
बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में दरभंगा जिले के हायाघाट विधायक डॉ. रामचंद्र प्रसाद को मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है। 15 अप्रैल को नई सरकार के गठन के बाद 7 मई को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा ने सामाजिक संतुलन और संगठन में सक्रिय नेताओं को प्राथमिकता देते हुए कई नए चेहरों को मौका दिया है।
इसी क्रम में तेली समाज से आने वाले डॉ. रामचंद्र प्रसाद को कैबिनेट में शामिल किया गया है। उनके मंत्री बनने से मिथिलांचल क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच उत्साह का माहौल है।
डॉ. रामचंद्र प्रसाद दरभंगा जिले के हायाघाट विधानसभा क्षेत्र से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने राजद प्रत्याशी भोला यादव को करीब 11 हजार वोटों से हराकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया था। अपनी सादगी, संगठनात्मक क्षमता और क्षेत्र में सक्रिय जनसंपर्क के कारण वे कम समय में भाजपा के मजबूत क्षेत्रीय नेताओं में शामिल हो गए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने मिथिलांचल में संगठन को मजबूत करने और पिछड़े वर्गों में अपनी पकड़ बढ़ाने के उद्देश्य से उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी है। तेली समाज में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है और वे लंबे समय से पार्टी संगठन के लिए सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
विधानसभा पहुंचने से पहले भी डॉ. रामचंद्र प्रसाद स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वे वर्ष 2011 से 2016 तक जिला परिषद सदस्य रह चुके हैं। इसके अलावा भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के रूप में भी उन्होंने संगठन में अहम जिम्मेदारी निभाई। बताया जाता है कि उनका आरएसएस और भाजपा से जुड़ाव काफी पुराना है। उन्होंने वर्ष 2001 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता ग्रहण की थी और तभी से संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय हैं।
उनके परिवार की भी क्षेत्रीय राजनीति में अच्छी पकड़ मानी जाती है। उनकी पत्नी शीला देवी वर्ष 2016 से लगातार हायाघाट क्षेत्र से जिला परिषद सदस्य हैं। क्षेत्र में दोनों की सक्रियता का लाभ भाजपा को लगातार मिलता रहा है।
सम्राट चौधरी कैबिनेट में शामिल किए जाने की खबर के बाद हायाघाट और दरभंगा क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ताओं ने खुशी जताई। समर्थकों ने इसे मिथिलांचल और पिछड़े वर्गों को मिला सम्मान बताया है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि डॉ. रामचंद्र प्रसाद के मंत्री बनने से क्षेत्र के विकास कार्यों को नई गति मिलेगी और मिथिलांचल की समस्याओं को सरकार में मजबूती से उठाया जा सकेगा।


