कटिहार में मजाक बना मौत का पैगाम: ग्रेजुएट बेटे के घास काटने पर तंज बना खूनी संघर्ष की वजह; कोर्ट के मुंशी की गला दबाकर हत्या, गांव में भारी तनाव

सालमारी (कटिहार)। बिहार के कटिहार जिले से एक ऐसी सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहाँ महज एक मामूली सी टिप्पणी और मजाक ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। जिले के बलिया बेलौन थाना क्षेत्र अंतर्गत मधाइपुर पंचायत के अलहणडा खाड़ी गांव में रविवार, 3 मई 2026 की दोपहर एक ऐसी घटना घटी जिसने समाज की सहनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक उच्च शिक्षित युवक के अपने घर के काम में हाथ बंटाने पर किए गए तंज ने ऐसा तूल पकड़ा कि बीच-बचाव करने आए उसके पिता की बेरहमी से हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान 47 वर्षीय मुजम्मिल के रूप में हुई है, जो बारसोई अनुमंडल कोर्ट में मुंशी के रूप में कार्यरत थे। इस हत्याकांड के बाद पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और दो गुटों के बीच उपजे तनाव को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। एक छोटी सी बात कैसे इंसान की जान लेने पर आमादा कर देती है, अलहणडा खाड़ी गांव की यह घटना इसका जीता-जागता और दुखद उदाहरण है।

विवाद की जड़: “ग्रेजुएट होकर घास काटते हो…”

​घटनाक्रम की शुरुआत रविवार की दोपहर उस समय हुई जब मुजम्मिल का पुत्र मुश्फिक रजा अपने पालतू पशुओं के लिए चारा जुटाने के उद्देश्य से घास काटने जा रहा था। मुश्फिक रजा एक स्नातक (ग्रेजुएट) युवक है और गांव में उसकी पहचान एक पढ़े-लिखे शालीन युवक के रूप में होती है। आरोप है कि जब वह घास काटने के लिए निकल रहा था, तभी गांव के ही रब्बानी नामक व्यक्ति ने उसे देख लिया और उस पर व्यंग्य कसना शुरू कर दिया।

​रब्बानी ने मुश्फिक पर तंज कसते हुए कहा, “तुम तो ग्रेजुएट हो, फिर भी घास काटते हो? अगर यही सब करते रहोगे तो तुम्हारी शादी कैसे होगी? कौन अपनी बेटी तुम्हें देगा?” शिक्षित होने के बावजूद शारीरिक श्रम करने को लेकर किए गए इस अपमानजनक मजाक ने मुश्फिक के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाई। उसने रब्बानी की इस बात का विरोध किया, जिसके बाद दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते बात गाली-गलौज तक पहुँच गई और दोनों पक्षों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई।

पिता का हस्तक्षेप और खूनी मंजर

​शोर-शराबा सुनकर दोनों परिवारों के सदस्य और आसपास के ग्रामीण मौके पर जुट गए। विवाद को बढ़ता देख बारसोई कोर्ट में मुंशी का काम करने वाले मुजम्मिल भी वहां पहुँचे। एक सुलझे हुए इंसान और कानून की बारीकियों को समझने वाले व्यक्ति के रूप में मुजम्मिल ने अपने बेटे और रब्बानी के बीच चल रहे झगड़े को शांत कराने की कोशिश की। उन्होंने चाहा कि मामला बातचीत से सुलझ जाए, लेकिन आक्रोशित रब्बानी और उसके पक्ष के लोग कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे।

​आरोप है कि विवाद शांत कराने की कोशिश कर रहे मुजम्मिल पर ही दूसरे पक्ष के लोगों ने हमला बोल दिया। इस दौरान उनके साथ जमकर मारपीट की गई। चश्मदीदों और परिजनों का कहना है कि हमलावरों ने मुजम्मिल का गला इतनी जोर से दबाया कि उनकी सांसें उखड़ने लगीं। दम घुटने और चोटों के कारण मुजम्मिल वहीं जमीन पर बेहोश होकर गिर पड़े। पिता को मरणासन्न स्थिति में देख मुश्फिक और अन्य परिजन बदहवास हो गए। उन्हें आनन-फानन में पास के एक ग्रामीण चिकित्सक के पास ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक जांच के बाद ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

अस्पताल में कोहराम और पुलिस की उलझन

​मुजम्मिल की मौत की खबर जैसे ही गांव में फैली, कोहराम मच गया। परिजनों की चीख-पुकार से पूरा इलाका दहल उठा। सूचना मिलते ही बलिया बेलौन थाना की पुलिस दलबल के साथ अलहणडा खाड़ी गांव पहुँची। पुलिस ने स्थिति को बिगड़ते देख सबसे पहले भीड़ को तितर-बितर किया और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए कटिहार सदर अस्पताल भेज दिया।

​इस मामले में पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती हत्या के सटीक तरीके को स्पष्ट करना है। बारसोई के एसडीपीओ अजय कुमार ने घटनास्थल का मुआयना करने के बाद बताया कि मृतक के परिजन बयानों में दो अलग-अलग बिंदुओं पर बात कर रहे हैं। शुरुआत में यह कहा गया कि मुजम्मिल के सिर पर लाठी से जोरदार प्रहार किया गया जिससे उनकी जान गई। वहीं, बाद में परिजनों और कुछ चश्मदीदों ने आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान गला दबाकर उनकी हत्या की गई है। एसडीपीओ ने स्पष्ट किया कि पुलिस इन दोनों ही बिंदुओं को ध्यान में रखकर साक्ष्य जुटा रही है। फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जो मौत के वास्तविक कारण (सिर की चोट या गला घोंटना) की पुष्टि करेगी।

कोर्ट के मुंशी की साख और सहकर्मियों में शोक

​मुजम्मिल पिछले कई वर्षों से बारसोई अनुमंडल कोर्ट में मुंशी के पद पर कार्यरत थे। वे न केवल अपने परिवार के मुख्य आर्थिक आधार थे, बल्कि स्थानीय विधिक हलकों में भी उनकी अच्छी साख थी। उनके सहकर्मियों ने बताया कि वे एक शांत स्वभाव के व्यक्ति थे जो हमेशा विवादों से दूर रहना पसंद करते थे। रविवार की छुट्टी के दिन अपनी ही आंखों के सामने बेटे के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को रोकना उनके लिए जानलेवा साबित होगा, ऐसा किसी ने सोचा भी नहीं था। बारसोई कोर्ट के वकीलों और अन्य मुंशियों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की है।

गांव में तनाव: पुलिस की विशेष चौकसी

​इस हत्याकांड के बाद अलहणडा खाड़ी गांव में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। मृतक और आरोपी पक्ष एक ही समुदाय और गांव से ताल्लुक रखते हैं, जिससे गांव में गुटबाजी और प्रतिशोध की आशंका बढ़ गई है। एहतियात के तौर पर कटिहार जिला पुलिस ने गांव में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी है। बलिया बेलौन थाना अध्यक्ष खुद स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।

​पुलिस ने आरोपी रब्बानी और उसके परिवार के कुछ सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश तेज कर दी है। घटना के बाद से ही आरोपी और उसके परिजन घर छोड़कर फरार हैं। एसडीपीओ अजय कुमार ने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि कानून अपना काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही उन्हें सलाखों के पीछे पहुँचाया जाएगा।

​यह घटना एक बार फिर समाज के सामने यह कड़वा सच पेश करती है कि कैसे सहनशक्ति की कमी और अहं का टकराव एक सामान्य विवाद को जघन्य अपराध में बदल देता है। मुजम्मिल की मौत ने एक परिवार को बेसहारा कर दिया है और मुश्फिक के उस “ग्रेजुएट” होने के गौरव पर एक कभी न मिटने वाला जख्म दे दिया है, जिस पर उसके पिता को नाज था। अब पूरे जिले की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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