
देवघर। विश्वप्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला 2026 को लेकर झारखंड सरकार और देवघर जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। इस वर्ष का मेला न केवल श्रद्धालुओं की भीड़ के लिहाज से ऐतिहासिक होने वाला है, बल्कि व्यवस्थाओं के मामले में भी यह एक नजीर पेश करेगा। रविवार, 03 मई 2026 को देवघर में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने साफ कर दिया कि बाबा वैद्यनाथ के दरबार में अब ‘कतार’ ही सर्वोपरि होगी। इस बार मेले के दौरान किसी भी प्रकार के ‘आउट ऑफ टर्न’ दर्शन यानी वीआईपी और वीवीआईपी दर्शन पर पूरी तरह से पाबंदी रहेगी। सरकार का यह फैसला उन लाखों आम शिवभक्तों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है, जो घंटों कतार में लगकर अपने आराध्य की एक झलक पाने का इंतजार करते हैं। सुदिव्य कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि प्रशासन की प्राथमिकता केवल और केवल वे श्रद्धालु हैं जो सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा कर बाबा की नगरी पहुँचते हैं।
31 जुलाई से शुरू होगा आस्था का महाकुंभ
बैठक के दौरान आधिकारिक तौर पर यह जानकारी साझा की गई कि आगामी 31 जुलाई 2026 को राजकीय श्रावणी मेला का विधिवत शुभारंभ होगा। सावन की पहली सोमवारी से पहले ही देवघर और बासुकीनाथ के पूरे मेला क्षेत्र को चाक-चौबंद करने का लक्ष्य रखा गया है। सुदिव्य कुमार ने कहा कि श्रावणी मेला केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी भारत का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है। ऐसे में यह सरकार की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु यहाँ से एक सुखद और मधुर स्मृति लेकर वापस लौटें। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर विभाग की जवाबदेही तय होगी।
वीआईपी कल्चर पर प्रहार: ‘सब बराबर’ का सिद्धांत
श्रावणी मेले के दौरान अक्सर यह देखा जाता था कि प्रभावशाली लोग और विशिष्ट अतिथि बिना कतार के सीधे मंदिर में प्रवेश पा लेते थे, जिससे आम कांवरियों में असंतोष पैदा होता था और कतार प्रबंधन में भी बाधा आती थी। इस बार सुदिव्य कुमार ने इस प्रथा को जड़ से खत्म करने का निर्देश दिया है।
- पूर्ण प्रतिबंध: मेले के पूरे एक महीने की अवधि तक वीआईपी और वीवीआईपी दर्शन के लिए जारी होने वाले विशेष पास और अनुमतियां बंद रहेंगी।
- समानता का भाव: मंत्री ने स्पष्ट किया कि बाबा के दरबार में सब बराबर हैं, इसलिए किसी को भी ‘आउट ऑफ टर्न’ यानी बिना बारी के दर्शन की अनुमति नहीं मिलेगी।
- कतार प्रबंधन: वीआईपी दर्शन बंद होने से कतार की गति बढ़ेगी और कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति को भी दर्शन के लिए कम समय का इंतजार करना पड़ेगा।
- प्रोटोकॉल की सीमा: प्रशासनिक अधिकारियों को भी निर्देश दिया गया है कि वे केवल सुरक्षा और व्यवस्था के कार्यों तक ही सीमित रहें और किसी को व्यक्तिगत लाभ न पहुँचाएं।
विभागीय समीक्षा: बुनियादी सुविधाओं पर विशेष फोकस
बैठक में केवल वीआईपी दर्शन ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के ठहरने, पानी, स्वास्थ्य और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। सुदिव्य कुमार ने एक-एक कर विभिन्न विभागों के कार्यों की समीक्षा की और उन्हें समय सीमा के भीतर काम पूरा करने का अल्टीमेटम दिया।
1. विद्युत आपूर्ति और पथ निर्माण विभाग:
मेला क्षेत्र में 24 घंटे निर्बाध बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। जर्जर तारों को बदलने और ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने का काम जून के अंत तक पूरा करने को कहा गया है। वहीं, पथ निर्माण विभाग को सुल्तानगंज से देवघर तक के कांवरिया पथ की मरम्मत और सड़कों को गड्ढा मुक्त करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
2. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग तथा नगर निगम:
लाखों की भीड़ के बीच शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसके लिए जगह-जगह वाटर स्टैंड पोस्ट बनाने और टैंकर्स की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। नगर निगम को पूरे शहर की सफाई, ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने और पर्याप्त संख्या में चलंत शौचालय (Mobile Toilets) तैनात करने को कहा गया है ताकि स्वच्छता बनी रहे।
3. स्वास्थ्य और पुलिस विभाग:
स्वास्थ्य विभाग को पूरे मेला क्षेत्र और कांवरिया पथ पर अस्थाई मेडिकल कैंप लगाने और एम्बुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश मिला है। दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक और डॉक्टरों की रोटेशन ड्यूटी तय की जाएगी। सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस विभाग को भीड़ नियंत्रण के आधुनिक तरीके अपनाने, संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल की तैनाती और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी करने को कहा गया है।
पर्यटन और कला संस्कृति विभाग की भूमिका
श्रावणी मेला केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह झारखंड की संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने का भी एक माध्यम है। पर्यटन विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे श्रद्धालुओं के लिए ‘सूचना केंद्रों’ की स्थापना करें और विभिन्न भाषाओं में गाइड्स की व्यवस्था करें। कला संस्कृति विभाग को शाम के समय सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की जिम्मेदारी दी गई है ताकि श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ राज्य की समृद्ध विरासत का भी परिचय मिल सके। सुदिव्य कुमार ने भवन प्रमंडल के अधिकारियों को टेंट सिटी और धर्मशालाओं की मरम्मत कार्य को 15 जुलाई तक हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया है।
जवाबदेही और मधुर स्मृति का संकल्प
बैठक के समापन पर सुदिव्य कुमार ने सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे इसे केवल एक सरकारी कार्य न समझकर ‘सेवा’ के रूप में लें। उन्होंने कहा कि बाबा वैद्यनाथ की नगरी से जो भी शिवभक्त वापस जाए, उसके मन में प्रशासन के प्रति सम्मान और देवघर के प्रति अनुराग होना चाहिए। किसी भी विभाग द्वारा काम में की गई देरी को सीधा लापरवाही माना जाएगा। जनसम्पर्क विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करें ताकि कांवरियों को यह पता रहे कि उन्हें कहाँ और कैसे सहायता मिल सकती है।
इस बार मेले में तकनीक का भी सहारा लिया जाएगा। कतार की लंबाई और प्रतीक्षा समय की जानकारी डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड्स के जरिए दी जाएगी। सुदिव्य कुमार का यह प्रयास है कि 31 जुलाई से शुरू होने वाला यह मेला अब तक का सबसे व्यवस्थित और श्रद्धालु-मित्र (Devotee Friendly) आयोजन साबित हो। वीआईपी दर्शन पर रोक लगाकर प्रशासन ने सामाजिक न्याय और समानता का जो उदाहरण पेश किया है, उसकी सराहना अभी से होने लगी है। आने वाले कुछ हफ्तों में देवघर की तैयारियों की एक बार फिर जमीनी समीक्षा की जाएगी ताकि अंतिम समय में कोई अड़चन न आए।


