TMBU में छात्र जदयू का हल्ला बोल: परीक्षा विभाग के खिलाफ फूटा आक्रोश, तालाबंदी के बाद प्रशासन ने दिया 24 घंटे का समय

भागलपुर। बिहार के प्रतिष्ठित और पुराने शैक्षणिक केंद्रों में शुमार तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) एक बार फिर छात्रों और प्रशासन के बीच टकराव का अखाड़ा बन गया है। सोमवार, 11 मई 2026 की सुबह विश्वविद्यालय परिसर में भारी गहमागहमी और नारों की गूँज के साथ शुरू हुई। छात्र जनता दल यूनाइटेड (छात्र जदयू) ने विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और नई शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन में आ रही विसंगतियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पूरे विश्वविद्यालय के कामकाज को ठप कर दिया। विश्वविद्यालय अध्यक्ष एहसान उल राजा, जिन्हें छात्र डेविड के नाम से भी जानते हैं, के नेतृत्व में छात्रों के एक बड़े समूह ने प्रशासनिक भवन और परीक्षा विभाग की तालाबंदी कर दी। छात्रों का मुख्य आरोप है कि विश्वविद्यालय का परीक्षा विभाग जानबूझकर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है और विभिन्न तकनीकी पेचीदगियों के नाम पर छात्रों का मानसिक और आर्थिक शोषण किया जा रहा है।

परीक्षा विभाग पर ‘भविष्य से खिलवाड़’ का गंभीर आरोप

​छात्र जदयू के आंदोलन का मुख्य केंद्र परीक्षा विभाग की वे कथित खामियां रहीं, जिनके कारण सैकड़ों छात्रों का शैक्षणिक सत्र संकट में पड़ गया है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार छात्रों को अनुत्तीर्ण (फेल) कर रहा है, जिससे उनकी डिग्रियों और भविष्य के करियर पर काले बादल मंडरा रहे हैं। विशेष रूप से सेमेस्टर-5 में नामांकन की प्रक्रिया को लेकर छात्रों के बीच भारी असंतोष है। छात्रों का दावा है कि नामांकन प्रक्रिया में धांधली की जा रही है। कई ऐसे छात्र जो सेमेस्टर-1 में सफलतापूर्वक उत्तीर्ण हो चुके थे, उन्हें भी सेमेस्टर-5 के नामांकन के समय विफल या अयोग्य घोषित किया जा रहा है। यह तकनीकी विसंगति है या कोई संगठित लापरवाही, इसकी जांच की मांग को लेकर छात्र अड़े हुए हैं।

​प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि अंक सुधार और दोबारा जांच के नाम पर छात्रों से अवैध वसूली और आर्थिक शोषण के विभिन्न तरीके अपनाए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब छात्रों के लिए यह स्थिति न केवल कष्टकारी है, बल्कि उनके लिए उच्च शिक्षा के रास्ते बंद करने जैसी है।

तालाबंदी और विरोध का दृश्य: जब बंद हुआ टीएमबीयू

​सोमवार सुबह जैसे ही विश्वविद्यालय खुला, छात्र जदयू के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में जुटने लगे। वसीम (महानगर जिला अध्यक्ष, छात्र जदयू) और सनी पंडित (विश्वविद्यालय उपाध्यक्ष) की मौजूदगी में प्रदर्शनकारियों ने पहले मुख्य द्वार को जाम किया और फिर परीक्षा विभाग की ओर कूच किया। छात्रों के आक्रोश को देखते हुए कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। छात्रों ने परीक्षा विभाग पहुँचकर वहां के काम को पूरी तरह रोक दिया और अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

​एहसान उल राजा उर्फ डेविड ने इस मौके पर कहा कि तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में जिस प्रकार छात्रों के साथ परीक्षा विभाग द्वारा अत्याचार किया जा रहा है, वह किसी भी सूरत में निंदनीय और असहनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्र अब केवल आश्वासनों से मानने वाले नहीं हैं। प्रदर्शन के दौरान सोनी कुमारी, बानू प्रिया, स्नेहा कुमारी, सोनम राज, आयुष कुमार, निशांत कुमार, रूपक, सुधांशु और कई अन्य सक्रिय छात्र नेताओं ने अपनी बात रखी और विश्वविद्यालय प्रशासन के लचीले रवैये की कड़ी आलोचना की।

प्रशासनिक संवाद और 24 घंटे का अल्टीमेटम

​छात्रों के उग्र प्रदर्शन और विश्वविद्यालय की तालाबंदी को देखते हुए प्रशासन हरकत में आया। विश्वविद्यालय के वरीय अधिकारियों और परीक्षा नियंत्रक के प्रतिनिधिमंडल ने छात्र नेताओं के साथ वार्ता की। घंटों चली इस तनातनी के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की समस्याओं को विस्तार से सुना।

​छात्र जदयू के प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों के सामने सेमेस्टर-1 और सेमेस्टर-5 के नामांकन से जुड़ी विसंगतियों के साक्ष्य रखे। छात्रों के तर्क सुनने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह आश्वासन दिया कि इन समस्याओं का समाधान कल यानी 12 मई तक हर हाल में कर दिया जाएगा। प्रशासन ने स्वीकार किया कि परिणामों और नामांकन में जो भी तकनीकी त्रुटियां हैं, उन्हें त्वरित प्रभाव से दुरुस्त किया जाएगा।

​हालांकि, छात्र जदयू ने इस आश्वासन को ‘अंतिम चेतावनी’ के रूप में लिया है। एहसान उल राजा ने साफ तौर पर कहा कि यदि मंगलवार तक छात्रों की समस्याओं का निराकरण नहीं होता है और फेल किए गए छात्रों के साथ न्याय नहीं होता, तो छात्र जदयू विश्वविद्यालय का पुनः घेराव करेगी। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगले चरण में छात्र आमरण अनशन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

नई शिक्षा नीति (NEP) और स्थानीय अव्यवस्था के बीच छात्र

​इस पूरे विवाद के पीछे एक बड़ा कारण नई शिक्षा नीति के तहत सेमेस्टर सिस्टम और क्रेडिट सिस्टम को लेकर आ रही व्यवहारिक कठिनाइयाँ भी हैं। छात्रों का मानना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन नई व्यवस्था को लागू करने में पूरी तरह विफल रहा है। सॉफ्टवेयर की गलतियां हों या मानव जनित त्रुटियां, भुगतना छात्रों को पड़ रहा है। भागलपुर के इस ऐतिहासिक विश्वविद्यालय में रिजल्ट के प्रकाशन में देरी और अंकपत्रों में गड़बड़ी कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार छात्रों ने इसे आर-पार की लड़ाई बना लिया है।

​छात्र जदयू के नेताओं ने कहा कि जब तक विश्वविद्यालय की कार्यसंस्कृति में सुधार नहीं आता और परीक्षा विभाग जवाबदेह नहीं बनता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। महानगर जिला अध्यक्ष वसीम ने कहा कि छात्र जदयू का हर कार्यकर्ता छात्रों के अधिकारों के लिए खड़ा है और किसी भी कीमत पर छात्रों का भविष्य बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

​छात्र जदयू द्वारा किए गए इस बड़े विरोध प्रदर्शन ने भागलपुर की स्थानीय राजनीति और सत्ता के गलियारों में भी चर्चा तेज कर दी है। चूंकि छात्र जदयू सीधे तौर पर सत्तारूढ़ दल से जुड़ा संगठन है, इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव काफी बढ़ गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि मंगलवार की निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रशासन किस तरह का ‘समाधान’ निकालता है।

​विश्वविद्यालय परिसर में शाम तक माहौल तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में रहा। छात्रों ने फिलहाल तालाबंदी खोल दी है, लेकिन वे अब भी प्रशासन की अगली कार्यवाही पर पैनी नजर रखे हुए हैं। भागलपुर विश्वविद्यालय की साख और हजारों छात्रों का करियर अब प्रशासन की उस रिपोर्ट और निर्णय पर टिका है जो अगले 24 घंटों में आने वाला है।

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