बिहार में खेती होगी पूरी तरह डिजिटल, एग्रीस्टैक और डिजिटल क्रॉप सर्वे को लेकर मुख्य सचिव ने दिए सख्त निर्देश

बिहार सरकार कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और किसानों के लिए डिजिटल व्यवस्था तैयार करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। राज्य में चल रहे ‘एग्रीस्टैक’ और ‘डिजिटल क्रॉप सर्वे’ अभियान की प्रगति को लेकर मंगलवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने संबंधित विभागों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए और लंबित कार्यों को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों से जुड़ी डिजिटल परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

समीक्षा बैठक के दौरान कृषि विभाग ने राज्यभर में चल रहे एग्रीस्टैक और डिजिटल क्रॉप सर्वे अभियान की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में बताया गया कि बिहार में अब तक लाखों किसानों का डिजिटल पंजीकरण किया जा चुका है और करोड़ों भूखंडों का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। सरकार का उद्देश्य खेती से जुड़ी हर जानकारी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर कृषि व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाना है।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने समीक्षा के दौरान सबसे अधिक चिंता लंबित सत्यापन कार्यों को लेकर जताई। अधिकारियों के अनुसार, हल्का कर्मचारी, राजस्व अधिकारी और अंचल अधिकारी स्तर पर करीब 8.22 लाख आवेदन अभी भी लंबित हैं। मुख्य सचिव ने इन आवेदनों को मिशन मोड में निपटाने का निर्देश दिया और कहा कि सत्यापन प्रक्रिया में देरी होने से किसानों को योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी हो सकती है।

बैठक में यह भी सामने आया कि राज्य के हजारों गांवों का मानचित्र डेटा अब तक पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है। करीब 15,400 से अधिक गांवों के डिजिटल मानचित्र से जुड़ा काम लंबित है। इस पर मुख्य सचिव ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को कृषि विभाग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर जल्द से जल्द डेटा तैयार करने का निर्देश दिया।

मुख्य सचिव ने कहा कि डिजिटल कृषि व्यवस्था की सफलता के लिए भूमि रिकॉर्ड और मानचित्र डेटा का सही होना बेहद जरूरी है। यदि जमीन से जुड़ी जानकारी सटीक नहीं होगी, तो भविष्य में किसानों को योजनाओं का लाभ देने और फसल से जुड़ी जानकारी जुटाने में कठिनाई हो सकती है।

कृषि विभाग द्वारा साझा की गई रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में अब तक 47 लाख 85 हजार 386 किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। यह राज्य के कुल संभावित किसानों का लगभग 55.41 प्रतिशत हिस्सा माना जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि कई जिलों में पंजीकरण अभियान तेज गति से चल रहा है और आने वाले महीनों में इस आंकड़े में और वृद्धि होने की उम्मीद है।

पंजीकरण के मामले में वैशाली और शिवहर जिले सबसे आगे बताए गए हैं। वैशाली जिले में पंजीकरण का प्रतिशत 112 तक पहुंच गया है, जबकि शिवहर में यह आंकड़ा 101 प्रतिशत दर्ज किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि कई किसानों के दोबारा अपडेट और संशोधित डेटा के कारण यह प्रतिशत 100 से अधिक दिखाई दे रहा है।

राज्य सरकार का दावा है कि एग्रीस्टैक के जरिए किसानों का एकीकृत डिजिटल प्रोफाइल तैयार किया जा रहा है। इसमें किसान की जमीन, फसल, सिंचाई व्यवस्था, बैंक खाते, सरकारी योजनाओं का लाभ और कृषि गतिविधियों से जुड़ी जानकारी शामिल की जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे भविष्य में किसी भी योजना का लाभ सीधे सही किसानों तक पहुंचाना आसान होगा।

डिजिटल क्रॉप सर्वे अभियान के तहत बिहार के लगभग सभी गांवों में सर्वे कार्य शुरू हो चुका है। राज्य के कुल 30,416 गांवों में से 30,015 गांवों में सर्वेक्षण प्रारंभ कर दिया गया है। यह अभियान कृषि क्षेत्र में डेटा आधारित नीति निर्माण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 1.82 करोड़ से अधिक प्लॉटों का डिजिटल सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। इन प्लॉटों में कौन सी फसल उगाई जा रही है, कितनी भूमि सिंचित है और किस इलाके में कौन सी फसल अधिक हो रही है, इसका पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।

सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि बिहार में सबसे अधिक क्षेत्र में गेहूं और मक्का की खेती हो रही है। लगभग 24.21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का डेटा दर्ज किया गया है, जिसमें गेहूं की हिस्सेदारी करीब 60.75 प्रतिशत और मक्का की हिस्सेदारी लगभग 14.74 प्रतिशत बताई गई है।

इसके अलावा बिहार की प्रमुख नकदी फसलों का भी डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। मखाना, केला और लीची जैसी फसलों से जुड़े आंकड़ों को अलग से रिकॉर्ड किया जा रहा है ताकि भविष्य में इनके उत्पादन, विपणन और निर्यात को लेकर बेहतर नीतियां बनाई जा सकें।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बैठक में कहा कि एग्रीस्टैक केवल डेटा संग्रहण की परियोजना नहीं है, बल्कि यह खेती को नई दिशा देने वाला प्लेटफॉर्म है। उन्होंने कहा कि बिहार अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर ‘क्रॉप इंटेलिजेंस’ यानी फसल आधारित तकनीकी विश्लेषण की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस डिजिटल व्यवस्था से किसानों को मौसम, बीमा, बाजार मूल्य, आपदा राहत और ऋण प्रबंधन जैसी सुविधाओं का लाभ अधिक तेजी और पारदर्शिता के साथ मिल सकेगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे कृषि योजनाओं में गड़बड़ी कम होगी और फर्जी लाभार्थियों की पहचान भी आसान होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि एग्रीस्टैक जैसी परियोजनाएं आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। डिजिटल डेटा उपलब्ध होने से सरकार यह समझ सकेगी कि किस इलाके में कौन सी फसल अधिक हो रही है, किस क्षेत्र में सिंचाई की जरूरत है और कहां किसानों को विशेष सहायता देने की आवश्यकता है।

आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी यह प्रणाली काफी उपयोगी साबित हो सकती है। बाढ़, सूखा या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के समय प्रभावित किसानों की पहचान तेजी से की जा सकेगी और राहत राशि सीधे उनके खातों में भेजी जा सकेगी।

राज्य सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में सभी किसानों और कृषि भूमि को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना है। इसके लिए कृषि विभाग, राजस्व विभाग और तकनीकी एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया जा रहा है।

फिलहाल मुख्य सचिव ने सभी विभागों को लंबित कार्यों को तेजी से पूरा करने और किसानों के सत्यापन अभियान को समय सीमा के भीतर समाप्त करने का निर्देश दिया है। बिहार में कृषि क्षेत्र को तकनीक आधारित बनाने की दिशा में चल रही यह पहल आने वाले वर्षों में राज्य की कृषि व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकती है।

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