
नगरनौसा प्रखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आंगनवाड़ी सुपरवाइजर को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि सुपरवाइजर पोषाहार पंजी पर हस्ताक्षर करने के बदले आंगनवाड़ी सेविका से 3200 रुपये की मांग कर रही थीं। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने जाल बिछाकर कार्रवाई की और आरोपी को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया।
जानकारी के अनुसार गिरफ्तार सुपरवाइजर की पहचान सुषमा कुमारी के रूप में हुई है। वह नगरनौसा प्रखंड क्षेत्र में आंगनवाड़ी सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थीं। मामला नगरनौसा पंचायत के वार्ड संख्या 3 और केंद्र संख्या 28 से जुड़ा हुआ है, जहां कार्यरत आंगनवाड़ी सेविका बेबी कुमारी ने निगरानी विभाग से शिकायत की थी।
पीड़िता का आरोप था कि पोषाहार पंजी पर हस्ताक्षर करने और संबंधित प्रक्रिया पूरी करने के बदले सुपरवाइजर लगातार रिश्वत की मांग कर रही थीं। बेबी कुमारी ने बताया कि उनसे 3200 रुपये देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। लगातार मांग और परेशानियों के बाद उन्होंने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी दी।
शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले की प्राथमिक जांच की। जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद टीम ने कार्रवाई की योजना बनाई। तय रणनीति के तहत बुधवार को विशेष धावा दल नगरनौसा पहुंचा और पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया।
बताया जा रहा है कि जैसे ही सुषमा कुमारी ने रिश्वत की राशि स्वीकार की, मौके पर पहले से मौजूद निगरानी टीम ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद टीम ने जरूरी कानूनी और कागजी प्रक्रिया पूरी की और आरोपी को अपने साथ लेकर चली गई। इस कार्रवाई के बाद सरकारी दफ्तरों और कर्मचारियों के बीच चर्चा का माहौल बना हुआ है।
स्थानीय लोगों के अनुसार नगरनौसा प्रखंड में लगातार सामने आ रहे रिश्वतखोरी के मामलों ने सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों का कहना है कि छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी रिश्वत मांगना आम बात होती जा रही है, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है।
निगरानी विभाग की कार्रवाई के बाद लोगों ने राहत की भावना व्यक्त की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इसी तरह लगातार कार्रवाई होती रही तो सरकारी दफ्तरों में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। कई लोगों ने यह भी कहा कि रिश्वतखोरी के खिलाफ सख्त कदम उठाने की जरूरत है ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच सके।
नगरनौसा प्रखंड में इस वर्ष रिश्वतखोरी से जुड़ी यह तीसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। इससे पहले भी निगरानी विभाग ने दो अलग-अलग मामलों में सरकारी कर्मियों को घूस लेते गिरफ्तार किया था। 20 मार्च को प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी अनुष्का कुमारी को 12 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था। वहीं 26 मार्च को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नगरनौसा के सामुदायिक उत्प्रेरक मनजीत कुमार को 10 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था।
लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि निगरानी विभाग भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। विभाग अब छोटी शिकायतों को भी गंभीरता से लेकर कार्रवाई कर रहा है। इससे सरकारी कर्मचारियों में भी डर का माहौल देखने को मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब सरकारी कर्मचारी रिश्वत लेते हुए पकड़े जाते हैं तो इससे आम जनता का भरोसा बढ़ता है कि शिकायत करने पर कार्रवाई संभव है। साथ ही अन्य कर्मचारियों के लिए भी यह एक चेतावनी का काम करता है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि आंगनवाड़ी केंद्र गरीब और जरूरतमंद बच्चों तथा महिलाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं का हिस्सा हैं। ऐसे में यदि इस व्यवस्था में भ्रष्टाचार होगा तो उसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि आंगनवाड़ी और पंचायत स्तर की योजनाओं में निगरानी और पारदर्शिता को और मजबूत किया जाए।
नगरनौसा और आसपास के क्षेत्रों में इस कार्रवाई की चर्चा पूरे दिन होती रही। लोगों ने कहा कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए तकनीक और डिजिटल सिस्टम का ज्यादा इस्तेमाल किया जाना चाहिए ताकि रिश्वतखोरी की संभावना कम हो सके।
निगरानी विभाग के अधिकारियों ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। यदि किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा रिश्वत मांगी जाती है तो लोग इसकी सूचना विभाग को दें। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार हो रही कार्रवाइयों ने यह संदेश दिया है कि अब सरकारी तंत्र में अनियमितताओं और घूसखोरी को आसानी से नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। निगरानी विभाग की सक्रियता से आम लोगों में यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में सरकारी कार्यालयों में कामकाज अधिक पारदर्शी और जवाबदेह हो सकेगा।


