“क्यों छोड़ी नीतीश कुमार ने कुर्सी? ‘सब पहले से तय था – विजय चौधरी ने खोले अंदरूनी राज”

बिहार की राजनीति में हुए बड़े सत्ता परिवर्तन को लेकर अब नए खुलासे सामने आ रहे हैं। करीब दो दशकों तक मुख्यमंत्री पद संभालने वाले नीतीश कुमार के इस्तीफे और Samrat Choudhary को मुख्यमंत्री बनाए जाने के फैसले पर जेडीयू के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने बड़ा बयान दिया है।

मुंबई स्थित Sai Baba Temple में पूजा-अर्चना के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए विजय चौधरी ने कहा कि बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनाने को लेकर लंबे समय से अंदरखाने चर्चा चल रही थी और यह फैसला अचानक नहीं लिया गया।


“छह महीने चली अंदरूनी रणनीति”

विजय कुमार चौधरी ने बताया कि पूरे सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में करीब छह महीने का समय लगा।

उन्होंने कहा,
“बीजेपी हमेशा नीतीश कुमार के नेतृत्व के साथ खड़ी रही। ऐसे में नीतीश जी ने महसूस किया कि अब नई पीढ़ी को नेतृत्व का मौका दिया जाना चाहिए।”

उन्होंने बताया कि नीतीश कुमार चाहते थे कि मुख्यमंत्री पद उसी सहयोगी दल को मिले, जो वर्षों से उनके साथ रहा है। इसी सोच के तहत उन्होंने बीजेपी नेता सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाए जाने का समर्थन किया।


“सम्राट चौधरी का नाम खुद तय किया”

विजय चौधरी ने दावा किया कि सम्राट चौधरी का नाम भी खुद नीतीश कुमार ने ही आगे बढ़ाया था।

उन्होंने कहा,
“बीजेपी के ऐसे युवा नेता को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए जो पिछले 20 वर्षों से उनके साथ काम कर रहा हो। इसी सोच के साथ सम्राट चौधरी को जिम्मेदारी सौंपी गई।”


नई पीढ़ी को नेतृत्व देने की तैयारी

जेडीयू नेता ने कहा कि नीतीश कुमार ने अपने लंबे कार्यकाल में बिहार में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था के क्षेत्र में बड़े बदलाव किए।

लेकिन अब उनका मानना था कि राज्य की राजनीति में नई ऊर्जा लाने के लिए नई पीढ़ी को आगे बढ़ाना जरूरी है।


Nishant Kumar की राजनीति में एंट्री पर बड़ा खुलासा

विजय कुमार चौधरी ने पहली बार खुलकर बताया कि नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार को राजनीति में लाने के पक्ष में नहीं थे।

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार हमेशा परिवारवाद की राजनीति के खिलाफ रहे हैं और इसी वजह से वह लगातार इसका विरोध करते रहे।


“कार्यकर्ताओं के दबाव में बदला फैसला”

विजय चौधरी के मुताबिक, पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लगातार नीतीश कुमार को समझाया कि यदि किसी को जनता और कार्यकर्ताओं की मांग पर राजनीति में लाया जाए तो उसे परिवारवाद नहीं कहा जा सकता।

करीब छह महीने तक चली बातचीत के बाद आखिरकार नीतीश कुमार इसके लिए तैयार हुए।


निशांत को मनाने में भी लगी मेहनत

उन्होंने यह भी बताया कि सिर्फ नीतीश कुमार ही नहीं, बल्कि निशांत कुमार को भी राजनीति में आने के लिए मनाना पड़ा।

जेडीयू के अधिकांश नेता चाहते थे कि निशांत पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाएं। कार्यकर्ताओं के दबाव और समर्थन के बाद ही उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और मंत्री बने।


Tejashwi Yadav ने बोला हमला

इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार में परिवारवाद बनाम कार्यकर्ता राजनीति की बहस तेज हो गई है।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बीजेपी और जेडीयू दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो दल वर्षों तक परिवारवाद का विरोध करते रहे, वही अब अपने परिवार को राजनीति में आगे बढ़ा रहे हैं।


विजय चौधरी का पलटवार

तेजस्वी यादव के आरोपों पर जवाब देते हुए विजय कुमार चौधरी ने कहा कि Lalu Prasad Yadav खुद अपने बेटे और बेटियों को राजनीति में लेकर आए।

उन्होंने कहा कि जेडीयू पर परिवारवाद का आरोप लगाना उचित नहीं है क्योंकि निशांत कुमार किसी पारिवारिक दबाव से नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की मांग पर राजनीति में आए हैं।


बिहार की राजनीति में नए अध्याय की चर्चा

अब बिहार की राजनीति में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना और निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री राज्य में नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत है।

विजय कुमार चौधरी के इस खुलासे ने सत्ता परिवर्तन के पीछे चली लंबी रणनीति को सार्वजनिक कर दिया है और आने वाले दिनों में इसका असर बिहार की राजनीति पर साफ दिखाई दे सकता है।

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