
बारासात/कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति को दहला देने वाले चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में सोमवार, 11 मई 2026 को जांच एजेंसियों को एक बड़ी और निर्णायक सफलता मिली है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) की नृशंस हत्या के मामले में बंगाल सीआईडी (CID) ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या से तीन पेशेवर शार्प शूटर्स को दबोच लिया है। ‘डिजिटल इंडिया’ के इस दौर में अपराधियों की एक छोटी सी तकनीकी चूक—टोल प्लाजा पर किया गया एक UPI पेमेंट—उनकी गिरफ्तारी का सबसे बड़ा कारण बनी। पकड़े गए आरोपियों को सोमवार को उत्तर 24 परगना के बारासात सिटी सेशंस कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 13 दिनों की सीआईडी हिरासत में भेज दिया गया है। 6 मई को मध्यमग्राम में हुई इस वारदात ने राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक शुचिता पर कई सवाल खड़े किए थे, जिनका जवाब अब इन शार्प शूटर्स से होने वाली पूछताछ में मिलने की उम्मीद है।
डिजिटल पदचिह्न: कैसे कानून के शिकंजे में आए शूटर?
इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने में तकनीक ने एक जासूस की भूमिका निभाई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी पश्चिम बंगाल की सीमा पार कर झारखंड और फिर उत्तर प्रदेश की ओर भाग रहे थे। रास्ते में एक टोल प्लाजा पर नकदी की कमी या जल्दबाजी के कारण एक आरोपी ने UPI (Unified Payments Interface) के जरिए ऑनलाइन भुगतान किया।
यही वह ‘डिजिटल ट्रेल’ था जिसका इंतजार पुलिस कर रही थी। इस ट्रांजैक्शन ने न केवल आरोपियों की तात्कालिक लोकेशन स्पष्ट की, बल्कि उनके मोबाइल नंबर और बैंक खाते के जरिए उनकी पूरी पहचान भी उजागर कर दी। पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा गठित एसआईटी (SIT), जिसमें एसटीएफ और सीआईडी के अनुभवी अधिकारी शामिल थे, ने तुरंत उत्तर प्रदेश पुलिस से संपर्क साधा और अयोध्या में एक संयुक्त अभियान चलाकर तीनों को घेर लिया।
कौन हैं ये तीनों आरोपी? ‘सुपारी’ और बिहार-यूपी कनेक्शन
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी पेशेवर अपराधी बताए जा रहे हैं, जिनका नेटवर्क अंतरराज्यीय स्तर पर फैला हुआ है। सीआईडी सूत्रों के अनुसार, इस हत्या के पीछे एक गहरी साजिश और भारी-भरकम ‘सुपारी’ (Contract Killing) का संदेह है।
- राज सिंह: यह उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का रहने वाला है। प्राथमिक जांच के अनुसार, राज सिंह ने ही चंद्रनाथ की हत्या का ‘ठेका’ लिया था और पूरी टीम का नेतृत्व कर रहा था। वारदात के बाद वह अयोध्या में शरण लिए हुए था।
- मयंक राज मिश्रा: यह बिहार का रहने वाला है और शार्प शूटिंग में माहिर बताया जा रहा है।
- विक्की मौर्य: यह भी बिहार का निवासी है और मयंक के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
सरकारी वकील बिवाश चटर्जी का बयान: > “तीनों आरोपियों को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। उनकी जमानत याचिका को कड़ाई से खारिज करते हुए कोर्ट ने 13 दिनों की पुलिस हिरासत (CID कस्टडी) की मांग स्वीकार कर ली है। अब 24 मई को उन्हें दोबारा पेश किया जाएगा।”
बारासात कोर्ट से भवानी भवन: अब शुरू होगा ‘सच’ का सामना
सोमवार को बारासात एसीजीएम (ACGM) कोर्ट में पेशी के दौरान परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद सीआईडी की टीम तीनों आरोपियों को राज्य पुलिस मुख्यालय, भवानी भवन ले गई। अगले 13 दिनों तक सीआईडी के विशेषज्ञ अधिकारी इनसे गहन पूछताछ करेंगे।
पूछताछ के मुख्य बिंदु होंगे:
- चंद्रनाथ रथ की हत्या के लिए ‘सुपारी’ किसने दी थी?
- हत्या के पीछे का असली मकसद क्या था—राजनैतिक रंजिश या कोई व्यक्तिगत विवाद?
- वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियार कहाँ से आए और अब वे कहाँ हैं?
- क्या इस साजिश में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के स्थानीय कार्यकर्ताओं की संलिप्तता के आरोपों में कोई सच्चाई है?
6 मई की वो काली शाम: मध्यमग्राम में क्या हुआ था?
याद दिला दें कि बीते 6 मई 2026 को उत्तर 24 परगना के मध्यमग्राम इलाके में तब सनसनी फैल गई थी, जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ पर अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं। लहूलुहान हालत में उन्हें स्थानीय लोगों ने पास के ‘डायवर्सिटी नर्सिंग होम’ पहुँचाया, लेकिन घाव इतने गहरे थे कि उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
इस हत्या के बाद पश्चिम बंगाल में राजनैतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। शुभेंदु अधिकारी के खेमे ने सीधे तौर पर सत्तारूढ़ टीएमसी पर इस हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने तुरंत सीआईडी और एसटीएफ को शामिल करते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया, जिसने महज 5 दिनों के भीतर आरोपियों को दूसरे राज्य से ढूंढ निकाला।
निष्कर्ष और आगामी राह
चंद्रनाथ रथ की हत्या ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल में राजनैतिक हिंसा और ‘कॉन्ट्रैक्ट किलिंग’ के बढ़ते रुझान की ओर ध्यान खींचा है। हालांकि, पुलिस की त्वरित कार्रवाई और यूपी पुलिस के साथ बेहतर समन्वय ने एक सकारात्मक संदेश दिया है। अब पूरी नजर 24 मई की तारीख पर टिकी है, जब सीआईडी अपनी प्रारंभिक पूछताछ की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगी।
डिजिटल ट्रांजैक्शन के जरिए पकड़े गए ये आरोपी इस बात का सबूत हैं कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, आधुनिक निगरानी तंत्र से बच पाना अब लगभग नामुमकिन है। फिलहाल, तीनों आरोपी सीआईडी की कोठरी में हैं और आने वाले दिनों में कुछ बड़े नामों का खुलासा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


