सुपौल के जिला अवर निबंधक पर शिकंजा, आय से अधिक संपत्ति मामले में EOU की बड़ी कार्रवाई

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने सुपौल के जिला अवर निबंधक अमरेन्द्र कुमार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में दर्ज मामले के बाद पटना, सुपौल और छपरा समेत चार ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। जांच एजेंसी का दावा है कि प्रारंभिक जांच में अधिकारी की आय की तुलना में करोड़ों रुपये की अतिरिक्त संपत्ति का पता चला है। इस कार्रवाई के बाद निबंधन विभाग और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार, आर्थिक अपराध इकाई को लंबे समय से अमरेन्द्र कुमार की संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। विश्वस्त सूत्रों से मिली सूचनाओं के सत्यापन और प्रारंभिक जांच के बाद ईओयू ने मामला दर्ज किया। जांच एजेंसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज करते हुए विशेष अदालत से तलाशी वारंट प्राप्त किया और फिर कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी।

जांच एजेंसी के मुताबिक, अमरेन्द्र कुमार पर अपनी ज्ञात आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। प्रारंभिक जांच में करीब 1 करोड़ 10 लाख रुपये से अधिक की कथित अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि यह राशि उनकी घोषित आय से लगभग 65 प्रतिशत अधिक है। इसी आधार पर आर्थिक अपराध इकाई ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की।

छापेमारी के दौरान जिन स्थानों को जांच के दायरे में लिया गया उनमें पटना के आशियाना-दीघा रोड स्थित एक फ्लैट, सारण जिले के छपरा में पैतृक आवास, सुपौल स्थित कार्यालय और किराये का आवास शामिल हैं। पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में गठित अलग-अलग टीमों ने सुबह से ही कार्रवाई शुरू की।

सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड, संपत्ति के कागजात और निवेश संबंधी फाइलें बरामद हुई हैं। जांच एजेंसी अब इन दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि संपत्ति के स्रोत और वित्तीय लेन-देन की पूरी जानकारी सामने लाई जा सके।

अमरेन्द्र कुमार पहले भी विवादों में रह चुके हैं। सुपौल में पदस्थापना से पहले वे बेतिया में जिला अवर निबंधक के पद पर तैनात थे। उस दौरान उन पर कथित तौर पर रोक सूची में शामिल जमीनों की रजिस्ट्री कराने के आरोप लगे थे। आरोप था कि कई विवादित प्लॉटों का निबंधन कर भारी आर्थिक लाभ लिया गया। यह मामला उस समय काफी चर्चा में रहा था और विभागीय स्तर पर सवाल भी उठे थे।

हालांकि उस विवाद के बावजूद उनके खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई थी। बाद में उनका तबादला कर सुपौल भेज दिया गया। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जून 2024 में उन्हें बेतिया से स्थानांतरित कर सुपौल में जिला अवर निबंधक की जिम्मेदारी दी गई थी। अब आय से अधिक संपत्ति मामले में हुई कार्रवाई के बाद पुराने विवाद भी फिर से चर्चा में आ गए हैं।

आर्थिक अपराध इकाई का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आगे कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। अधिकारियों के मुताबिक, संपत्ति के दस्तावेजों के अलावा निवेश, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और अन्य आर्थिक गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर अन्य विभागों और एजेंसियों से भी सहयोग लिया जाएगा।

बिहार में पिछले कुछ समय से भ्रष्टाचार के मामलों में लगातार कार्रवाई देखी जा रही है। विभिन्न विभागों के अधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और अनियमितताओं के मामलों में छापेमारी की जा रही है। सरकार और जांच एजेंसियां यह संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर के अधिकारी को राहत नहीं दी जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि निबंधन विभाग लंबे समय से संवेदनशील विभागों में गिना जाता रहा है। जमीन रजिस्ट्री, भूमि विवाद और संपत्ति हस्तांतरण जैसे मामलों में बड़े पैमाने पर आर्थिक लेन-देन होने के कारण इस विभाग पर हमेशा निगाह रहती है। ऐसे में किसी अधिकारी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप पूरे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर देते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की लगातार मांग उठती रही है। कई बार विवादित या रोक सूची वाली जमीनों की रजिस्ट्री को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं होने पर आम लोगों का भरोसा प्रभावित होता है। अब ईओयू की कार्रवाई के बाद लोगों की नजरें आगे की जांच और संभावित खुलासों पर टिकी हुई हैं।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित अवैध संपत्ति किन-किन माध्यमों से अर्जित की गई। इसके अलावा परिवार के अन्य सदस्यों और करीबी लोगों के नाम पर संपत्ति होने की संभावना को भी जांच के दायरे में रखा गया है। कई वित्तीय दस्तावेजों की तकनीकी जांच कराई जा सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ आगे और कड़ी कार्रवाई हो सकती है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत संपत्ति जब्ती और अन्य कानूनी प्रावधान भी लागू किए जा सकते हैं।

फिलहाल आर्थिक अपराध इकाई की टीम दस्तावेजों की जांच और पूछताछ में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी कार्रवाई के बीच यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

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