकेत नहीं मिल रहे थे।

​अचानक बातचीत के दौरान ही रंजीत ने अपने सीने पर हाथ रखा और उन्हें तेज दर्द महसूस हुआ। इससे पहले कि उनका दोस्त या आसपास के दुकानदार कुछ समझ पाते, रंजीत बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़े। फुटेज में साफ दिख रहा है कि गिरने के बाद उन्हें संभलने का एक मौका भी नहीं मिला। आसपास के लोग तुरंत उनकी ओर दौड़े, उन्हें उठाने की कोशिश की गई, लेकिन नियति अपना काम कर चुकी थी। डॉक्टरों के अनुसार, यह एक ‘मैसिव कार्डियक अरेस्ट’ का मामला था, जिसमें हृदय ने काम करना तुरंत बंद कर दिया। बाजार की भीड़ के बीच एक दूल्हे की इस तरह हुई आकस्मिक मौत ने हर किसी को सुन्न कर दिया है।

तीसरी शादी और अधूरे अरमान: नियति का अजीब खेल

​रंजीत भगत का निजी जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा था। 45 वर्ष की आयु में वे अपनी जिंदगी को एक नया सिरा देने की कोशिश कर रहे थे। बताया जाता है कि उनकी पहली दो पत्नियों ने उन्हें छोड़ दिया था, जिसके बाद वे काफी समय तक अकेले रहे। परिवार और समाज के सहयोग से उनकी तीसरी शादी तय हुई थी। रंजीत इस नए रिश्ते को लेकर बहुत अधिक उत्साहित और खुश थे। उन्हें उम्मीद थी कि इस बार उनका घर बसेगा और उनके जीवन का सूनापन खत्म होगा।

​13 मई की तारीख उनके और उनके परिवार के लिए किसी बड़े उत्सव से कम नहीं थी। रविवार को वे घर में होने वाली विशेष पूजा और मटकोर जैसी रस्मों के लिए सामान खरीदने बाजार गए थे। घर में रिश्तेदारों का जमावड़ा था, हलवाई अपनी भट्टियां सुलगा चुके थे और चारों तरफ शादी की गहमागहमी थी। लेकिन एक पल के हृदय घात ने न केवल रंजीत के अरमानों को मिट्टी में मिला दिया, बल्कि उस लड़की के भविष्य पर भी सवालिया निशान लगा दिए जो दुल्हन बनकर उनके घर आने वाली थी।

आंगन में पसरा मातम: पिता की बेबसी और चीखें

​रंजीत की मौत की खबर जैसे ही केरमा गांव पहुँची, वहां का दृश्य पूरी तरह बदल गया। जो महिलाएं कुछ देर पहले सोहर और मंगल गीत गा रही थीं, वे अब दहाड़ें मारकर रो रही हैं। रंजीत के वृद्ध पिता की हालत सबसे अधिक दयनीय है। बुढ़ापे की लाठी के रूप में जिस बेटे की बारात वे निकालने वाले थे, अब उन्हें उसी के जनाजे को कंधा देना पड़ रहा है। पिता का रो-रोकर बुरा हाल है और वे बार-बार यही कह रहे हैं कि भगवान ने उनके साथ ऐसा अन्याय क्यों किया।

​ग्रामीणों का कहना है कि रंजीत एक व्यवहार कुशल व्यक्ति थे। गांव के लोग उनकी तीसरी शादी को लेकर खुश थे कि अब रंजीत का अकेलापन दूर हो जाएगा। लेकिन रविवार की उस मनहूस दोपहर ने सब कुछ उजाड़ दिया। शादी के लिए लाए गए नए कपड़े, सेहरा और पूजन सामग्री अब केवल उस त्रासद घटना की गवाह बनकर रह गए हैं। गांव के श्मशान घाट पर जब रंजीत का अंतिम संस्कार किया गया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आँख नम थी।

स्वास्थ्य की चेतावनी: बढ़ते हार्ट अटैक के मामले

​मुजफ्फरपुर की यह घटना एक बड़े स्वास्थ्य संकट की ओर भी इशारा करती है। पिछले कुछ वर्षों में 40 से 50 वर्ष की आयु के लोगों में अचानक होने वाले हार्ट अटैक (SCD – Sudden Cardiac Death) के मामले तेजी से बढ़े हैं। रंजीत के मामले में भी कोई पुरानी गंभीर बीमारी की बात सामने नहीं आई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक तनाव, जीवनशैली में बदलाव और कभी-कभी अत्यधिक उत्साह या शारीरिक श्रम भी ऐसे मामलों को ट्रिगर कर सकता है।

​रंजीत जिस तरह से गिरे और महज चंद सेकंड में उनकी जान चली गई, वह ‘साइलेंट किलर’ की उस भयावहता को दर्शाता है जो आज की युवा और मध्यम आयु वर्ग की आबादी को अपनी चपेट में ले रहा है। डॉक्टरों की सलाह है कि शादी-ब्याह जैसे आयोजनों में जहाँ शारीरिक और मानसिक थकान अधिक होती है, वहां मध्यम आयु वर्ग के लोगों को अपने स्वास्थ्य और हृदय की स्थिति के प्रति अधिक सतर्क रहना चाहिए।

विवाह की रस्में और सन्नाटा

​बुधवार, 13 मई को रंजीत के घर से बारात की रवानगी होनी थी। फूलों से सजी गाड़ियाँ और बैंड-बाजे की तैयारी थी। लेकिन अब वहां सन्नाटा पसरा है। जिस पंडाल में मेहमानों को बैठना था, वहां अब सांत्वना देने वालों की भीड़ है। दुल्हन के घर भी मातम का माहौल है। वहां भी शादी की रस्में रोक दी गई हैं। यह एक ऐसी विडंबना है जहाँ एक परिवार नए सदस्य के स्वागत की तैयारी कर रहा था और उसे अपने सबसे प्रिय सदस्य की विदाई देखनी पड़ी।

​कुढ़नी प्रखंड के इस छोटे से गांव केरमा की गलियों में आज केवल रंजीत की असमय मौत की चर्चा है। सीसीटीवी वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग स्तब्ध हैं कि कैसे मौत एक साये की तरह हमारे पीछे चलती है और कब झपट्टा मार दे, कोई नहीं जानता। रंजीत भगत की यह कहानी मुजफ्फरपुर के इतिहास में एक अत्यंत दुखद अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है, जहाँ शहनाई बजने से पहले ही मौत का मातम छा गया। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को भी इन बढ़ते मामलों पर जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में किसी और ‘रंजीत’ की अर्थी घोड़ी चढ़ने से पहले न उठे।

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