भागलपुर: विक्रमशिला सेतु पर ‘ब्रेक’ लगते ही रसोई का बिगड़ा बजट; सब्जियों के दाम में 15 रुपये तक का उछाल, परवल और टमाटर के भाव हुए बेकाबू

भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले की ‘लाइफलाइन’ कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने और उस पर परिचालन पूरी तरह ठप हो जाने का सीधा और कड़वा असर अब आम आदमी की थाली पर दिखने लगा है। सोमवार को भागलपुर शहर की विभिन्न सब्जी मंडियों और स्थानीय हाटों में जो दृश्य दिखा, उसने मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। जिस पुल से कभी हजारों गाड़ियां ताजी सब्जियां लेकर शहर में प्रवेश करती थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा है और इसका सीधा परिणाम कीमतों में ‘आग’ के रूप में सामने आया है। महज 24 घंटों के भीतर हरी सब्जियों और फलों की कीमतों में 10 से 15 रुपये प्रति किलो तक का भारी उछाल दर्ज किया गया है। तिलकामांझी से लेकर जीरो माइल तक की मंडियों में ग्राहक कीमतों को सुनकर ठिठक रहे हैं, वहीं दुकानदार आपूर्ति की कमी का हवाला देकर बढ़े हुए दामों पर अडिग हैं। यह केवल एक यातायात समस्या नहीं रह गई है, बल्कि अब यह भागलपुर की रसोई के बजट पर हुआ एक सीधा हमला है।

नवगछिया का ‘फूड बास्केट’ कटा: आपूर्ति की चेन ध्वस्त

​भागलपुर शहर अपनी रोजमर्रा की खाद्य सामग्री, विशेष रूप से हरी सब्जियों और फलों के लिए काफी हद तक गंगा पार के क्षेत्रों, विशेषकर नवगछिया पर निर्भर है। नवगछिया की उर्वर भूमि से पैदा होने वाला परवल, खीरा, टमाटर और केला भागलपुर की मंडियों की जान होते हैं। विक्रमशिला सेतु के माध्यम से ये सब्जियां तड़के सुबह शहर पहुँच जाती थीं, जिससे कीमतें नियंत्रित रहती थीं और उपभोक्ताओं को ताजी सब्जियां मिलती थीं।

​पुल बंद होने के बाद अब स्थिति यह है कि नवगछिया से आने वाली सब्जियों का मुख्य मार्ग बंद हो चुका है। मालवाहक वाहनों को अब मुंगेर या सुल्तानगंज के रास्ते लंबा चक्कर लगाकर आना पड़ रहा है, जिससे न केवल समय अधिक लग रहा है बल्कि परिवहन लागत (ट्रान्सपोर्टेशन कॉस्ट) में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। इसी बढ़ी हुई लागत और आपूर्ति में आई कमी का बोझ अब सीधे तौर पर ग्राहकों की जेब पर डाला जा रहा है। सोमवार को मंडी पहुँचने वाले थोक व्यापारियों का कहना है कि जितनी मांग है, उसकी तुलना में सब्जियों की आवक आधी भी नहीं रह गई है।

तिलकामांझी हटिया का हाल: आसमान पर पहुँचे सब्जियों के दाम

​भागलपुर शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में से एक तिलकामांझी में लगने वाले हटिया (हाट) में सोमवार को कीमतों का जो ग्राफ दिखा, वह डराने वाला था। रविवार तक जो सब्जियां सामान्य दरों पर मिल रही थीं, सोमवार को उनके तेवर बदले हुए थे।

प्रमुख सब्जियों की कीमतों में बदलाव (प्रति किलो/दर्जन):

सब्जी/फल

रविवार की कीमत (अनुमानित)

सोमवार की कीमत

वृद्धि (प्रति किलो/दर्जन)

परवल

35-40 रुपये

50-55 रुपये

15 रुपये

खीरा

25 रुपये

40 रुपये

15 रुपये

टमाटर

30 रुपये

40 रुपये

10 रुपये

केला (नवगछिया)

30 रुपये/दर्जन

50 रुपये/दर्जन

20 रुपये

परवल, जो इस मौसम की मुख्य सब्जी है, उसके दाम में सबसे अधिक 15 रुपये की बढ़ोतरी देखी गई। खीरा, जिसकी मांग गर्मी के कारण अधिक रहती है, वह भी 40 रुपये के स्तर को छू गया। टमाटर की कीमतों में भी प्रति किलो 10 रुपये की तेजी आई है। सबसे ज्यादा असर नवगछिया के प्रसिद्ध केले पर पड़ा है, जिसकी कीमत में 20 रुपये प्रति दर्जन का बड़ा उछाल आया है।

फलों के बाजार पर भी छाया संकट: लीची का इंतजार

​सब्जियों के साथ-साथ फलों के बाजार में भी हलचल तेज है। नवगछिया का केला भागलपुर के बाजार की शोभा बढ़ाता है, लेकिन वर्तमान में इसकी आवक प्रभावित होने से फुटकर दुकानों पर इसकी कमी दिखने लगी है। आम तौर पर 30 रुपये दर्जन बिकने वाला केला अब 50 रुपये में बिक रहा है। वहीं, भागलपुर की पहचान ‘लीची’ को लेकर भी लोग उत्सुक हैं। हालांकि, अभी तक आधिकारिक रूप से नवगछिया या आसपास के इलाकों की लीची बड़े पैमाने पर भागलपुर की मंडियों में नहीं पहुँची है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यदि पुल की स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो जब लीची का पीक सीजन आएगा, तब इसकी कीमतें आम आदमी की पहुँच से बाहर हो सकती हैं। व्यापारियों को डर है कि वैकल्पिक मार्ग से लीची लाने में देरी होगी, जिससे यह नाजुक फल सड़कों पर ही खराब हो सकता है।

आम आदमी और छोटे व्यापारियों की व्यथा

​तिलकामांझी हटिया में सब्जी खरीदने आए एक स्थानीय निवासी ने बताया कि कल तक जो थैला 200 रुपये में भर जाता था, आज उसके लिए 300 रुपये भी कम पड़ रहे हैं। “परवल और टमाटर जैसी बुनियादी चीजों के दाम अचानक इतने बढ़ जाएंगे, यह सोचा नहीं था। प्रशासन को जल्द से जल्द कोई वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए ताकि खाने-पीने की चीजों की आवक सामान्य हो सके।”

​दूसरी ओर, छोटे फुटकर विक्रेता भी परेशान हैं। उनका कहना है कि मंडी में ही उन्हें माल महंगा मिल रहा है, ऐसे में वे पुराने दामों पर सब्जी कैसे बेचें? “ग्राहक हमसे मोलभाव करते हैं और झगड़ते हैं, लेकिन हम क्या करें? पुल बंद होने से गाड़ियां नहीं आ रही हैं और जो आ रही हैं, वे डबल भाड़ा ले रही हैं।” यह स्थिति भागलपुर के निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए ‘कोढ़ में खाज’ जैसी है, जो पहले ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं।

अनिश्चितता का माहौल और प्रशासनिक चुनौती

​वर्तमान में भागलपुर प्रशासन यातायात को डाइवर्ट करने और पुल की मरम्मत की योजना बनाने में जुटा है, लेकिन मंडियों में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अभी तक कोई ठोस ‘प्राइस कंट्रोल’ मैकेनिज्म (कीमत नियंत्रण प्रणाली) नहीं दिखाई दे रही है। यदि विक्रमशिला सेतु लंबे समय तक बंद रहता है, तो केवल सब्जियों के दाम ही नहीं, बल्कि अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी उछाल आने की प्रबल आशंका है।

​आने वाले दिनों में मंडियों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नवगछिया के किसानों के पास भी अपनी उपज को भागलपुर तक पहुँचाने का कोई आसान रास्ता नहीं बचा है। नाव के जरिए बड़ी मात्रा में सब्जी ढोना न केवल जोखिम भरा है, बल्कि यह महंगा भी पड़ता है। ऐसे में भागलपुर की मंडियां अब मुंगेर और अन्य जिलों से आने वाली सब्जियों पर निर्भर होने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन वह आपूर्ति नवगछिया की भरपाई करने में नाकाफी साबित हो रही है। भागलपुर की जनता अब केवल इस उम्मीद में है कि या तो पुल जल्द खुले या प्रशासन नावों के जरिए मालवाहक बेड़े को पार कराने की कोई प्रभावी व्यवस्था करे, ताकि उनकी थाली से सब्जियां कम न हों।

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