
भागलपुर। अंग जनपद की जीवनरेखा कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु के एक स्लैब के क्षतिग्रस्त होकर नीचे गिर जाने से भागलपुर और नवगछिया के बीच उत्पन्न हुआ सड़क संपर्क संकट अब एक नए और संगठित समाधान की ओर बढ़ रहा है। पुल की मरम्मत में लगने वाले संभावित समय और आम जनता की रोजमर्रा की तकलीफों को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब गंगा की लहरों को ही मुख्य सड़क के विकल्प के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। सोमवार, 11 मई 2026 को जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में समीक्षा भवन में आयोजित जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में जलयान के माध्यम से ‘फेरी’ और ‘कार्गो’ सेवा को औपचारिक रूप से शुरू करने पर मुहर लगा दी गई है। यह पहल न केवल यात्रियों के सुगम आवागमन को सुनिश्चित करेगी, बल्कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला को भी टूटने से बचाएगी।
सेतु संकट और जलमार्ग की अनिवार्यता
विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद से ही भागलपुर का उत्तर बिहार और सीमांचल से सीधा संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वर्तमान में लोग छोटी नावों और सीमित क्रूज सेवाओं के माध्यम से गंगा पार कर रहे हैं, लेकिन यह व्यवस्था न तो पर्याप्त है और न ही पूरी तरह से संगठित। इसी अव्यवस्था को दूर करने के लिए नवल किशोर चौधरी ने आपदा प्रबंधन टीम के साथ गहन समीक्षा की। बैठक का मूल एजेंडा यह था कि कैसे जलमार्ग को एक व्यावसायिक और सुरक्षित परिवहन प्रणाली के रूप में तब्दील किया जाए।
फेरी सेवा के माध्यम से यात्रियों के आवागमन और कार्गो सेवा के जरिए भारी सामान, खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं के परिवहन को सुव्यवस्थित करने की योजना बनाई गई है। सेतु के बाधित होने से सबसे अधिक प्रभाव मालवाहक ट्रकों और व्यावसायिक वाहनों पर पड़ा है, जिसकी वजह से बाजार में महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। कार्गो सेवा शुरू होने से बड़े पैमाने पर माल की ढुलाई जलमार्ग से संभव हो सकेगी, जिससे भागलपुर के व्यापारियों और किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
मनमानी पर लगाम: दर निर्धारण का ऐतिहासिक निर्णय
इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण और जनहितैषी निर्णय ‘दर निर्धारण’ (Rate Fixing) को लेकर रहा। अक्सर आपदा या संकट के समय निजी नाव संचालकों द्वारा यात्रियों से मनमाना किराया वसूलने की शिकायतें आती रही हैं। नवल किशोर चौधरी ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि फेरी और कार्गो सेवा के लिए एक पारदर्शी और किफायती किराया सूची तैयार की जाए।
दर निर्धारण के संभावित लाभ:
- पारदर्शिता: यात्रियों को पता होगा कि उन्हें कितनी दूरी के लिए कितना भुगतान करना है, जिससे विवाद की स्थिति खत्म होगी।
- शोषण से मुक्ति: गरीब तबके के लोग और छोटे व्यापारी नाविकों की मनमानी का शिकार नहीं होंगे।
- आधिकारिक नियंत्रण: दरें निर्धारित होने से यह सेवा एक सरकारी ढांचे के भीतर संचालित होगी, जिससे सुरक्षा मानकों का पालन करना भी अनिवार्य होगा।
कार्गो सेवा: अर्थव्यवस्था को संजीवनी देने का प्रयास
भागलपुर और नवगछिया के बीच का व्यापारिक रिश्ता पूरी तरह से विक्रमशिला सेतु पर टिका है। सेतु टूटने के बाद से फल, सब्जी, अनाज और दूध की आपूर्ति में भारी गिरावट आई है। कार्गो सेवा (Cargo Service) की शुरुआत इस संकट का सबसे सटीक समाधान मानी जा रही है। इसके तहत बड़े जलयानों का उपयोग किया जाएगा जो एक बार में कई टन माल ढोने की क्षमता रखते हैं।
इस व्यवस्था से नवगछिया के मक्का और केला उत्पादक किसानों को अपनी फसल भागलपुर की मंडियों तक पहुँचाने में आसानी होगी। साथ ही, निर्माण सामग्री और औद्योगिक माल की ढुलाई भी बाधित नहीं होगी। अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण आंचल को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि जिन स्थानों पर जलयान रुकेंगे, वहां का ‘बर्थिंग पॉइंट’ (घाट) मजबूत और सुरक्षित हो ताकि भारी माल को उतारने और चढ़ाने में कोई तकनीकी समस्या न आए।
सुरक्षा और विधि-व्यवस्था पर भी हुई चर्चा
जलमार्ग से बड़े पैमाने पर आवागमन शुरू करने से पहले सुरक्षा सर्वोपरि है। बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव ने विधि-व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि घाटों पर पुलिस बल की तैनाती और जल क्षेत्र में गश्त बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना या अप्रिय घटना को रोका जा सके। आपदा प्रबंधन विभाग के अपर समाहर्ता कुंदन कुमार को निर्देश दिया गया है कि वे सभी जलयानों में लाइफ जैकेट, अग्निशमन यंत्र और आपातकालीन संचार उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह और जिला परिषद अध्यक्ष विपिन कुमार मंडल ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए स्थानीय समुदायों के सहयोग की बात कही। जनप्रतिनिधियों का मानना है कि सेतु की मरम्मत में समय लग सकता है, ऐसे में जलयान सेवा को दीर्घकालिक विकल्प के रूप में देखना चाहिए।
बैठक में उपस्थित प्रशासनिक और राजनीतिक दिग्गज
समीक्षा भवन में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में जिला प्रशासन के लगभग सभी प्रमुख विभागों के मुखिया मौजूद रहे। उपस्थित पदाधिकारियों की सूची इस प्रकार है:
- नवल किशोर चौधरी: जिलाधिकारी, भागलपुर
- प्रमोद कुमार यादव: वरीय पुलिस अधीक्षक, भागलपुर
- विपिन कुमार मंडल: अध्यक्ष, जिला परिषद
- प्रदीप कुमार सिंह: उप विकास आयुक्त
- कुंदन कुमार: अपर समाहर्ता, आपदा प्रबंधन
- अधीक्षण अभियंता: बाढ़ नियंत्रण आंचल, भागलपुर
इन अधिकारियों के अलावा परिवहन विभाग और राजस्व विभाग के कर्मी भी उपस्थित थे, जिन्हें दर निर्धारण और तकनीकी व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने का कार्य सौंपा गया है।
अंग प्रदेश की परिवहन क्रांति का नया अध्याय
11 मई 2026 की यह बैठक भागलपुर के परिवहन इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। सदियों से गंगा के किनारे बसे इस शहर ने कभी जलमार्ग के माध्यम से ही अपनी पहचान बनाई थी, और आज एक बार फिर आधुनिक तकनीकों के साथ उसी मार्ग को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जा रही है। नवल किशोर चौधरी ने भरोसा दिलाया है कि यह सेवा केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे अगले कुछ ही दिनों में धरातल पर उतार दिया जाएगा।
नाव और क्रूज का वर्तमान परिचालन अब एक व्यवस्थित तंत्र का हिस्सा बनेगा। जैसे ही आधिकारिक दरें और रूट चार्ट जारी होंगे, भागलपुर और नवगछिया के बीच की यह ‘जल-कड़ी’ लोगों के लिए एक विश्वसनीय और किफायती रास्ता बन जाएगी। फिलहाल, आपदा प्रबंधन की टीम घाटों के सर्वे और जलयानों की क्षमता की जांच में युद्ध स्तर पर जुटी हुई है।


