​सीतामढ़ी में गहनों की ‘डील’ पड़ी महंगी: 14.56 लाख के जेवरात लेकर मुकरी पूर्व भाजपा नेत्री, शाहीन परवीन को पुलिस ने दबोचा

सीतामढ़ी। बिहार के सीतामढ़ी जिले में विश्वास और व्यापार के बीच उपजे एक बड़े वित्तीय विवाद ने अब कानूनी और राजनीतिक मोड़ ले लिया है। शहर के एक प्रतिष्ठित स्वर्ण व्यवसायी और भाजपा नेता के साथ लाखों रुपये की ठगी करने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की पूर्व जिलाध्यक्ष शाहीन परवीन को साढ़े 14 लाख रुपये से अधिक के सोने के आभूषणों के गबन के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। 11 मई 2026 को नगर थाना पुलिस द्वारा की गई इस गिरफ्तारी ने जिले के राजनीतिक और व्यावसायिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। यह मामला केवल एक साधारण लेनदेन का नहीं, बल्कि साख और रसूख के गलत इस्तेमाल की एक लंबी कहानी बयां करता है, जहाँ एक व्यवसायी को अपने ही दल की पूर्व पदाधिकारी की वजह से भारी आर्थिक चपत लगी है।

विश्वास पर आधारित थी सोने की खरीदारी

​इस पूरे प्रकरण की शुरुआत 13 अप्रैल 2021 को हुई थी, जब कोरोना काल की बंदिशों के बीच बाजार अपनी रफ़्तार पकड़ने की कोशिश कर रहे थे। सीतामढ़ी शहर के जाने-माने स्वर्ण व्यवसायी ध्रुव कुमार सर्राफ की दुकान पर शाहीन परवीन अपने एक करीबी सहयोगी मो. अली अंसारी के साथ पहुँची थीं। ध्रुव कुमार सर्राफ, जो स्वयं भाजपा में सक्रिय रहे हैं, उनके लिए शाहीन परवीन का आना एक सामान्य और विश्वसनीय ग्राहक के तौर पर था। शाहीन ने उस वक्त अपने घर में शादी होने का हवाला दिया और भारी मात्रा में आभूषण दिखाने का आग्रह किया।

​व्यवसायी के अनुसार, शाहीन और उनके सहयोगी ने घंटों तक गहनों का निरीक्षण किया और अंततः लगभग 259.520 ग्राम सोने के आभूषणों का चयन किया। इन आभूषणों में सोने के नक्काशीदार हार, जंजीरें (चेन), कंगन और कई कलात्मक अंगूठियां शामिल थीं। उस समय इन गहनों का कुल मूल्य 14 लाख 56 हजार 700 रुपये तय किया गया था। शाहीन ने व्यवसायी को भरोसा दिलाया कि भुगतान की प्रक्रिया जल्द ही पूरी कर दी जाएगी और फिलहाल वे घर में मांगलिक कार्य होने के कारण गहने ले जाना चाहती हैं। व्यवसायी ने भी पुराने संबंधों और राजनीतिक परिचय के आधार पर बिना नकद भुगतान के ही जेवरात सौंप दिए।

चेक का खेल और टालमटोल की रणनीति

​गहने ले जाने के बाद भुगतान की बारी आई, तो शाहीन परवीन और मो. अली अंसारी ने एक नई चाल चली। व्यवसायी ध्रुव कुमार सर्राफ को 10 लाख, 4 लाख और 50 हजार रुपये के तीन अलग-अलग चेक थमा दिए गए। ये चेक शाहीन और अली अंसारी के संयुक्त खाते से जारी किए गए थे। हालांकि, चेक देने के साथ ही आरोपितों ने व्यवसायी पर यह दबाव बनाना शुरू कर दिया कि वे कम से कम दो महीने तक इन चेकों को बैंक में जमा न करें। व्यवसायी का कहना है कि उन्होंने उनकी बात मान ली, लेकिन जब दो महीने बाद बैंक में चेक लगाने की बात आई, तो आरोपितों ने उन्हें नकद भुगतान का झांसा देना शुरू कर दिया।

​महीनों तक यह सिलसिला चलता रहा। कभी कहा गया कि फंड की व्यवस्था हो रही है, तो कभी किसी निजी समस्या का हवाला दिया गया। ध्रुव कुमार सर्राफ को धीरे-धीरे यह अहसास होने लगा कि उनके साथ विश्वासघात किया गया है। उन्होंने कई बार शाहीन परवीन के आवास और उनके परिचितों के माध्यम से संपर्क साधा, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी। न तो सोने के गहने वापस किए गए और न ही उनकी कीमत का एक भी रुपया व्यवसायी के खाते में पहुँचा। व्यवसायी के लिए यह स्थिति न केवल आर्थिक रूप से नुकसानदेह थी, बल्कि एक ही विचारधारा से जुड़े व्यक्ति द्वारा किए गए इस कृत्य ने उन्हें मानसिक रूप से भी परेशान कर दिया।

अदालती नोटिस और पुलिसिया कार्रवाई का सफर

​जब बातचीत के सारे रास्ते बंद हो गए, तो ध्रुव कुमार सर्राफ ने कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने अधिवक्ता विमल कुमार शुक्ला के माध्यम से शाहीन परवीन को एक औपचारिक कानूनी नोटिस भेजा। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से जेवरात वापस करने या बकाया राशि का भुगतान करने की मांग की गई थी। व्यवसायी को उम्मीद थी कि नोटिस मिलने के बाद आरोपित पक्ष दबाव में आएगा और उनका पैसा लौटा देगा, लेकिन शाहीन परवीन की ओर से कोई संतोषजनक या ठोस जवाब नहीं दिया गया।

​अंततः व्यवसायी ने सीतामढ़ी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के समक्ष अपना दुखड़ा सुनाया और लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई। एसपी के निर्देश पर नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। नगर थानाध्यक्ष धनंजय चौधरी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक टीम का गठन किया। सोमवार को पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर शाहीन परवीन को उनके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया। थानाध्यक्ष ने बताया कि आरोपित को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और इस मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

गबन के पुराने मामलों में भी ‘फरार’ थीं शाहीन

​गिरफ्तारी के बाद शाहीन परवीन के बारे में जो जानकारी सामने आई, वह और भी चौंकाने वाली है। नगर थानाध्यक्ष धनंजय चौधरी के अनुसार, शाहीन परवीन केवल इस स्वर्ण व्यवसायी के मामले में ही आरोपी नहीं थीं, बल्कि वे गबन के एक पुराने मामले में भी पुलिस की फाइलों में ‘फरार’ चल रही थीं। पुलिस काफी समय से उनकी तलाश कर रही थी, लेकिन वे अपनी राजनीतिक पकड़ और लुका-छिपी की वजह से बचती आ रही थीं। 14 लाख रुपये के इस नए मामले ने पुलिस को उन्हें दबोचने का एक पुख्ता आधार दे दिया।

​पुलिस अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि शाहीन परवीन ने क्या इसी तरह अन्य व्यवसायियों को भी अपनी राजनीतिक साख के दम पर चूना लगाया है। उनके करीबी सहयोगी मो. अली अंसारी की भी तलाश तेज कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है, जहाँ रसूखदार पदों का इस्तेमाल कर छोटे और मध्यम दर्जे के व्यापारियों से कीमती सामान ऐंठा जाता है।

भाजपा संगठन ने झाड़ा पल्ला: “फिलहाल कोई पद नहीं”

​शाहीन परवीन की गिरफ्तारी के बाद भाजपा के जिला संगठन के भीतर भी खलबली मची है। विरोधी दलों ने इस मामले को लेकर सत्ता पक्ष पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। हालांकि, भाजपा के जिला अध्यक्ष मनीष गुप्ता ने इस पूरे प्रकरण पर पार्टी का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि शाहीन परवीन वर्तमान में पार्टी के भीतर किसी भी जिम्मेदार पद पर नहीं हैं। वे पहले अल्पसंख्यक मोर्चा की जिलाध्यक्ष रह चुकी हैं, लेकिन वर्तमान में उनका संगठन से कोई आधिकारिक जुड़ाव नहीं है।

​पार्टी नेतृत्व का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत गड़बड़ी के लिए संगठन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। भाजपा ने यह भी संकेत दिया है कि यदि कोई कार्यकर्ता या पूर्व पदाधिकारी आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाया जाता है, तो पार्टी उसका समर्थन नहीं करेगी। हालांकि, शहर के लोग इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि जिस व्यवसायी के साथ ठगी हुई, वे स्वयं भी भाजपा के पुराने स्तंभों में से एक हैं, ऐसे में यह लड़ाई एक ही घर के दो किरदारों के बीच की हो गई है।

स्वर्ण व्यवसायी समाज में आक्रोश

​सीतामढ़ी के स्वर्ण व्यवसायी समाज ने इस गिरफ्तारी का स्वागत किया है, लेकिन उनमें इस बात को लेकर गुस्सा भी है कि राजनीतिक रसूख वाले लोग किस तरह व्यवसायियों को प्रताड़ित करते हैं। आभूषण विक्रेता संघ के स्थानीय सदस्यों का कहना है कि कच्चा बिल बनवाकर सामान ले जाना और फिर भुगतान के लिए महीनों तक चक्कर कटवाना एक गंभीर समस्या है। ध्रुव कुमार सर्राफ के साथ हुए इस धोखे ने अन्य दुकानदारों को भी सतर्क कर दिया है। व्यवसायी समाज की मांग है कि शाहीन परवीन के पास से उन जेवरातों की बरामदगी सुनिश्चित की जाए या फिर बाजार दर पर उनका पूरा भुगतान कराया जाए।

​11 मई 2026 की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि कानून के हाथ लंबे हैं और राजनीतिक संरक्षण भी किसी को धोखाधड़ी के इल्जाम से नहीं बचा सकता। शाहीन परवीन अब सलाखों के पीछे हैं और आने वाले दिनों में उनके खिलाफ गबन के अन्य मामलों में भी कड़ी पूछताछ होने की संभावना है। सीतामढ़ी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले में अंतिम आरोप पत्र दाखिल करने तक हर सबूत को बारीकी से खंगालेंगे। फिलहाल, व्यवसायी ध्रुव कुमार सर्राफ को न्याय की उम्मीद जगी है, लेकिन उनके 14.56 लाख रुपये की वापसी का रास्ता अभी भी कानूनी पेचीदगियों के बीच फंसा हुआ है।

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