​शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी का बड़ा वादा: टीआरई-4 की रिक्तियां जल्द, अब लाठी नहीं संवाद से सुलझेंगे मसले

पटना। बिहार की सत्ता में नए समीकरणों और चेहरों के साथ आई सरकार ने अब अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करनी शुरू कर दी हैं। शिक्षा विभाग, जो पिछले कई महीनों से आंदोलनों, लाठीचार्ज और कानूनी पेचीदगियों का केंद्र बना हुआ था, वहां से अब राहत भरी खबर सामने आ रही है। बिहार के नवनियुक्त शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शुक्रवार को स्पष्ट संकेत दिए कि शिक्षक अभ्यर्थियों की बेचैनी अब जल्द ही समाप्त होने वाली है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार अब चौथे चरण की शिक्षक बहाली यानी टीआरई-4 (TRE-4) के विज्ञापन को लेकर अंतिम दौर की तैयारियों में है। मंत्री ने साफ कहा कि शिक्षक भर्ती की रिक्तियां बहुत जल्द जारी की जाएंगी और इसकी विभागीय प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। यह बयान उस वक्त आया है जब शुक्रवार को ही पटना की सड़कों पर हजारों अभ्यर्थी अधिसूचना की मांग को लेकर पुलिस की लाठियों का सामना कर रहे थे। मंत्री के इस आश्वासन ने न केवल अभ्यर्थियों के घावों पर मरहम लगाने का काम किया है, बल्कि विभाग की कार्यशैली में बदलाव की आहट भी दी है।

बेचैनी के बीच उम्मीद की दस्तक: टीआरई-4 पर मंत्री का रुख

​पटना के गांधी मैदान और जेपी गोलंबर पर शुक्रवार को जो नजारा दिखा, वह किसी से छिपा नहीं है। टीआरई-4 के विज्ञापन में हो रही देरी से आक्रोशित छात्र जब सड़कों पर उतरे, तो प्रशासन ने उन्हें बल प्रयोग के जरिए रोकने की कोशिश की। इस घटना के कुछ ही घंटों बाद पत्रकारों से मुखातिब होते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि चौथे चरण की बहाली को लेकर विभाग पूरी तरह मुस्तैद है।

​मंत्री ने इस बात की पुष्टि की कि रिक्तियों का आकलन लगभग पूरा हो चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि बिना किसी त्रुटि के एक ऐसा पारदर्शी विज्ञापन जारी किया जाए, जिसे बाद में किसी कानूनी बाधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने दोहराया कि रिक्तियों की घोषणा में अब और अधिक देरी नहीं की जाएगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे फाइलों के अंतिम निष्पादन में तेजी लाएं। अभ्यर्थियों के बीच यह संशय बना हुआ था कि क्या नई सरकार बहाली की पुरानी रफ्तार बरकरार रखेगी, जिस पर मंत्री ने विराम लगा दिया है।

“मैं खुद शिक्षक रहा हूँ, उनकी पीड़ा मेरी अपनी है”

​मिथिलेश तिवारी के बयान में जो सबसे बड़ी बात निकलकर सामने आई, वह थी उनकी संवेदनशीलता। उन्होंने कहा कि वे स्वयं एक शिक्षक की पृष्ठभूमि से आते हैं, लिहाजा वे भली-भांति समझते हैं कि एक डिग्रीधारी बेरोजगार युवा के लिए विज्ञापन और नौकरी की अहमियत क्या होती है। मंत्री ने कहा कि वे शिक्षकों की समस्याओं को न केवल दस्तावेजों के आधार पर जानते हैं, बल्कि उन्होंने उन चुनौतियों को महसूस किया है।

​जब पत्रकारों ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और उनकी नाराजगी पर सवाल पूछा, तो मंत्री ने बड़े ही सधे हुए अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान सड़कों पर संघर्ष से अधिक टेबल पर संवाद से निकलता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अभ्यर्थियों की हर बात सुनी जाएगी और उनकी समस्याओं का तार्किक समाधान निकाला जाएगा। मंत्री ने छात्रों से अपील की कि वे धैर्य बनाए रखें, क्योंकि सरकार उनके भविष्य को लेकर उतनी ही चिंतित है जितनी कि वे स्वयं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे किसी भी सूरत में नहीं चाहते कि बिहार के मेधावी युवाओं को अपनी मांग के लिए सड़कों पर लहूलुहान होना पड़े।

बहाली की राह में नहीं आएगी कोई कानूनी बाधा

​अक्सर यह देखा गया है कि बिहार में शिक्षक बहाली की प्रक्रियाएं अदालती मुकदमों में फंसकर सालों तक लटकी रहती हैं। मिथिलेश तिवारी ने इस मुद्दे पर सरकार की मंशा साफ कर दी है। उन्होंने कहा कि टीआरई-4 की बहाली किसी भी सूरत में नहीं फंसेगी। विभाग इस बार उन तमाम तकनीकी पहलुओं का बारीकी से अध्ययन कर रहा है जो भविष्य में विवाद का कारण बन सकते हैं। आरक्षण नियमों का पालन, रिक्तियों का सही रोस्टर और पात्रता मानदंडों को लेकर इस बार विभाग पहले से अधिक सतर्क है।

​मंत्री ने कहा कि विभाग के अधिकारियों के साथ उनकी नियमित बैठकें शुरू हो चुकी हैं। उनका पूरा ध्यान इस बात पर है कि विज्ञापन जारी होने से लेकर परीक्षा के आयोजन और परिणाम की घोषणा तक का एक निश्चित टाइमलाइन (समय-सीमा) तय हो। अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी चिंता यही रही है कि टीआरई-3 की विसंगतियों का असर चौथे चरण पर न पड़े। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि हर समस्या पर विभाग के अधिकारियों और सभी संबंधित पक्षों के साथ बैठकर चर्चा की जाएगी। सरकार का विजन है कि बहाली की प्रक्रिया इतनी सुचारू हो कि अभ्यर्थियों को केवल अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना पड़े, न कि कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पर।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ ‘मिशन रोजगार’ पर मंथन

​मिथिलेश तिवारी ने स्पष्ट किया कि शिक्षा विभाग की हर बड़ी गतिविधि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की निगरानी में है। उन्होंने बताया कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री के साथ बैठकर एक उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। इस बैठक में टीआरई-4 की रिक्तियों की कुल संख्या, परीक्षा की संभावित तिथि और नियुक्ति प्रक्रिया के सरलीकरण पर अंतिम मुहर लगेगी। मुख्यमंत्री के ‘विकसित बिहार’ के विजन में शिक्षा और रोजगार सबसे ऊपर हैं, और इसी विजन को धरातल पर उतारने के लिए शिक्षा मंत्री ने अपनी कार्ययोजना तैयार कर ली है।

​मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं इस बात के पक्षधर हैं कि राज्य में शिक्षकों की कमी को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। सरकार का मानना है कि जब तक स्कूलों में पर्याप्त और योग्य शिक्षक नहीं होंगे, तब तक शिक्षा के स्तर में सुधार संभव नहीं है। लिहाजा, टीआरई-4 न केवल एक भर्ती प्रक्रिया है, बल्कि यह बिहार की आने वाली पीढ़ी के भविष्य को संवारने का एक बड़ा जरिया भी है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में विभाग अब ‘एक्शन मोड’ में आ गया है।

संवाद से सुलझेगी हर उलझन: अभ्यर्थियों के लिए संदेश

​शिक्षा मंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि उनके दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। उन्होंने कहा कि वे सभी पक्षों से बैठकर संवाद करेंगे। चाहे वह नियोजित शिक्षकों का मुद्दा हो या टीआरई अभ्यर्थियों की मांग, सरकार सबको साथ लेकर चलेगी। उन्होंने अभ्यर्थियों से संयम बरतने की गुजारिश की और कहा कि लोकतंत्र में विरोध का हक सबको है, लेकिन उन्हें यह भरोसा रखना चाहिए कि सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

​शुक्रवार के प्रदर्शन के बाद जो माहौल बना था, उसे ठंडा करने में मिथिलेश तिवारी का यह बयान काफी प्रभावी माना जा रहा है। अब अभ्यर्थियों की नजरें उस विज्ञापन पर टिकी हैं जिसका वादा नए शिक्षा मंत्री ने किया है। यदि सरकार समय पर रिक्तियां जारी कर देती है और बहाली प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतती है, तो यह नई सरकार के लिए एक बड़ी राजनैतिक और प्रशासनिक जीत साबित होगी। फिलहाल, पटना के गलियारों में चर्चा इस बात की है कि क्या मिथिलेश तिवारी शिक्षा विभाग के उन पुराने जख्मों को भर पाएंगे जो पिछले कुछ समय में प्रशासनिक शिथिलता के कारण गहरे हुए थे। मंत्री के पहले दिन के तेवर बताते हैं कि वे चुनौतियों से भागने के बजाय उन्हें हल करने के मूड में हैं।

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