
भागलपुर: विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने का असर अब धीरे-धीरे पूरे भागलपुर और आसपास के इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है। गंगा नदी पर बना यह महत्वपूर्ण पुल वर्षों से भागलपुर को कोसी-सीमांचल और उत्तर बिहार के कई जिलों से जोड़ने का मुख्य मार्ग रहा है। लेकिन पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। इसका सबसे बड़ा असर भागलपुर के सरकारी बस स्टैंड पर देखने को मिल रहा है, जहां इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है।
जो बस स्टैंड कभी यात्रियों की भीड़, बसों की आवाजाही और दुकानदारों की चहल-पहल से गुलजार रहता था, वहां अब वीरानी का माहौल दिखाई दे रहा है। बसों के परिचालन पर असर पड़ने से न केवल यात्रियों को परेशानी हो रही है, बल्कि छोटे दुकानदारों और दैनिक कमाई पर निर्भर लोगों की आजीविका भी संकट में पड़ गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, भागलपुर सरकारी बस स्टैंड से हर दिन बड़ी संख्या में बसें पूर्णिया, कटिहार, बेगूसराय, सहरसा, मधेपुरा, अररिया और सिलीगुड़ी जैसे शहरों के लिए चलती थीं। इन बसों का मुख्य मार्ग विक्रमशिला सेतु ही था। पुल के जरिए हजारों लोग रोज अपने गंतव्य तक पहुंचते थे। लेकिन पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद कई रूटों पर बस सेवा बंद हो गई है, जबकि कुछ बसों का परिचालन वैकल्पिक और लंबी दूरी वाले मार्गों से हो रहा है।
इस स्थिति ने पूरे परिवहन तंत्र को प्रभावित कर दिया है। यात्रियों को अब अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए कई बार साधन बदलने पड़ रहे हैं। कई लोगों को पहले नाव से गंगा पार करनी पड़ रही है, फिर दूसरी ओर से बस पकड़नी पड़ रही है। इससे यात्रा खर्च और समय दोनों बढ़ गए हैं।
सरकारी बस स्टैंड के आसपास दुकान चलाने वाले लोगों की परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ गई है। चाय, नाश्ता, पानी, टिकट, होटल और छोटी-मोटी जरूरतों की दुकानें चलाने वाले लोग अब ग्राहकों के इंतजार में बैठे रहते हैं। दुकानदारों का कहना है कि पहले सुबह से रात तक यात्रियों की भीड़ लगी रहती थी, लेकिन अब पूरा दिन गुजर जाता है और दुकान पर गिने-चुने लोग ही पहुंचते हैं।
दुकानदार पंकज चौधरी ने बताया कि विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद उनकी आमदनी लगभग खत्म हो गई है। उन्होंने कहा कि पहले दिनभर में हजारों यात्री बस स्टैंड आते-जाते थे, जिससे कारोबार चलता था। लेकिन अब हालत यह है कि दुकान खोलने के बाद भी ग्राहक नहीं आते।
उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात कोरोना काल से भी ज्यादा खराब हो चुके हैं। कोरोना महामारी के दौरान भी कुछ समय बाद स्थिति सामान्य होने लगी थी, लेकिन अब भविष्य को लेकर कोई स्पष्टता नहीं दिख रही है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो छोटे दुकानदारों के सामने परिवार चलाना मुश्किल हो जाएगा।
बस संचालकों का भी कहना है कि पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण परिवहन व्यवस्था पर भारी असर पड़ा है। कई बसें बंद करनी पड़ी हैं क्योंकि वैकल्पिक रास्तों से संचालन करने पर डीजल खर्च और समय दोनों बढ़ जाते हैं। कुछ मार्ग इतने लंबे हो गए हैं कि यात्रियों की संख्या भी कम हो गई है। इससे बस मालिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
यात्रियों का कहना है कि पहले भागलपुर से पूर्णिया या कोसी क्षेत्र तक पहुंचने में अपेक्षाकृत कम समय लगता था, लेकिन अब कई घंटों की अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ रही है। कई लोग निजी वाहनों या नावों के सहारे यात्रा करने को मजबूर हैं। इससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है।
सरकारी बस स्टैंड पर पहले जहां लगातार बसों की आवाजाही होती रहती थी, वहीं अब अधिकतर प्लेटफॉर्म खाली दिखाई दे रहे हैं। बसों के हॉर्न और यात्रियों की आवाजों से गूंजने वाला परिसर अब शांत नजर आता है। कई बस कर्मचारी भी बेरोजगारी जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि विक्रमशिला सेतु केवल एक पुल नहीं, बल्कि भागलपुर और उत्तर बिहार की आर्थिक जीवनरेखा था। इसके प्रभावित होने से व्यापार, परिवहन और आम लोगों की जिंदगी पर व्यापक असर पड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी बड़े पुल के क्षतिग्रस्त होने का प्रभाव केवल यातायात तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। भागलपुर का सरकारी बस स्टैंड इसका ताजा उदाहरण बन गया है।
लोगों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि विक्रमशिला सेतु की मरम्मत और यातायात बहाली के लिए जल्द ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था को भी मजबूत किया जाए ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
कई यात्रियों ने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो व्यापार और रोजगार पर इसका असर और गहरा होगा। बस स्टैंड से जुड़े हजारों लोगों की रोजी-रोटी इस संकट से प्रभावित हो रही है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि भागलपुर जैसे बड़े शहर की आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक इस पुल पर निर्भर हैं। रोजाना बड़ी संख्या में छात्र, नौकरीपेशा लोग, व्यापारी और मरीज इसी मार्ग से सफर करते थे। अब सभी को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
फिलहाल बस स्टैंड पर पसरा सन्नाटा और खाली पड़ी दुकानें इस संकट की गंभीरता को साफ बयां कर रही हैं। दुकानदारों की निगाहें अब सरकार और प्रशासन की ओर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि जल्द कोई स्थायी समाधान निकलेगा और एक बार फिर भागलपुर सरकारी बस स्टैंड यात्रियों की आवाजाही से गुलजार होगा।


