​राजगीर की धरती पर ज्ञान के वैश्विक केंद्र का अवलोकन: मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने नालंदा विश्वविद्यालय के ‘नेट जीरो’ मॉडल को बताया भविष्य की नजीर

राजगीर/नालंदा। बिहार की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक ऊर्जा की केंद्रस्थली राजगीर में ज्ञान की प्राचीन परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ जीवंत होते देखना एक गौरवशाली अनुभूति है। शनिवार, 09 मई 2026 को बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय के नवनिर्मित भव्य परिसर का विस्तृत भ्रमण किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य न केवल विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति का जायजा लेना था, बल्कि इसके उस अद्वितीय ‘नेट जीरो’ (Net Zero) मॉडल को समझना भी था, जो आज पूरी दुनिया के लिए पर्यावरण संरक्षण की एक नई परिभाषा गढ़ रहा है। भ्रमण के दौरान मुख्य सचिव ने परिसर की चकाचौंध के पीछे छिपे उन गहरे वैज्ञानिक और वास्तुशिल्पीय रहस्यों को करीब से देखा, जो प्राचीन नालंदा की भव्यता और भविष्य की तकनीक के बीच एक पुल का काम कर रहे हैं। इस अवसर पर नालंदा के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने परिसर के आसपास के विकास कार्यों की रूपरेखा साझा की।

प्राचीन विरासत और आधुनिक नवाचार का संगम

​विश्वविद्यालय परिसर में कदम रखते ही मुख्य सचिव का स्वागत विश्वविद्यालय के वरिष्ठ संकायों और अधिकारियों ने किया। भ्रमण की शुरुआत एक विस्तृत प्रेजेंटेशन के साथ हुई, जिसमें विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों ने संस्थान के ऐतिहासिक गौरव और वर्तमान शैक्षणिक ढांचे की एक मुकम्मल तस्वीर पेश की। प्रत्यय अमृत को बताया गया कि यह विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं है, बल्कि यह दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत के बीच सांस्कृतिक और बौद्धिक संबंधों को फिर से परिभाषित करने का एक अंतरराष्ट्रीय मंच है। वर्तमान में यहाँ ऐतिहासिक अध्ययन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण अध्ययन, और बौद्ध अध्ययन जैसे वैश्विक स्तर के स्कूलों का संचालन हो रहा है, जहाँ दुनिया के विभिन्न देशों के छात्र ज्ञान की खोज में जुटे हैं।

​मुख्य सचिव ने परिसर के भीतर बने सुषमा स्वराज ऑडिटोरियम का निरीक्षण किया, जो अपनी अत्याधुनिक ध्वनि व्यवस्था और भव्यता के लिए विख्यात है। इसके अलावा उन्होंने विश्वविद्यालय के समृद्ध पुस्तकालय, योग परिसर और विभिन्न शैक्षणिक ब्लॉकों का भ्रमण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि यहाँ की वास्तुकला में प्राचीन नालंदा के ईंटों वाले स्वरूप को बरकरार रखा गया है, लेकिन इसके भीतर की तकनीक पूरी तरह से 21वीं सदी की है। प्राचीन काल में जिस तरह नालंदा विश्व का मार्गदर्शक था, यह नया परिसर भी उसी दिशा में कदम बढ़ाता नजर आ रहा है।

‘नेट जीरो’ मॉडल: पर्यावरण सुरक्षा की वैश्विक मिसाल

​भ्रमण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा विश्वविद्यालय के ‘नेट जीरो’ कार्बन फुटप्रिंट मॉडल का निरीक्षण था। प्रत्यय अमृत ने विश्वविद्यालय के 6.5 मेगावाट के विशाल सौर फार्म, बायोगैस संयंत्र और अत्याधुनिक जल संचयन प्रणालियों को देखा। यह परिसर अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर नहीं है, बल्कि यहाँ सौर ऊर्जा और बायोगैस के माध्यम से बिजली का उत्पादन होता है। 455 एकड़ में फैले इस परिसर में पानी की एक-एक बूंद को सहेजने के लिए प्राचीन जल प्रबंधन प्रणालियों का आधुनिक संस्करण लागू किया गया है।

​मुख्य सचिव ने इन सुविधाओं में विशेष रुचि दिखाई और कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय का यह मॉडल बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर के अन्य सरकारी और निजी संस्थानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनना चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि जलवायु परिवर्तन के दौर में जब पूरी दुनिया कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए संघर्ष कर रही है, तब राजगीर की पहाड़ियों के बीच स्थित यह संस्थान यह दिखा रहा है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कैसे बनाया जा सकता है। उन्होंने बायोगैस संयंत्र की कार्यप्रणाली को समझा और इसे कचरा प्रबंधन का एक बेहतरीन उदाहरण बताया।

अंतरराष्ट्रीय ज्ञान केंद्र के रूप में पुनर्स्थापना का संकल्प

​परिसर के निरीक्षण के बाद प्रत्यय अमृत ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों और संकाय सदस्यों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि नालंदा का नाम दुनिया भर में ज्ञान और प्रज्ञा का पर्याय रहा है। इस नव-निर्मित परिसर को देखना उनके लिए एक सुखद अनुभव है क्योंकि यह अपनी प्राचीन विरासत को खोए बिना आधुनिक नवाचारों को आत्मसात किए हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार सरकार इस विश्वविद्यालय के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार चाहती है कि नालंदा फिर से अंतरराष्ट्रीय ज्ञान के केंद्र के रूप में अपनी खोई हुई पहचान वापस पाए और इसके लिए जो भी संभव सहयोग होगा, वह प्रदान किया जाएगा।

​भ्रमण के दौरान नालंदा के जिलाधिकारी ने मुख्य सचिव को विश्वविद्यालय परिसर के आसपास चल रहे सड़क निर्माण, सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचागत विकास की जानकारी दी। राजगीर को एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और शिक्षा हब बनाने की जो योजना राज्य सरकार की है, उसमें नालंदा विश्वविद्यालय एक मुख्य स्तंभ की तरह है। पुलिस अधीक्षक ने सुरक्षा प्रोटोकॉल और विदेशी छात्रों की सुरक्षा को लेकर किए गए इंतजामों के बारे में जानकारी साझा की।

भविष्य की संभावनाएं और वैश्विक जुड़ाव

​मुख्य सचिव की इस यात्रा को कूटनीतिक और शैक्षणिक दोनों दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में यह संस्थान दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों जैसे वियतनाम, कंबोडिया, म्यांमार, थाईलैंड और विश्व के अन्य देशों के साथ भारत के शैक्षणिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। राजगीर की यह धरती बुद्ध और महावीर की स्मृति से जुड़ी है, और नालंदा विश्वविद्यालय उसी दार्शनिक विरासत को आगे बढ़ा रहा है।

​प्रत्यय अमृत ने अंत में विश्वविद्यालय के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए संकाय सदस्यों को प्रोत्साहित किया कि वे गुणवत्तापूर्ण शोध और अध्ययन पर ध्यान केंद्रित करें ताकि दुनिया भर से प्रतिभाएं यहाँ खिंची चली आएं। उन्होंने यह भी कहा कि इस परिसर की डिजाइन और इसका पर्यावरण अनुकूल होना इसे छात्रों के लिए एक आदर्श स्थान बनाता है। परिसर के भीतर हरियाली और शांति का जो माहौल है, वह गहन अध्ययन के लिए नितांत आवश्यक है। मुख्य सचिव के इस दौरे से यह साफ हो गया है कि प्रशासन नालंदा विश्वविद्यालय को बिहार के विकास की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रहा है और इसे विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाएंगे।

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