​हाजीपुर में ‘परिमार्जन’ की घूस और निगरानी का जाल: 50 हजार लेते रंगेहाथ धराया अंचल अमीन सुजीत, नूनू बाबू चौक पर हुई कार्रवाई

हाजीपुर। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही जंग में सोमवार, 11 मई 2026 को एक और बड़ा अध्याय जुड़ा जब वैशाली जिले के लालगंज अंचल में तैनात एक अंचल अमीन को रिश्वत की मोटी रकम के साथ गिरफ्तार किया गया। राज्य सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में चल रहे ‘सफाई अभियान’ के बावजूद, निचले स्तर के कर्मचारी अभी भी अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। विशेष निगरानी इकाई (SVU), पटना की टीम ने एक गुप्त और सटीक ऑपरेशन को अंजाम देते हुए लालगंज के अंचल अमीन सुजीत कुमार को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ दबोच लिया। यह गिरफ्तारी किसी दफ्तर के बंद कमरे में नहीं, बल्कि नूनू बाबू चौक के व्यस्त इलाके में हुई, जिससे हड़कंप मच गया। जमीन की मापी और पोर्टल पर डेटा के परिमार्जन जैसी बुनियादी सरकारी सेवाओं के बदले अवैध वसूली का यह मामला अब पटना की विशेष निगरानी अदालत तक पहुँच गया है।

रिश्वत की डिमांड और पीड़ित की हिम्मत: ऐसे शुरू हुई कहानी

​इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें लालगंज अंचल के उन फाइलों में दबी थीं, जहाँ आम आदमी अपनी जमीन के हक और सुधार के लिए दफ्तरों के चक्कर काटता है। मामले के परिवादी सराय थाना क्षेत्र के एनायतपुर प्रबोधी निवासी आनंद कुमार और लालगंज के मुर्गियाचक निवासी पप्पू कुमार काफी समय से अपनी जमीन की मापी (Measurement) और परिमार्जन (Rectification) के लिए अंचल कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। बिहार सरकार द्वारा जमीन के दस्तावेजों के डिजिटलीकरण और सुधार के लिए चलाए जा रहे ‘परिमार्जन’ पोर्टल पर सुधार की प्रक्रिया में अंचल अमीन की रिपोर्ट एक अनिवार्य कड़ी होती है।

​आरोप है कि अंचल अमीन सुजीत कुमार ने इस संवैधानिक जिम्मेदारी को निभाने के बदले आनंद कुमार से नजराने की मांग की थी। सुजीत कुमार का कहना साफ था—बिना पैसे के न तो फीता चलेगा और न ही पोर्टल पर रिपोर्ट सुधरेगी। जब आनंद कुमार ने अपनी असमर्थता जताई, तो अमीन ने काम करने से साफ इनकार कर दिया। बार-बार मिन्नतें करने के बाद भी जब सुजीत कुमार अपनी 50 हजार रुपये की मांग पर अड़ा रहा, तब आनंद कुमार ने हार मानने के बजाय कानून का सहारा लेने का निर्णय लिया और पटना स्थित विशेष निगरानी इकाई के कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई।

निगरानी का जाल: नूनू बाबू चौक पर बिछाया गया ‘ट्रैप’

​आनंद कुमार की शिकायत मिलते ही विशेष निगरानी इकाई सक्रिय हो गई। सबसे पहले शिकायत का गुप्त रूप से भौतिक सत्यापन कराया गया। जब यह पुष्टि हो गई कि अंचल अमीन वास्तव में रिश्वत की मांग कर रहा है और सोमवार को पैसे का लेनदेन तय हुआ है, तो निगरानी विभाग ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा-7 के तहत कांड संख्या-18/2026 दर्ज कर लिया। इसके बाद डीएसपी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल (Raid Team) का गठन किया गया।

​सोमवार दोपहर को निगरानी की टीम हाजीपुर पहुँची और सादे लिबास में नूनू बाबू चौक के समीप तैनात हो गई। योजना के मुताबिक, आनंद कुमार को केमिकल लगे हुए नोटों के साथ अमीन के पास भेजा गया। सुजीत कुमार, जो नूनू बाबू चौक के पास ही एक किराये के मकान में रहता था, वहीं पैसे लेने के लिए बाहर निकला। जैसे ही उसने आनंद कुमार के हाथों से 50 हजार रुपये के नोट लिए और उन्हें अपनी जेब में रखा, निगरानी की टीम ने चारों तरफ से उसे घेर लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से सुजीत कुमार को संभलने का मौका तक नहीं मिला। टीम ने मौके पर ही उसके हाथों को एक विशेष घोल से धुलवाया, जिससे नोटों पर लगे केमिकल के कारण पानी का रंग गुलाबी हो गया। यह रंगेहाथ गिरफ्तारी का सबसे पुख्ता वैज्ञानिक सबूत माना जाता है।

भ्रष्टाचार का केंद्र बना ‘परिमार्जन’ और ‘मापी’ का खेल

​यह गिरफ्तारी बिहार में भूमि सुधारों के क्रियान्वयन के बीच की एक काली हकीकत को उजागर करती है। वर्तमान में बिहार सरकार पूरे राज्य में जमीन के दस्तावेजों का सर्वे और सुधार कर रही है। इसमें ‘परिमार्जन’ एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके जरिए रैयत (जमीन मालिक) अपने पुराने रिकॉर्ड में हुई गलतियों को ऑनलाइन सुधार सकते हैं। लेकिन, ऑनलाइन आवेदन के बाद इसकी भौतिक जांच का जिम्मा अंचल अमीन और राजस्व कर्मचारी के पास होता है। यहीं से भ्रष्टाचार का रास्ता खुलता है।

​अंचल अमीन सुजीत कुमार ने इसी ‘गेटकीपर’ की भूमिका का गलत फायदा उठाया। जमीन की मापी के लिए सरकारी शुल्क निर्धारित है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह आम धारणा बन गई है कि बिना ‘ऊपर की कमाई’ के अमीन का फीता नहीं डोलता। सुजीत कुमार का मामला यह दर्शाता है कि अमीन जैसे पद पर बैठे लोग किस तरह विकास की रफ़्तार को अपनी व्यक्तिगत तिजोरी भरने के लिए रोक देते हैं। हाजीपुर की यह कार्रवाई उन तमाम बिचौलियों और कर्मचारियों के लिए एक बड़ा सबक है जो यह समझते हैं कि डिजिटल रिकॉर्ड के दौर में भी वे पुरानी पद्धतियों से वसूली जारी रख सकते हैं।

किराये का कमरा और वसूली का अड्डा

​जांच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि आरोपित अंचल अमीन सुजीत कुमार नूनू बाबू चौक के पास जिस किराये के मकान में रहता था, वहीं से वह अपने ‘अनौपचारिक’ कार्यों का संचालन करता था। स्थानीय लोगों के अनुसार, अक्सर उस पते पर जमीन से संबंधित लोग अपनी फरियाद लेकर पहुँचते थे। निगरानी की टीम ने गिरफ्तारी के बाद उस कमरे की भी तलाशी ली, जहाँ से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने की सूचना है। अधिकारियों ने अमीन के व्यक्तिगत सामान और मोबाइल फोन को भी जब्त कर लिया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस सिंडिकेट में अंचल कार्यालय के कुछ अन्य बड़े अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल हैं।

​निगरानी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अक्सर ऐसे मामलों में अमीन अकेले काम नहीं करते। उनके ऊपर और नीचे एक पूरा नेटवर्क होता है जो जमीन की मापी से लेकर म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) तक के काम को अटकाता है और फिर सुलझाने के नाम पर पैसे ऐंठता है। सुजीत कुमार से प्रारंभिक पूछताछ के बाद कई ऐसे सुराग मिले हैं जिन पर निगरानी इकाई आने वाले दिनों में अपनी जांच का दायरा बढ़ा सकती है।

पटना की विशेष अदालत में होगी पेशी

​गिरफ्तारी के बाद सुजीत कुमार को कड़ी सुरक्षा के बीच हाजीपुर से पटना ले जाया गया। रात भर उससे गहन पूछताछ की गई ताकि यह समझा जा सके कि उसने अब तक कितने लोगों से इस तरह की उगाही की है। निगरानी विभाग के सूत्रों के अनुसार, सुजीत के बैंक खातों और अचल संपत्तियों की भी जांच शुरू कर दी गई है। यह देखा जा रहा है कि एक सरकारी अमीन की मामूली तनख्वाह के अलावा उसके पास आय से अधिक संपत्ति का कोई मामला तो नहीं बनता है।

​मंगलवार को सुजीत कुमार को पटना स्थित विशेष निगरानी न्यायालय (Vigilance Court) में पेश किया जाएगा। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में रंगेहाथ गिरफ्तारी के साक्ष्य, केमिकल टेस्ट की रिपोर्ट और परिवादी के बयान पेश किए जाएंगे। निगरानी विभाग आरोपी की रिमांड की भी मांग कर सकता है ताकि उससे जुड़ी कड़ियों को और अधिक स्पष्ट किया जा सके। 11 मई की यह कार्रवाई वैशाली जिले के प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है, जहाँ जिलाधिकारी ने भी स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के किसी भी मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।

राजस्व विभाग की छवि पर एक और दाग

​बिहार में पिछले कुछ वर्षों में सबसे अधिक निगरानी की कार्रवाइयां राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के कर्मचारियों पर ही हुई हैं। कभी राजस्व कर्मचारी, कभी अंचल अधिकारी (CO) तो कभी अमीन सलाखों के पीछे पहुँचते रहे हैं। मुख्यमंत्री द्वारा बार-बार दिए गए निर्देशों और ऑनलाइन सिस्टम को पारदर्शी बनाने के दावों के बीच सुजीत कुमार जैसी गिरफ्तारियां यह बताती हैं कि सिस्टम के भीतर की सड़न को खत्म करने के लिए अभी और भी कड़े प्रहारों की जरूरत है।

​लालगंज के लोगों ने इस कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया है। आनंद कुमार की इस बहादुरी की सराहना की जा रही है कि उन्होंने रिश्वत देने के बजाय तंत्र की सफाई के लिए कदम उठाया। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर लोग डर के कारण या समय बचाने के लिए पैसे दे देते हैं, जिससे सुजीत कुमार जैसे लोगों के हौसले बढ़ जाते हैं। हाजीपुर की इस घटना ने आम जनता को यह भरोसा दिलाया है कि यदि वे सही तरीके से शिकायत करें, तो निगरानी विभाग भ्रष्ट अधिकारियों को उनके अंजाम तक पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।

​फिलहाल, लालगंज अंचल कार्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ है और सुजीत कुमार की गिरफ्तारी के बाद अन्य कर्मी भी सहमे हुए हैं। निगरानी विभाग का कहना है कि उनकी हेल्पलाइन और कार्यालय आम जनता के लिए 24 घंटे खुले हैं। यदि कोई भी लोक सेवक अपने पद का दुरुपयोग कर रिश्वत की मांग करता है, तो नागरिक निडर होकर इसकी सूचना दे सकते हैं। सुजीत कुमार अब कानून के घेरे में है और उसकी यह ’50 हजार की भूख’ उसे न केवल अपनी नौकरी से हाथ धोने पर मजबूर करेगी, बल्कि उसे एक लंबे समय तक जेल की दीवारों के पीछे भी रखेगी।

​इस कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन ने भी सभी अंचलों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने और आम लोगों की शिकायतों का समयबद्ध निपटारा करने का कड़ा निर्देश दिया है। यह देखना होगा कि क्या इस गिरफ्तारी के बाद लालगंज और वैशाली के अन्य अंचलों में भ्रष्टाचार की जड़ें कमजोर होती हैं या नहीं।

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