
भागलपुर। कला और संस्कृति की ऐतिहासिक भूमि भागलपुर में रचनात्मकता को संस्थागत रूप देने की दिशा में सोमवार को एक बड़ा और प्रभावी कदम उठाया गया। बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा संचालित ‘आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र, भागलपुर’ में बहुप्रतीक्षित फोटोग्राफी क्लास के पहले बैच का विधिवत शुभारंभ किया गया। 11 मई 2026 की यह तिथि उन 35 युवाओं के लिए एक नई शुरुआत लेकर आई है, जो कैमरे की नजर से दुनिया को देखने और उसे संवारने का हुनर सीखना चाहते हैं। यह प्रशिक्षण केंद्र अब केवल पारंपरिक कलाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बदलते समय की मांग के अनुरूप आधुनिक दृश्य कलाओं (Visual Arts) को भी अपने पाठ्यक्रम में शामिल कर रहा है। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने इस प्रथम बैच के प्रशिक्षक के रूप में कमान संभाली है, जिससे यह स्पष्ट है कि विभाग इस प्रशिक्षण की गुणवत्ता को लेकर अत्यंत गंभीर है।
चयन प्रक्रिया और प्रशिक्षुओं का उत्साह
आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में फोटोग्राफी क्लास की शुरुआत एक व्यवस्थित और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से की गई है। इस पाठ्यक्रम के प्रति जिले के युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। विभाग को बड़ी संख्या में ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्राप्त हुए थे, जिसके बाद एक औपचारिक चयन परीक्षा का आयोजन किया गया। इस परीक्षा की कड़ी कसौटी पर खरा उतरने के बाद कुल 35 प्रशिक्षुओं का चयन पहले बैच के लिए किया गया है।
प्रशिक्षण सत्र के पहले दिन अंकित रंजन ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि फोटोग्राफी केवल एक बटन दबाने की क्रिया नहीं है, बल्कि यह समय को एक फ्रेम में कैद करने की कला है। उन्होंने बताया कि आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र का उद्देश्य भागलपुर के छिपे हुए हुनर को निखारना और उन्हें एक ऐसा मंच प्रदान करना है, जहाँ वे अपनी रचनात्मकता को व्यावसायिक ऊंचाई दे सकें। प्रशिक्षण का यह कार्य सप्ताह में तीन दिन निर्धारित किया गया है, ताकि छात्र अपनी नियमित पढ़ाई या अन्य कार्यों के साथ इस कौशल को भी सीख सकें।
पाठ्यक्रम: इतिहास से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक
फोटोग्राफी का यह तीन महीने का पाठ्यक्रम अत्यंत व्यापक और आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। अंकित रंजन द्वारा दी जा रही जानकारी के अनुसार, प्रशिक्षुओं को फोटोग्राफी की बारीकियों को चार प्रमुख चरणों में सिखाया जाएगा:
- फोटोग्राफी का इतिहास और बेसिक्स: किसी भी कला को सीखने के लिए उसकी जड़ों को समझना आवश्यक है। प्रशिक्षुओं को कैमरे के विकास, लेंस के विज्ञान और प्रकाश (Lighting) के मूलभूत सिद्धांतों के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है।
- फोटोग्राफी के प्रकार: वाइल्डलाइफ, पोर्ट्रेट, लैंडस्केप और स्ट्रीट फोटोग्राफी जैसे विभिन्न विधाओं के अंतर और उनकी चुनौतियों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।
- फोटो एडिटिंग: आज के डिजिटल युग में क्लिक की गई तस्वीर को तराशना भी उतना ही जरूरी है। प्रशिक्षुओं को आधुनिक सॉफ्टवेयर के माध्यम से एडिटिंग के गुर सिखाए जाएंगे।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रयोग: इस पाठ्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता फोटोग्राफी में एआई के बढ़ते प्रभाव की जानकारी देना है। एआई का उपयोग तस्वीरों को बेहतर बनाने और रचनात्मक प्रयोगों में कैसे किया जाए, यह इस बैच का मुख्य आकर्षण है।
तीन माह के इस गहन प्रशिक्षण के सफल समापन के बाद, सभी प्रशिक्षुओं को विभाग द्वारा आधिकारिक प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा, जो उनके करियर निर्माण में सहायक सिद्ध होगा।
बहुआयामी सांस्कृतिक केंद्र की ओर बढ़ते कदम
आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र अब भागलपुर में एक बड़े सांस्कृतिक हब के रूप में उभर रहा है। फोटोग्राफी क्लास तो महज एक शुरुआत है। अंकित रंजन ने भविष्य की योजनाओं का खुलासा करते हुए बताया कि केंद्र में शीघ्र ही संगीत और नृत्य की अन्य विधाओं का प्रशिक्षण भी शुरू किया जा रहा है।
आगामी पाठ्यक्रमों की सूची में शास्त्रीय गायन, कथक नृत्य, भरतनाट्यम नृत्य, तबला, ढोलक और हारमोनियम जैसे विषय शामिल हैं। इन विधाओं के लिए कुशल प्रशिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। विभाग की योजना है कि जिले के विद्यालयों में पदस्थापित संगीत शिक्षकों के अनुभव का लाभ भी इस केंद्र को मिले। इसके लिए गायन और वादन की श्रेणियों में नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यह पहल भागलपुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम बनेगी।
रंगमंच की दुनिया: ड्रामा क्लास में निखर रहे कलाकार
फोटोग्राफी के साथ-साथ आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में ड्रामा (रंगमंच) का प्रशिक्षण पहले से ही सुचारू रूप से चल रहा है। भागलपुर के वरिष्ठ और प्रतिष्ठित रंगकर्मी इस केंद्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ड्रामा क्लास के माध्यम से कलाकारों को अभिनय की बारीकियों, संवाद अदायगी और मंच संचालन के गुर सिखाए जा रहे हैं।
अब तक रितेश रंजन, मिथिलेश कुमार, साहिल राज और राजेश झा जैसे अनुभवी रंगकर्मियों ने कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए हैं। ये कलाकार प्रशिक्षुओं के साथ अपनी वर्षों की योग्यता और अनुभव साझा कर रहे हैं। ड्रामा क्लास की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन मिले, तो भागलपुर के कलाकार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। केंद्र में चल रहे सत्रों में केवल अभिनय ही नहीं, बल्कि नाटक के लेखन और निर्देशन पर भी चर्चा की जाती है, जिससे प्रशिक्षुओं का सर्वांगीण विकास हो रहा है।
डिजिटल क्रांति और युवा स्वरोजगार की संभावनाएं
2026 के इस दौर में फोटोग्राफी और दृश्य कलाओं का महत्व केवल शौक तक सीमित नहीं रहा है। डिजिटल मीडिया, विज्ञापन जगत और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स के लिए रोजगार के अपार अवसर पैदा किए हैं। आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र द्वारा दी जा रही यह शिक्षा भागलपुर के युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में भी प्रेरित करेगी। एआई जैसी तकनीक को पाठ्यक्रम में शामिल करना यह दर्शाता है कि विभाग भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार है।
अंकित रंजन ने कहा कि रचनात्मक गतिविधियों का यह सिलसिला थमने वाला नहीं है। आने वाले समय में यहाँ और भी कई वर्कशॉप और प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी, जहाँ प्रशिक्षु अपने काम को प्रदर्शित कर सकेंगे। यह केंद्र अब भागलपुर की युवा ऊर्जा को एक सकारात्मक और कलात्मक दिशा देने का केंद्र बिंदु बन चुका है। प्रशासन और कला विभाग के इस तालमेल से भागलपुर के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक नया सवेरा होता दिख रहा है। 11 मई की यह शुरुआत आने वाले वर्षों में भागलपुर से कई बड़े फोटोग्राफर्स और कलाकारों को जन्म देगी, जो अपनी कला के माध्यम से बिहार का नाम रौशन करेंगे।


