ईडी के शिकंजे में पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा: धनशोधन मामले में चंडीगढ़ से हुई गिरफ्तारी; दिल्ली-गुरुग्राम समेत 5 ठिकानों पर छापेमारी से मचा हड़कंप

चंडीगढ़/लुधियाना। पंजाब की राजनीति में शनिवार को उस समय एक बड़ा भूचाल आ गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भ्रष्टाचार और धनशोधन के गंभीर आरोपों के बीच आम आदमी पार्टी (आप) के एक और कद्दावर नेता पर कड़ा शिकंजा कसा। केंद्रीय जांच एजेंसी ने शनिवार, 09 मई 2026 को लंबी पूछताछ और गहन छापेमारी के बाद पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा को उनके चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास से गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज एक नए मामले के सिलसिले में की गई है। गिरफ्तारी से ठीक पहले ईडी की टीमों ने उत्तर भारत के पांच अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ दबिश दी थी, जिसमें संजीव अरोड़ा के करीबियों और उनसे जुड़ी व्यावसायिक इकाइयों के परिसर शामिल थे। इस गिरफ्तारी ने पंजाब की भगवंत मान सरकार के लिए एक नई प्रशासनिक और राजनैतिक चुनौती खड़ी कर दी है। 62 वर्षीय संजीव अरोड़ा, जो लुधियाना पश्चिम विधानसभा सीट से विधायक हैं, अब केंद्रीय एजेंसी की हिरासत में हैं और उन पर जांच में सहयोग न करने के साथ-साथ वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं।

तड़के शुरू हुई छापेमारी और नाटकीय गिरफ्तारी

​शनिवार की सुबह जब चंडीगढ़ की सड़कों पर चहल-पहल शुरू ही हुई थी, तभी ईडी के अधिकारियों की एक बड़ी टीम सुरक्षा बलों के साथ उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा के सरकारी आवास पर पहुँची। सूत्रों के अनुसार, यह छापेमारी इतनी अचानक और सुनियोजित थी कि मंत्री के सुरक्षाकर्मियों को भी संभलने का मौका नहीं मिला। घर के भीतर मौजूद सभी डिजिटल उपकरणों, मोबाइल फोन और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को एजेंसी ने तुरंत अपने कब्जे में ले लिया। घंटों चली तलाशी और पूछताछ के बाद ईडी के अधिकारियों ने यह निष्कर्ष निकाला कि संजीव अरोड़ा जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे हैं और कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देने से बच रहे हैं।

​ईडी ने दावा किया कि पूछताछ के दौरान अरोड़ा ने कई वित्तीय लेन-देन के स्रोतों के बारे में अस्पष्ट जानकारियां दीं। इसी आधार पर एजेंसी ने उन्हें धनशोधन के एक नए मामले में औपचारिक रूप से गिरफ्तार करने का फैसला लिया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच स्वास्थ्य परीक्षण के लिए ले जाया गया। एजेंसी के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा, जहाँ उनकी विस्तृत रिमांड मांगी जाएगी ताकि इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुँचा जा सके।

चंडीगढ़ से गुरुग्राम तक ‘ऑपरेशन ईडी’: पांच ठिकानों पर दबिश

​संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी केवल एक अकेले व्यक्ति की कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह एक व्यापक ‘ऑपरेशन’ का हिस्सा थी। ईडी ने शनिवार को उत्तरी भारत के कुल पांच स्थानों पर सघन छापेमारी की।

  1. चंडीगढ़: मंत्री का सरकारी आवास, जहाँ से उनकी गिरफ्तारी हुई।
  2. दिल्ली: दो प्रमुख व्यावसायिक परिसर, जिनका संबंध संजीव अरोड़ा के पुराने निवेशों और व्यापारिक सहयोगियों से बताया जा रहा है।
  3. गुरुग्राम: उद्योग विहार स्थित हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड नामक कंपनी का मुख्यालय।

​विशेष रूप से गुरुग्राम में हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड के दफ्तर में की गई छापेमारी को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच एजेंसी को संदेह है कि इस कंपनी के माध्यम से बड़े पैमाने पर धन का अवैध हस्तांतरण किया गया है और इसमें उद्योग मंत्री की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संलिप्तता रही है। ईडी की टीमें इन परिसरों से बड़ी संख्या में डिजिटल साक्ष्य और बैंक खातों की विवरणी ले गई हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है।

विदेशी मुद्रा उल्लंघन से धनशोधन तक की कहानी

​संजीव अरोड़ा के खिलाफ जांच की आंच पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ रही थी। इसकी शुरुआत 17 अप्रैल 2026 को हुई थी, जब ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के दीवानी प्रावधानों के तहत उनके और उनसे जुड़ी इकाइयों पर छापे मारे थे। उस समय मामला मुख्य रूप से विदेशों में निवेश और अघोषित विदेशी संपत्ति से जुड़ा हुआ था। हालांकि, अप्रैल की छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों ने जांच की दिशा बदल दी।

​एजेंसी को ऐसे प्रमाण मिले जो दीवानी उल्लंघन (FEMA) से कहीं अधिक गंभीर यानी आपराधिक धनशोधन (PMLA) की ओर इशारा कर रहे थे। इसके बाद ईडी ने पीएमएलए की विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत एक नया मामला दर्ज किया। इसी नए मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए शनिवार की छापेमारी की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि नए मामले में कुछ ऐसी बेनामी संपत्तियों और संदिग्ध कंपनियों का पता चला है, जिनके जरिए करोड़ों रुपये के काले धन को सफेद करने का प्रयास किया गया।

लुधियाना का व्यापारिक रसूख और राजनैतिक करियर

​संजीव अरोड़ा पंजाब के उन नेताओं में शुमार हैं जो राजनीति में आने से पहले एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुके थे। लुधियाना पश्चिम सीट से विधायक के रूप में जीत दर्ज करने के बाद उन्हें उद्योग मंत्रालय जैसी अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लुधियाना, जो पंजाब की औद्योगिक राजधानी है, वहां अरोड़ा का काफी गहरा व्यापारिक रसूख रहा है। हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में उनकी भूमिका अक्सर चर्चा का विषय रही है।

​उनके विरोधियों का आरोप है कि मंत्री पद पर रहते हुए उन्होंने अपने व्यापारिक हितों को लाभ पहुँचाने के लिए सरकारी नीतियों और संसाधनों का दुरुपयोग किया। हालांकि, उनके समर्थकों और पार्टी का कहना है कि वे एक प्रतिष्ठित कारोबारी हैं और उन्हें राजनैतिक प्रतिशोध के तहत निशाना बनाया जा रहा है। 62 वर्ष की आयु में इस तरह की कानूनी मुश्किल उनके लंबे सार्वजनिक और व्यापारिक जीवन के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है।

अदालती कार्यवाही और एजेंसी की रणनीति

​संजीव अरोड़ा को स्थानीय अदालत में पेश करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। ईडी के वकीलों का तर्क है कि मंत्री के पास कई ऐसे राज हैं जो केवल हिरासत में लेकर की गई कड़ी पूछताछ से ही बाहर आ सकते हैं। एजेंसी उन कड़ियों को जोड़ना चाहती है जिनके जरिए सरकारी धन या अनुचित तरीके से कमाए गए धन को रियल्टी सेक्टर में खपाया गया।

​विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। ईडी ने पहले ही संकेत दिया है कि दिल्ली और गुरुग्राम की छापेमारी में कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं जो राज्य के अन्य विभागों के कामकाज और उनमें हुए वित्तीय लेन-देन पर भी सवाल खड़े करते हैं। संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके मंत्रालय का कार्यभार किसे सौंपा जाता है और पंजाब सरकार इस कानूनी लड़ाई का मुकाबला किस तरह करती है।

आम आदमी पार्टी के लिए बढ़ता संकट

​सत्येंद्र जैन, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और अरविंद केजरीवाल के बाद अब पंजाब के संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी ने आम आदमी पार्टी (आप) के ‘ईमानदारी’ के दावों पर विपक्ष को हमला करने का एक और मौका दे दिया है। विपक्षी दलों का कहना है कि एक के बाद एक मंत्रियों की गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। वहीं, ‘आप’ का रुख हमेशा की तरह हमलावर है और वह इसे केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग बता रही है।

​पंजाब की सियासत में संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे उद्योग मंत्री के रूप में राज्य में निवेश लाने और औद्योगिक विकास की योजनाओं पर काम कर रहे थे। उनकी अनुपस्थिति में इन प्रोजेक्ट्स की गति धीमी पड़ सकती है। साथ ही, लुधियाना के औद्योगिक घरानों के बीच भी इस गिरफ्तारी से एक असुरक्षा का भाव पैदा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय की यह कार्रवाई आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति की दिशा तय करेगी, जहाँ भ्रष्टाचार और सुशासन के बीच की जंग अब अदालत के कमरों में लड़ी जाएगी।

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