
सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय होने की चाहत ने बिहार के नालंदा में एक युवक को सीधे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। खाकी वर्दी पहनकर रील बनाने का शौक धीरे-धीरे अवैध वसूली के धंधे में बदल गया और आखिरकार पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। बिहार शरीफ के लहरी थाना क्षेत्र से सामने आए इस मामले ने सोशल मीडिया क्रेज, नकली पहचान और पुलिस की छवि के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गिरफ्तार युवक की पहचान दीपनगर थाना क्षेत्र निवासी विपिन कुमार के रूप में हुई है। आरोप है कि वह लंबे समय से पुलिस की वर्दी पहनकर लोगों को डराता था और वाहन चालकों से जुर्माने तथा जांच के नाम पर अवैध वसूली करता था।
पुलिस के अनुसार आरोपी सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मी की तरह खुद को पेश करता था। वह खाकी वर्दी पहनकर रील और वीडियो बनाता था, जिन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर धौंस जमाने की कोशिश करता था। लेकिन धीरे-धीरे उसने इस नकली पहचान का इस्तेमाल लोगों से पैसे वसूलने के लिए शुरू कर दिया।
पूरा मामला बिहार शरीफ के लहरी थाना क्षेत्र स्थित पुलपर इलाके के नाजमू मॉल के पास का है। शुक्रवार शाम पुलिस की गश्ती टीम इलाके में नियमित पेट्रोलिंग कर रही थी। इसी दौरान एक टोटो चालक घबराया हुआ पुलिस के पास पहुंचा और मदद की गुहार लगाने लगा।
टोटो चालक ने पुलिस को बताया कि एक युवक खुद को पुलिसकर्मी बताकर उसे काफी देर से परेशान कर रहा है। चालक के मुताबिक आरोपी कभी बिहार थाना तो कभी लहरी थाना क्षेत्र की सड़कों पर उसे घुमाता रहा और जुर्माने के नाम पर 25 हजार रुपये की मांग कर रहा था।
चालक की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम तुरंत उस स्थान की ओर बढ़ी जहां आरोपी मौजूद था।
जैसे ही युवक ने पुलिस की गाड़ी को अपनी तरफ आते देखा, वह घबरा गया और वहां से भागने की कोशिश करने लगा। हालांकि गश्ती दल के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए उसे पीछा कर पकड़ लिया।
पुलिस ने जब उससे पहचान पत्र और तैनाती की जानकारी मांगी तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। पूछताछ में उसकी बातें संदिग्ध लगीं और सख्ती से पूछताछ करने पर उसने स्वीकार कर लिया कि वह असली पुलिसकर्मी नहीं है।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जब उसका मोबाइल फोन खंगाला तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी के मोबाइल में खाकी वर्दी पहने दर्जनों तस्वीरें और रील मौजूद थीं। वह अलग-अलग अंदाज में पुलिस की वर्दी पहनकर वीडियो बनाता था और सोशल मीडिया पर पोस्ट करता था।
इतना ही नहीं, उसने अपने मोबाइल की डिस्प्ले फोटो यानी डीपी पर भी पुलिस वर्दी वाली तस्वीर लगा रखी थी ताकि लोग उसे असली पुलिसकर्मी समझें।
पुलिस को शक हुआ कि मामला केवल सोशल मीडिया रील तक सीमित नहीं है। इसके बाद आरोपी के घर पर छापेमारी की गई।
छापेमारी के दौरान पुलिस को उसके घर से पुलिस की कई वर्दियां, जूते, टोपी, बेल्ट और अन्य सामान बरामद हुआ। अधिकारियों के मुताबिक उसके घर का एक कमरा बाकायदा ऑफिस की तरह तैयार किया गया था।
पुलिस को संदेह है कि वह इसी कमरे से अपनी गतिविधियों की योजना बनाता था और संभवतः वीडियो शूट भी करता था।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी करीब डेढ़ से दो साल से इस तरह की गतिविधियों में शामिल था।
पुलिस के मुताबिक वह खासतौर पर बाइक और टोटो चालकों को निशाना बनाता था। लोगों को कागजात जांच, नियम उल्लंघन या चालान का डर दिखाकर उनसे पैसे ऐंठता था।
लहरी थाना प्रभारी रंजीत कुमार रजक ने बताया कि आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।
उन्होंने कहा कि गश्ती टीम को देखते ही आरोपी भागने लगा था, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया।
थाना प्रभारी के अनुसार आरोपी से बरामद सामानों की सूची तैयार की जा चुकी है और अब यह जांच की जा रही है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में उसके साथ कोई और भी शामिल था या नहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने लंबे समय से अवैध वसूली करने की बात स्वीकार की है।
हालांकि गिरफ्तारी के बाद आरोपी विपिन कुमार ने खुद को बचाने की कोशिश की।
पुलिस हिरासत में मीडिया से बातचीत करते हुए उसने दावा किया कि वह घटना के समय वर्दी में नहीं था और केवल टोटो से जा रहा था।
उसने कहा कि पुलिस की जो वर्दी उसके पास मिली है, वह उसके भाई ने दी थी। आरोपी का कहना था कि वह केवल शौक के लिए वर्दी पहनकर फोटो खिंचवाता था और सोशल मीडिया पर लगाता था।
हालांकि पुलिस का कहना है कि उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं और कई लोगों से पूछताछ भी की जा रही है।
यह मामला केवल फर्जी पुलिसकर्मी बनकर वसूली करने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और युवाओं में दिखावे की मानसिकता से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आजकल सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए कई युवा खतरनाक और गैरकानूनी रास्ते अपनाने लगे हैं।
कई बार लोग वर्दी, सरकारी पहचान और प्रभावशाली छवि का गलत इस्तेमाल कर दूसरों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं, जो बाद में गंभीर अपराध का रूप ले लेता है।
नालंदा पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने अब तक कितने लोगों से अवैध वसूली की और कहीं उसने किसी बड़े गिरोह के साथ मिलकर तो काम नहीं किया।
स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्रवाई की सराहना की है। लोगों का कहना है कि समय रहते आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होती तो वह और अधिक लोगों को ठग सकता था।
यह घटना समाज के लिए भी एक चेतावनी है कि सोशल मीडिया की दुनिया में दिखावे और फर्जी पहचान के पीछे छिपे सच को समझना जरूरी है।
फिलहाल पुलिस आरोपी से लगातार पूछताछ कर रही है और उसके मोबाइल, सोशल मीडिया अकाउंट तथा संपर्कों की जांच की जा रही है। वहीं शहर में इस फर्जी सिपाही की गिरफ्तारी चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है।


