बिहार में अवैध खनन पर पूर्ण विराम का संकल्प: डॉ. प्रमोद कुमार ने संभाली खान एवं भूतत्व विभाग की कमान, माफियाओं को दी कड़ी चेतावनी

पटना। बिहार की धरती से निकलने वाली खनिज संपदा अब माफियाओं की जागीर नहीं रहेगी। राज्य की राजस्व व्यवस्था और पर्यावरण के लिए गंभीर संकट बन चुके अवैध खनन के कारोबार पर अब सरकारी हंटर चलने वाला है। सोमवार, 11 मई 2026 को खान एवं भूतत्व विभाग के कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्यभार संभालते ही डॉ. प्रमोद कुमार ने अपने इरादे पूरी तरह साफ कर दिए हैं। राजधानी पटना के विकास भवन स्थित कार्यालय में पदभार ग्रहण करने के बाद आयोजित पहली प्रेस वार्ता में उनके तेवर अत्यंत कड़े नजर आए। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि राज्य की प्राकृतिक संपदा को लूटने वालों की अब खैर नहीं है। मंत्री का यह बयान केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि बिहार के उन सिंडिकेट्स के खिलाफ एक बड़े प्रशासनिक प्रहार का शंखनाद माना जा रहा है जो रात के अंधेरे में पहाड़ों और नदियों का सीना चीरकर सरकारी खजाने को भारी चूना लगा रहे हैं।

पदभार ग्रहण और पारदर्शिता का संकल्प

​सोमवार की सुबह जब डॉ. प्रमोद कुमार विभाग के कार्यालय पहुँचे, तो वहां की हलचल देखते ही बनती थी। विभाग के वरीय पदाधिकारियों ने उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट किए, लेकिन औपचारिकताओं के तुरंत बाद ही उन्होंने कामकाज का मोर्चा संभाल लिया। मीडिया से मुखातिब होते हुए डॉ. प्रमोद कुमार ने स्पष्ट किया कि उनकी पहली प्राथमिकता विभाग से भ्रष्टाचार की जड़ों को उखाड़ फेंकना है। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार पारदर्शिता के सिद्धांत पर चलती है और इस विभाग में भी वही पारदर्शिता धरातल पर दिखाई देगी।

​डॉ. प्रमोद कुमार ने अवैध खनन में संलिप्त माफियाओं और उनके संरक्षकों को चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग कानून की धज्जियां उड़ाकर अवैध तरीके से उत्खनन कर रहे हैं, वे अपनी उल्टी गिनती शुरू कर दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की नजर हर उस गतिविधि पर है जो राज्य के संसाधनों का अवैध दोहन कर रही है। हालांकि, उन्होंने वैध तरीके से काम करने वाले पट्टाधारकों और व्यापारियों को आश्वस्त किया कि उन्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार नियम संगत काम करने वालों को हर संभव सुरक्षा और सहयोग प्रदान करेगी।

माफियाओं की पहचान और विशेष कार्ययोजना

​मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि केवल बयानों से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर ठोस और प्रभावी कार्यवाही होगी। इसके लिए उन्होंने एक विस्तृत कार्ययोजना का खाका पेश किया। डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि वे जल्द ही विभाग के सभी आला अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य भर में सक्रिय वैध और अवैध खनन स्थलों की सटीक पहचान करना होगा।

​अवैध खनन स्थलों की पहचान के लिए अब पारंपरिक तरीकों के बजाय आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के समन्वय से ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी जो अवैध खनन की शिकायतों पर तत्काल प्रतिक्रिया दे सके। अवैध खनन के कारण बिहार सरकार को हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है। मंत्री ने निर्देश दिया है कि रॉयल्टी चोरी और अवैध ढुलाई को रोकने के लिए चेक पोस्टों को और अधिक सख्त बनाया जाए और वहां तैनात कर्मियों की जवाबदेही तय की जाए।

पहाड़ों की कटाई और भू-वैज्ञानिकों की भूमिका

​प्रेस वार्ता के दौरान जब पत्रकारों ने बंद पड़े पहाड़ों की कटाई और उनके लीज को लेकर सवाल पूछा, तो डॉ. प्रमोद कुमार ने बहुत ही संतुलित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने कहा कि किसी भी पहाड़ की कटाई या खनन कार्य शुरू करने से पहले पर्यावरण और भूगोल का ध्यान रखना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में कोई भी निर्णय लेने से पहले भू-वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम से परामर्श किया जाएगा। उनकी रिपोर्ट और तकनीकी सलाह के बाद ही यह तय होगा कि कहाँ खनन सुरक्षित है और कहाँ पर्यावरण को गंभीर खतरा हो सकता है। यह बयान दर्शाता है कि नई व्यवस्था में केवल आर्थिक लाभ को ही प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन का भी पूरा ख्याल रखा जाएगा।

प्रशासनिक अनुशासन और समयबद्धता

​डॉ. प्रमोद कुमार ने न केवल बाहरी माफियाओं पर निशाना साधा, बल्कि विभाग के भीतर की कार्य संस्कृति को भी सुधारने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी समय पर कार्यालय उपस्थित हों। किसी भी फाइल को अनावश्यक रूप से दबाकर रखना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने विभागीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपनी कार्यशैली में सुधार लाएं और किसी भी प्रकार की बिचौलिया संस्कृति को जड़ से खत्म करें। मंत्री ने साफ कहा कि यदि विभाग के भीतर से भी किसी अधिकारी की संलिप्तता माफियाओं के साथ पाई गई, तो उनके खिलाफ भी उतनी ही कड़ी कानूनी कार्यवाही होगी जितनी माफियाओं के खिलाफ।

अवैध खनन: बिहार के लिए एक पुरानी चुनौती

​बिहार के विभिन्न जिलों, विशेषकर दक्षिण बिहार के पहाड़ी इलाकों और गंगा व सोन नदी के क्षेत्रों में अवैध बालू और पत्थर खनन एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। डॉ. प्रमोद कुमार का ‘एक्शन मोड’ में आना इन क्षेत्रों के स्थानीय प्रशासन के लिए भी एक बड़ा संदेश है कि अब ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं है। अवैध खनन न केवल सरकार के खजाने को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि यह संगठित अपराध को भी जन्म देता है। बिहार में कई हिंसक घटनाओं के पीछे अवैध खनन का विवाद रहा है। मंत्री द्वारा माफियाओं पर नकेल कसने का सीधा असर राज्य की समग्र कानून-व्यवस्था पर भी पड़ेगा।

​यदि अवैध खनन बंद होता है और वैध पट्टों के जरिए काम बढ़ता है, तो इससे न केवल सरकार का राजस्व बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को सुरक्षित और नियमसंगत रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। डॉ. प्रमोद कुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन प्रभावशाली लोगों की पहचान करना होगी जो पर्दे के पीछे रहकर इन माफियाओं को संरक्षण देते हैं। सोमवार की यह प्रेस वार्ता बिहार की राजनीति और प्रशासन में एक हलचल पैदा कर चुकी है। आने वाले हफ्तों में होने वाली विभागीय बैठकें और उसके बाद शुरू होने वाला सघन चेकिंग अभियान ही यह तय करेगा कि बिहार की धरती को माफियाओं के चंगुल से कितनी जल्दी मुक्त कराया जा सकता है। फिलहाल, पटना के सचिवालय से लेकर जिलों की खदानों तक, मंत्री के इस सख्त निर्देश की गूँज सुनाई दे रही है।

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