
बक्सर/कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या का मामला अब बिहार के बक्सर की गलियों तक पहुँच गया है। सोमवार, 11 मई 2026 को बक्सर जिले में उस वक्त सनसनी फैल गई जब पश्चिम बंगाल पुलिस की एक विशेष टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से बड़ी कार्रवाई करते हुए दो युवकों—विक्की मौर्य और मयंक मिश्रा—को हिरासत में ले लिया। जहाँ एक ओर बंगाल पुलिस इसे एक बड़ी कामयाबी मान रही है, वहीं दूसरी ओर विक्की मौर्य के परिजनों ने पुलिसिया कार्यशैली और गिरफ्तारी के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विक्की के पिता गौतम कुमार का कहना है कि पुलिस ने न केवल उनके बेटे को ‘बिना बताए’ उठाया, बल्कि घर के सारे मोबाइल फोन भी अपने साथ ले गई, जिससे परिवार का बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट गया है। यह मामला अब केवल एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि दो राज्यों के बीच ‘अंधेरे’ में किए गए एक ऑपरेशन और एक पिता की बेबसी की दास्तान बन गया है।
बक्सर में रेड: “मोबाइल ले गए, पर वजह नहीं बताई”
सोमवार की सुबह बक्सर के उस मोहल्ले के लिए आम दिनों जैसी नहीं थी जहाँ विक्की मौर्य का परिवार रहता है। गौतम कुमार के अनुसार, अचानक कई पुलिस वाहन उनके घर के सामने रुके और सादे लिबास के साथ-साथ वर्दीधारी जवानों ने घर को घेर लिया। पुलिस कर्मियों ने घर में घुसते ही विक्की मौर्य के बारे में पूछताछ शुरू की और पूरे घर की सघन तलाशी ली। इस दौरान घर के सदस्यों में डर और असमंजस का माहौल बना रहा।
गौतम कुमार ने बताया कि पुलिस ने घर में मौजूद सभी सदस्यों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए और उन्हें अपने साथ ले गई। जब परिजनों ने इसका कारण पूछा और विक्की पर लगे आरोपों की जानकारी मांगी, तो पुलिस ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। परिजनों का आरोप है कि उन्हें यह भी नहीं पता कि उनके बेटे को कहाँ ले जाया गया है। “हमें बस इतना कहा गया कि पूछताछ के लिए ले जा रहे हैं, लेकिन मामला क्या है, यह अब हमें दूसरे लोगों और मीडिया के जरिए पता चल रहा है,” भावुक होते हुए गौतम कुमार ने कहा।
मुंबई का काम और ‘नई नौकरी’ का झांसा?
विक्की मौर्य की पृष्ठभूमि और उसकी हालिया गतिविधियों को लेकर भी कई जानकारियां सामने आ रही हैं। उसके पिता ने बताया कि विक्की पहले मुंबई में एक निजी कंपनी में काम करता था। कुछ समय पहले वह घर लौटा था और हाल ही में उसने घर वालों को बताया था कि उसकी एक दूसरी कंपनी में अच्छी नौकरी लग गई है। वह काफी उत्साहित था और अपने करियर को लेकर गंभीर लग रहा था।
7 मई 2026 की दोपहर करीब 12 बजे विक्की अपने घर से नई नौकरी जॉइन करने की बात कहकर निकला था। घर से निकलते समय उसने अपने पिता से रास्ते के खर्च के लिए दो हजार रुपये भी लिए थे। विक्की ने वादा किया था कि वह नई जगह पहुँचते ही अपना लोकेशन भेजेगा और फोन पर बात करेगा। लेकिन उसके बाद जो खबर आई, उसने पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी। पिता के लिए यह विश्वास करना कठिन है कि जो बेटा दो हजार रुपये लेकर नौकरी की तलाश में निकला था, उसका नाम इतने बड़े हत्याकांड में शामिल हो सकता है।
अपराधिक इतिहास पर सवाल: “वो अपराधी नहीं है”
विक्की के परिजनों का सबसे बड़ा दावा उसके चरित्र को लेकर है। गौतम कुमार और अन्य रिश्तेदारों का कहना है कि विक्की का आज तक कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा है। न तो स्थानीय थाने में उस पर कोई केस दर्ज है और न ही वह कभी किसी संदिग्ध गतिविधि में शामिल रहा है। परिजनों के अनुसार, विक्की एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार का लड़का है जो अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए मेहनत कर रहा था।
परिजनों का दावा है कि विक्की को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया जा रहा है या फिर उसे किसी साजिश का शिकार बनाया गया है। उनका कहना है कि यदि विक्की का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, तो पुलिस उसे सीधे तौर पर एक पेशेवर ‘शार्प शूटर’ कैसे करार दे सकती है? बक्सर के स्थानीय लोग भी विक्की के स्वभाव को लेकर सकारात्मक राय रखते हैं, जिससे इस पूरी गिरफ्तारी पर एक रहस्य की चादर तन गई है।
यूपीआई ट्रांजैक्शन और डिजिटल ट्रैप (संदर्भ)
हालांकि परिवार विक्की की मासूमियत का दावा कर रहा है, लेकिन बंगाल सीआईडी के सूत्रों का कहना है कि उनके पास पुख्ता ‘डिजिटल साक्ष्य’ हैं। बताया जा रहा है कि वारदात के बाद फरार होने के दौरान एक टोल प्लाजा पर किए गए UPI पेमेंट ने पुलिस को विक्की और उसके साथियों के लोकेशन तक पहुँचाया। पुलिस का मानना है कि पेशेवर अपराधियों द्वारा की गई यह एक छोटी सी तकनीकी चूक उनके गले की फांस बन गई। बंगाल पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या विक्की और मयंक मिश्रा को इस हत्या के लिए मोटी ‘सुपारी’ दी गई थी और उनका संपर्क मुख्य साजिशकर्ताओं से कैसे हुआ।
राजनीतिक गलियारों में हलचल और एसआईटी की जांच
चूंकि मामला सीधे तौर पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक की हत्या से जुड़ा है, इसलिए जांच की रफ़्तार अत्यंत तेज है। बंगाल पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT), जिसमें सीआईडी और एसटीएफ के अधिकारी शामिल हैं, बक्सर से पकड़े गए दोनों संदिग्धों से कड़ी पूछताछ कर रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि राज सिंह (जो बलिया का रहने वाला है और अयोध्या से पकड़ा गया) के साथ विक्की और मयंक का क्या संबंध है।
बक्सर में हुई इस कार्रवाई के बाद स्थानीय पुलिस ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। हालांकि इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व बंगाल पुलिस कर रही थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या बिहार के शांत सीमावर्ती जिले अब पेशेवर शूटरों के ‘स्लीपर सेल’ या सुरक्षित पनाहगाह बनते जा रहे हैं? विक्की मौर्य का इस केस से क्या और कितना गहरा कनेक्शन है, यह तो सीआईडी की रिमांड रिपोर्ट ही स्पष्ट करेगी।
बेबस पिता की अपील: “सच्चाई सामने आए”
फिलहाल, बक्सर के जीछो बिशनपुर और आसपास के इलाकों में विक्की मौर्य की गिरफ्तारी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। उसके पिता गौतम कुमार की अपील है कि जांच निष्पक्ष हो और उनके बेटे को बेवजह प्रताड़ित न किया जाए। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि कम से कम परिवार को उनके मोबाइल फोन वापस दिए जाएं और विक्की की स्थिति के बारे में आधिकारिक जानकारी साझा की जाए।
यह मामला अब कानूनी पेचीदगियों और मानवीय संवेदनाओं के बीच फंसा हुआ है। एक तरफ बंगाल पुलिस के दावे हैं और दूसरी तरफ एक पिता की अपने बेटे के प्रति अटूट आस्था। आने वाले दिनों में जब मयंक और विक्की को अदालत में दोबारा पेश किया जाएगा, तब शायद इस ‘शार्प शूटर’ थ्योरी और ‘साधारण युवक’ के बीच का सच दुनिया के सामने आएगा। फिलहाल, बक्सर के उस घर में सन्नाटा पसरा है, जहाँ से कुछ दिन पहले एक बेटा ‘सुनहरे भविष्य’ की तलाश में निकला था, लेकिन वह सलाखों के पीछे पहुँच गया।


