“दिलीप जायसवाल बोलेगा तो कहर ढहेगा”: राजस्व मंत्री की विभागीय अधिकारियों को दो-टूक चेतावनी; भ्रष्टाचार और भू-माफियाओं के खिलाफ आर-पार की जंग

पटना। बिहार की राजनीति में अपनी बेबाकी और कड़े फैसलों के लिए पहचाने जाने वाले राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार किया है। शनिवार, 09 मई 2026 को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मंत्री ने विभाग के भीतर जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार और सुस्ती पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी भरे लहजे में स्पष्ट कर दिया है कि जनता के प्रति ईमानदारी और जिम्मेदारी से काम करना उनकी पहली और आखिरी प्राथमिकता होनी चाहिए। मंत्री का यह तेवर उस वक्त सामने आया है जब बिहार में भूमि विवादों को सुलझाने के लिए सरकार तकनीक और पारदर्शिता का सहारा ले रही है। डॉ. दिलीप जायसवाल ने एक ऐसा जुमला उछाल दिया है जो अब पूरे प्रशासनिक गलियारे में चर्चा का विषय बन गया है—“दिलीप जायसवाल बोलेगा तो कहर ढहेगा।” इस चेतावनी का सीधा संकेत है कि अब विभाग में केवल कागजी घोड़े नहीं दौड़ेंगे, बल्कि धरातल पर काम करने वालों का सम्मान होगा और कोताही बरतने वालों पर गाज गिरना तय है।

अधिकारियों को अल्टीमेटम: “बोलना न पड़े, उससे पहले सुधर जाएं”

​राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री ने विभाग की समीक्षा बैठक के एक दिन बाद मीडिया से रूबरू होते हुए अपनी नाराजगी और भावी कार्ययोजना को साझा किया। उन्होंने बताया कि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ लंबी चर्चा हुई है और उन्हें काम करने का स्पष्ट विजन दे दिया गया है। मंत्री ने कहा कि उन्हें बार-बार निर्देश देने की आदत नहीं है। डॉ. दिलीप जायसवाल ने दो-टूक लहजे में कहा कि उन्होंने अपनी बैठक में स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें दोबारा बोलना न पड़े।

​उन्होंने चेतावनी दी कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और उन्हें फिर से हस्तक्षेप करना पड़ा, तो वह ‘कहर’ बनकर टूटेंगे। मंत्री का मानना है कि विभागीय पदाधिकारियों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे जनता की समस्याओं का समय पर समाधान करें। यदि कोई अधिकारी अपनी कुर्सी का उपयोग जनता को परेशान करने या भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए करेगा, तो उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि सारा सिस्टम ईमानदारी और जिम्मेदारी से काम करे, तभी बिहार के आम आदमी को जमीन के झंझटों से मुक्ति मिल पाएगी।

भू-माफियाओं पर ‘डिजिटल’ नकेल: अब रिकॉर्ड फाड़ना नामुमकिन

​बिहार में भूमि विवाद की जड़ में अक्सर भू-माफियाओं और भ्रष्ट कर्मचारियों का गठजोड़ रहा है। पूर्व में ऐसी कई घटनाएं सामने आई थीं जहाँ भू-माफिया विभागीय दस्तावेजों, विशेषकर रजिस्टर-2 के पन्ने तक फाड़ देते थे ताकि जमीन का असली मालिकाना हक छिपाया जा सके। मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने इस चुनौती को खत्म करने के लिए तकनीक का सहारा लिया है।

विभाग में हुए प्रमुख तकनीकी बदलाव:

  • दस्तावेजों की स्कैनिंग: विभाग ने अब करोड़ों महत्वपूर्ण दस्तावेजों की डिजिटल स्कैनिंग करा दी है। इससे मूल रिकॉर्ड के फटने या चोरी होने पर भी डेटा पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी रहेगा।
  • पूर्ण कंप्यूटरीकरण: राजस्व विभाग की पूरी व्यवस्था को आधुनिक और कंप्यूटरीकृत बनाया जा रहा है। अब कोई भी व्यक्ति अपनी जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को ऑनलाइन देख सकेगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी।
  • त्वरित समाधान: तकनीक के माध्यम से मामलों की ट्रैकिंग की जाएगी ताकि यह पता चल सके कि किस फाइल को किस अधिकारी ने कितने समय तक रोके रखा है।

​मंत्री ने कहा कि विभाग को पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था की ओर ले जाना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि लोगों को जमीन संबंधी मामलों में त्वरित और न्यायपूर्ण समाधान मिल सके।

भूमि सर्वेक्षण और अमला विस्तार: 100 साल का सूखा खत्म

​डॉ. दिलीप जायसवाल ने अपने पूर्व के कार्यकाल और वर्तमान उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि बिहार में जमीन संबंधी रिकॉर्ड को अपडेट करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि बिहार में करीब 100 वर्षों के बाद कैडस्ट्रल और रिविजनल सर्वे का कार्य शुरू कराया गया है। यह एक ऐसा कार्य है जिसे दशकों से राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण टाला जा रहा था।

सर्वेक्षण की उपलब्धियां एक नजर में:

विवरण

आंकड़े

सर्वेक्षण का दायरा

लगभग 1.5 करोड़ परिवार

अमीनों की बहाली

11,000

सर्वे का प्रकार

कैडस्ट्रल और रिविजनल

मुख्य उद्देश्य

मालिकाना हक की स्पष्टता और विवादों में कमी

मंत्री ने कहा कि जब यह सर्वे शुरू हुआ था, तब कई तरह की अफवाहें फैलाई गई थीं ताकि लोग भ्रमित हों, लेकिन सरकार ने बड़ी ही शांतिपूर्वक स्थिति को संभाला और काम को गति दी। 11 हजार अमीनों की बहाली ने न केवल सर्वे के काम को आसान बनाया है, बल्कि राज्य में युवाओं को रोजगार के बड़े अवसर भी प्रदान किए हैं।

जमीन विवाद: बिहार की सबसे बड़ी चुनौती और समाधान का रास्ता

​डॉ. दिलीप जायसवाल ने इस बात को स्वीकार किया कि जमीन विवाद बिहार की सबसे बड़ी सामाजिक और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं में से एक है। राज्य में होने वाले अधिकांश हिंसक अपराधों की जड़ में कहीं न कहीं भूमि विवाद ही होता है। हालांकि, उन्होंने एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखते हुए कहा कि केवल 15 से 16 प्रतिशत जमीनों में ही गंभीर विवाद की स्थिति है। शेष मामले छोटी-मोटी विसंगतियों या कागजी गड़बड़ियों के हैं जिन्हें प्रशासनिक स्तर पर सुलझाया जा सकता है।

​मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इन 15-16 प्रतिशत गंभीर विवादों को चिह्नित करें और उनका प्राथमिकता के आधार पर समाधान निकालें। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग की चुनौतियों को अवसर में बदलना सरकार की प्राथमिकता है। डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा कि वे चाहते हैं कि बिहार का हर नागरिक रात में चैन की नींद सो सके और उसे अपनी जमीन के छीने जाने का कोई डर न रहे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो अधिकारी जनता की समस्याओं को सुलझाने में ईमानदारी दिखाएंगे, उन्हें सरकार द्वारा सम्मानित भी किया जाएगा, लेकिन भ्रष्ट लोगों के लिए विभाग में कोई जगह नहीं होगी।

पारदर्शिता की नई कार्यसंस्कृति और भविष्य का विजन

​मंत्री के इस कड़े रुख के बाद राजस्व विभाग के भीतर हलचल तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि डॉ. दिलीप जायसवाल का यह ‘कहर’ वाला बयान प्रशासनिक आलस्य को दूर करने के लिए दिया गया एक मनोवैज्ञानिक प्रहार है। विभाग अब नियमित रूप से जिला स्तर पर कैंप लगाने की योजना बना रहा है ताकि पुराने लंबित मामलों को ऑन-द-स्पॉट सुलझाया जा सके। मंत्री ने साफ संकेत दिया है कि वे केवल फाइलें नहीं देखेंगे, बल्कि औचक निरीक्षण के जरिए फील्ड में हो रहे काम की हकीकत भी परखेंगे।

​डॉ. दिलीप जायसवाल ने यह भी रेखांकित किया कि आधुनिक बिहार के निर्माण के लिए सुदृढ़ राजस्व व्यवस्था अनिवार्य है। जब जमीन के रिकॉर्ड साफ होंगे, तो उद्योगों के लिए जमीन अधिग्रहण आसान होगा और विकास कार्यों में तेजी आएगी। उन्होंने अंत में विभागीय कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि व्यवस्था में लापरवाही अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। “दिलीप जायसवाल बोलेगा तो कहर ढहेगा” केवल एक नारा नहीं, बल्कि विभाग के भीतर जवाबदेही तय करने का एक सख्त संकल्प है, जिसके परिणाम आने वाले कुछ महीनों में धरातल पर दिखने शुरू हो जाएंगे।

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