
भागलपुर, भागलपुर की लाइफ लाइन माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब इसकी मरम्मत को लेकर प्रशासन और तकनीकी एजेंसियों की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। पुल के एक हिस्से में आई गंभीर क्षति के कारण जहां आवागमन पूरी तरह प्रभावित हुआ है, वहीं अब इसे जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से चालू करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है। पुल निर्माण विभाग की टीम लगातार मौके पर डटी हुई है और अब सेना से जुड़ी प्रतिष्ठित एजेंसी बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) भी इस कार्य में सक्रिय रूप से शामिल हो गई है।
मंगलवार को BRO की एक विशेष तकनीकी टीम भागलपुर पहुंची और विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से का बारीकी से निरीक्षण किया। BRO के अधिकारी विपिन कुमार चंद्र अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और पुल की वर्तमान स्थिति का तकनीकी मूल्यांकन किया। टीम ने पुल के टूटे हुए स्लैब, संरचना की मजबूती, आसपास के हिस्सों की स्थिति और संभावित जोखिमों का गहन अध्ययन किया। निरीक्षण के दौरान कई तकनीकी पहलुओं की जांच की गई ताकि मरम्मत कार्य को अधिक प्रभावी और सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।
BRO की टीम ने पुल के प्रभावित हिस्से का माप, संरचनात्मक संतुलन और लोड क्षमता का भी परीक्षण किया। अधिकारियों ने यह जानने की कोशिश की कि क्षति कितनी गंभीर है और किन तकनीकी उपायों के जरिए इसे कम समय में दुरुस्त किया जा सकता है। माना जा रहा है कि BRO के विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद मरम्मत कार्य में और तेजी आएगी तथा आवश्यक संसाधनों और मशीनों की तैनाती भी बढ़ाई जा सकती है।
विक्रमशिला सेतु उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण पुल है। इसके माध्यम से भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा और सहरसा जैसे सीमांचल और कोसी क्षेत्र के लाखों लोग प्रतिदिन आवाजाही करते हैं। पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद इन जिलों के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाने के कारण यात्रियों का समय और खर्च दोनों बढ़ गया है। वहीं व्यापारिक गतिविधियों, फल-सब्जी की आपूर्ति, दूध व्यवसाय और रोजमर्रा के कामकाज पर भी इसका सीधा असर पड़ा है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन लगातार निगरानी बनाए हुए है। पुल निर्माण विभाग, जिला प्रशासन और तकनीकी एजेंसियां समन्वय के साथ कार्य कर रही हैं। प्रशासन की ओर से लोगों के लिए वैकल्पिक नाव सेवा और दूसरे मार्गों की व्यवस्था भी की गई है ताकि आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित न हो। वहीं सुरक्षा के लिहाज से पुल के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है।
BRO अधिकारी विपिन कुमार चंद्र ने निरीक्षण के दौरान कहा कि टीम पुल की तकनीकी स्थिति का विस्तृत अध्ययन कर रही है। जांच के आधार पर मरम्मत और पुनर्स्थापना को लेकर आवश्यक सुझाव दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि उद्देश्य यही है कि पुल को पूरी तरह सुरक्षित बनाकर जल्द से जल्द यातायात के लिए चालू किया जा सके। वहीं बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के इंजीनियर आलोक भौमिक ने बताया कि विभाग लगातार मरम्मत कार्य में जुटा हुआ है और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों को भी उम्मीद है कि BRO जैसी अनुभवी एजेंसी के जुड़ने से मरम्मत कार्य में तेजी आएगी। लोगों का कहना है कि विक्रमशिला सेतु केवल एक पुल नहीं बल्कि भागलपुर और सीमांचल क्षेत्र की जीवनरेखा है। इसके बंद होने से लाखों लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो गई है। ऐसे में जल्द मरम्मत और यातायात बहाल होना बेहद जरूरी है।
प्रशासन का कहना है कि मरम्मत कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। तकनीकी टीमों द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि पुल की संरचना पूरी तरह सुरक्षित बनी रहे। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मरम्मत कार्य कितनी तेजी से पूरा होता है और कब तक विक्रमशिला सेतु एक बार फिर आम लोगों के लिए पूरी तरह चालू हो पाता है।


