भागलपुर में सुशासन का नया ‘एक्शन प्लान’: 30 दिनों में नहीं सुलझी समस्या तो नपेंगे अधिकारी, दलालों पर नकेल के लिए थानों-दफ्तरों में लगेंगे सीसीटीवी

भागलपुर। बिहार के प्रशासनिक ढांचे में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर मुख्यमंत्री सचिवालय से निकली ‘सहयोग’ की गूँज अब भागलपुर के ग्रामीण अंचलों तक पहुँचने वाली है। सोमवार, 11 मई 2026 को जिला समाहारणालय में जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी और वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव ने एक महत्वपूर्ण बैठक कर जिले के तमाम आला अधिकारियों को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नए निर्देशों की कड़ाई से अनुपालन का अल्टीमेटम दिया है। 19 मई से शुरू होने वाले ‘सहयोग शिविर’ को लेकर प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। इस पूरी कवायद का मूल मंत्र यह है कि जनता को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए दफ्तरों की खाक न छाननी पड़े और फाइलों को दबाकर बैठने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सके। बैठक में साफ कर दिया गया कि अब व्यवस्था ‘डिजिटल डेडलाइन’ पर चलेगी, जहाँ 30 दिन की समय सीमा खत्म होते ही लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ ‘स्वतः निलंबन’ की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

हेल्पलाइन 1100 और सहयोग पोर्टल: न्याय का नया डिजिटल पता

​बैठक की शुरुआत मुख्यमंत्री द्वारा शुरू किए गए ‘सहयोग हेल्पलाइन नंबर 1100’ और ‘सहयोग पोर्टल’ की विस्तृत जानकारी के साथ हुई। जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने बताया कि अब भागलपुर के किसी भी गांव या पंचायत का व्यक्ति अपनी शिकायत घर बैठे 1100 नंबर पर दर्ज करा सकता है। इसके अलावा ‘sss.bihar.gov.in/sahyog’ वेब पते के जरिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है।

​इस पूरी व्यवस्था को पंचायत स्तर तक ले जाने के लिए प्रत्येक माह के पहले और अंतिम मंगलवार को ‘सहयोग शिविर’ आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। नवल किशोर चौधरी ने निर्देश दिया कि शिविर आयोजित होने से ठीक 15 दिन पहले हर विभाग को अपने नोडल पदाधिकारियों की नियुक्ति करनी होगी। ये पदाधिकारी न केवल आवेदन प्राप्त करेंगे, बल्कि उन्हें रियल टाइम में सहयोग पोर्टल पर अपलोड भी करेंगे। इससे आवेदनों के गुम होने या उन पर कार्रवाई न होने की पुरानी समस्याओं का अंत होगा।

30 दिनों की ‘लक्ष्मण रेखा’ और स्वतः निलंबन का कड़ा संदेश

​इस पूरी योजना का सबसे कड़ा और क्रांतिकारी पहलू ‘समय सीमा’ का निर्धारण है। बैठक में मौजूद अधिकारियों को चेतावनी दी गई कि शिविर या पोर्टल से प्राप्त किसी भी आवेदन का निष्पादन हर हाल में 15 से 30 दिनों के भीतर करना होगा। यदि कोई मामला 30 दिनों की निर्धारित अवधि को पार करता है और पोर्टल पर उसका संतोषजनक निष्पादन दर्ज नहीं होता है, तो संबंधित पदाधिकारी के विरुद्ध स्वतः निलंबन (Automatic Suspension) की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

​नवल किशोर चौधरी ने स्पष्ट किया कि फाइलों को अटकाना अब अधिकारियों को भारी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई मांग या आवेदन नियमानुसार योग्य नहीं पाया जाता है, तो उसे केवल खारिज न करें, बल्कि उसका ठोस कारण बताते हुए एक विस्तृत जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करें और उसकी एक प्रति संबंधित व्यक्ति को भी उपलब्ध कराएं। इससे जनता में यह विश्वास पैदा होगा कि उनके मामले को ईमानदारी से देखा गया है।

दलाली प्रथा पर ‘सर्जिकल प्रहार’: सीसीटीवी कैमरों की सख्त निगरानी

​प्रशासन ने थानों और सरकारी दफ्तरों में पैठ बना चुके ‘ब्रोकर’ यानी दलालों के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के आलोक में जिले के सभी सरकारी कार्यालयों और थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का कार्य तेज कर दिया गया है। इन कैमरों का उद्देश्य केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि ‘भ्रष्टाचार की मॉनिटरिंग’ करना है।

​वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव ने बताया कि यदि सीसीटीवी फुटेज में कोई बाहरी व्यक्ति किसी कार्यालय या थाने में अनावश्यक रूप से बार-बार प्रवेश करता पाया गया, तो उसकी गहन जांच की जाएगी। यदि वह व्यक्ति बिचौलिये या दलाल के रूप में सक्रिय पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन अब थानों में आने वाले हर व्यक्ति और वहां तैनात कर्मियों की गतिविधियों पर डिजिटल नजर रखेगा। यह कदम आम नागरिकों को बिचौलियों के शोषण से बचाने के लिए उठाया गया है।

पुलिसिया जवाबदेही: लंबित मामलों पर एसएसपी का हंटर

​वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव ने विशेष रूप से अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों और थानाध्यक्षों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस से संबंधित शिकायतों को लेकर किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 30 दिनों के भीतर कार्रवाई न होने पर निलंबन की तलवार केवल सिविल अधिकारियों पर ही नहीं, बल्कि पुलिस विभाग के जिम्मेदारों पर भी लटकेगी।

एसएसपी के प्रमुख निर्देश:

  • सब-इंस्पेक्टरों की जवाबदेही: थानाध्यक्ष अपने थानों में पदस्थापित सब-इंस्पेक्टरों को विशिष्ट मामलों का उत्तरदायित्व सौंपें और उनके निष्पादन की साप्ताहिक समीक्षा करें।
  • भरण-पोषण मामले: माता-पिता के भरण-पोषण से संबंधित मामलों में उन्होंने अनुमंडल दंडाधिकारी को प्राप्त शक्तियों (5000 रुपये तक जुर्माना या 3 माह का कारावास) का कड़ाई से उपयोग करने का अनुरोध किया।
  • जमीन विवाद: जिले में अपराध की एक बड़ी जड़ जमीन विवाद है। थानाध्यक्षों को निर्देश दिया गया कि वे ऐसे मामलों में त्वरित हस्तक्षेप कर पोर्टल पर अद्यतन रिपोर्ट दर्ज करें।

रियल टाइम मॉनिटरिंग और मुख्यमंत्री कार्यालय का सीधा हस्तक्षेप

​बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि सहयोग पोर्टल की मॉनिटरिंग सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से की जाएगी। इसका अर्थ यह है कि भागलपुर की किसी पंचायत में क्या हो रहा है और वहां के अधिकारी कितने सक्रिय हैं, इसका पूरा डेटा पटना में मौजूद उच्चाधिकारियों के डैशबोर्ड पर उपलब्ध होगा।

​उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि सभी कार्यालयों के प्रधानों को एक अलग ‘अद्यतन पंजी’ (Updated Register) संधारित करनी होगी, जिसमें आवेदन की प्राप्ति से लेकर उसके निष्पादन तक की पूरी स्थिति दर्ज होगी। यह पंजी किसी भी समय निरीक्षण के लिए तैयार रहनी चाहिए। उन्होंने बीडीओ और थानाध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे पंचायत शिविरों को सफल बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें।

प्रशासनिक मुस्तैदी और भविष्य की चुनौतियां

​11 मई 2026 की इस उच्चस्तरीय बैठक ने यह साफ कर दिया है कि भागलपुर जिला प्रशासन अब ‘प्रो-एक्टिव मोड’ में है। नगर पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह और अपर समाहर्ता दिनेश राम सहित कई वरीय पदाधिकारियों ने भी अपने-अपने विभागों को लेकर कार्ययोजना पेश की। प्रखंडों के बीडीओ और थानाध्यक्ष जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े थे, उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे 19 मई से शुरू होने वाले शिविरों के लिए लॉजिस्टिक और तकनीकी तैयारी पूर्ण कर लें।

​भागलपुर की जनता के लिए यह ‘सहयोग’ पहल एक बड़ा बदलाव ला सकती है, बशर्ते धरातल पर अधिकारी मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन उसी तत्परता से करें जैसा इस बैठक में संकल्प लिया गया है। 30 दिन की समय सीमा और स्वतः निलंबन का प्रावधान अधिकारियों के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति है। भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और बिचौलिया मुक्त व्यवस्था का यह नया मॉडल बिहार के सुशासन को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का दावा करता है।

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