सुल्तानगंज गोलीकांड: छठे दिन भी वेंटिलेटर पर सभापति राजकुमार गुड्डू, शरीर में फंसी गोलियां बनीं डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती

सुल्तानगंज/पटना। भागलपुर जिले के सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में हुए उस खौफनाक गोलीकांड को आज छह दिन बीत चुके हैं, लेकिन मुख्य पार्षद राजकुमार गुड्डू की सेहत को लेकर चिंता की लकीरें अब भी कम नहीं हुई हैं। बिहार की राजधानी पटना के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में भर्ती राजकुमार गुड्डू इस समय अपने जीवन की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं। प्राप्त ताजा मेडिकल अपडेट के अनुसार, उनकी स्थिति अब भी अत्यंत नाजुक (क्रिटिकल) बनी हुई है और वे पूरी तरह से वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। हमले के दौरान उनके शरीर के भीतर धंसी दो गोलियां अब भी बाहर नहीं निकाली जा सकी हैं, जो उनके रिकवरी मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बनकर खड़ी हैं। डॉक्टरों की एक विशेष टीम चौबीसों घंटे उनकी निगरानी कर रही है, लेकिन शारीरिक मानकों में आने वाले उतार-चढ़ाव के कारण सर्जरी की दिशा में कदम बढ़ाना फिलहाल संभव नहीं हो पा रहा है। इस खबर ने सुल्तानगंज के आम नागरिकों और उनके समर्थकों के बीच बेचैनी बढ़ा दी है, जो पिछले एक हफ्ते से उनकी सलामती की दुआ मांग रहे हैं।

सर्जरी में बाधा: अस्थिर ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन लेवल

​पटना के अस्पताल से मिल रही जानकारी के अनुसार, राजकुमार गुड्डू के शरीर में गोलियों की मौजूदगी संक्रमण और आंतरिक रक्तस्राव का बड़ा खतरा पैदा कर रही है। हालांकि, उन्हें निकालने के लिए की जाने वाली सर्जरी एक जटिल प्रक्रिया है, जिसके लिए मरीज का शारीरिक रूप से स्थिर होना अनिवार्य है। पार्षद प्रतिनिधि सुभाष पोद्दार, जो लगातार अस्पताल में मौजूद रहकर स्थिति पर नजर रख रहे हैं, उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने फिलहाल ऑपरेशन टाल दिया है।

​इसका मुख्य कारण राजकुमार गुड्डू का ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन स्तर है, जो लगातार अस्थिर बना हुआ है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में मरीज को जनरल एनेस्थीसिया (बेहोशी की दवा) देना या उनके शरीर पर चीरा लगाना अत्यंत जोखिम भरा हो सकता है। जब तक हृदय की गति और फेफड़ों का ऑक्सीजन संतृप्ति (Saturation) एक निश्चित सुरक्षित स्तर पर स्थिर नहीं हो जाता, तब तक किसी भी बड़ी शल्य चिकित्सा (सर्जरी) की अनुमति नहीं दी जा सकती। डॉक्टर इस समय पूरी तरह से उनके ‘विटल्स’ को सामान्य करने की कोशिश में जुटे हैं ताकि जल्द से जल्द गोलियों को शरीर से अलग किया जा सके।

आईसीयू के भीतर का संघर्ष और वेंटिलेटर सपोर्ट

​राजकुमार गुड्डू वर्तमान में अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (ICU) में भर्ती हैं, जहाँ उन्हें ‘लाइफ सपोर्ट’ यानी वेंटिलेटर पर रखा गया है। उनके फेफड़े स्वयं सांस लेने में असमर्थ हैं, इसलिए मशीन के जरिए उन्हें कृत्रिम रूप से प्राणवायु प्रदान की जा रही है। इलाज की प्रक्रिया में उन्हें लगातार खून भी चढ़ाया जा रहा है क्योंकि हमले के बाद से उनके शरीर में काफी रक्त की कमी हो गई थी।

​अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि गोली के कारण शरीर के अंदरूनी अंगों को कितनी क्षति पहुँची है, इसका वास्तविक आकलन सर्जरी के बाद ही हो पाएगा। फिलहाल, डॉक्टरों की प्राथमिकता उनके महत्वपूर्ण अंगों (हृदय, गुर्दे और मस्तिष्क) को सुरक्षित रखना है। उन्हें उच्च श्रेणी की एंटीबायोटिक्स और जीवन रक्षक दवाएं दी जा रही हैं ताकि गोलियों के कारण शरीर में जहर न फैले। अस्पताल के गलियारे में सन्नाटा पसरा है और केवल मशीनों की बीप की आवाजें ही उस संघर्ष की गवाह हैं जो राजकुमार गुड्डू के भीतर चल रहा है।

परिजनों का इंतजार और अस्पताल की पाबंदियां

​अस्पताल प्रबंधन ने संक्रमण के खतरे और मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए मिलने-जुलने पर सख्त पाबंदियां लगा रखी हैं। सुभाष पोद्दार के अनुसार, परिजनों को दिन में केवल दो बार—सुबह और शाम—राजकुमार गुड्डू से मिलने या उन्हें देखने की इजाजत दी जा रही है। यह मुलाकात भी केवल कुछ ही मिनटों की होती है, जिसमें परिजन केवल कांच के पीछे से या आईसीयू के तय प्रोटोकॉल के तहत उन्हें देख पाते हैं।

​अस्पताल पहुँचने वाले शुभचिंतकों और समर्थकों को केवल बाहर से ही जानकारी लेकर लौटना पड़ रहा है। पटना पहुँचे उनके परिवार के सदस्य गहरी मानसिक वेदना से गुजर रहे हैं। हर बार जब डॉक्टर आईसीयू से बाहर आते हैं, तो सबकी निगाहें केवल एक ही सवाल पूछती हैं—क्या अब ऑपरेशन की स्थिति बन गई है? लेकिन हर बार ‘धैर्य रखने’ की सलाह ही मिल रही है। परिवार के लिए ये छह दिन किसी युग से कम नहीं रहे हैं, जहाँ उम्मीद और डर के बीच हर पल का संघर्ष है।

सुल्तानगंज में पसरा सन्नाटा और चौराहों पर चर्चा

​उधर सुल्तानगंज में, जहाँ राजकुमार गुड्डू की राजनैतिक कर्मभूमि है, वहां की फिजा में भी मायूसी छाई हुई है। नगर परिषद कार्यालय, जो कभी शहर की विकास योजनाओं का केंद्र हुआ करता था, वहां सन्नाटा पसरा है। मंगलवार को हुई उस वारदात को लोग भूल नहीं पा रहे हैं जब अपराधियों ने कार्यालय के भीतर घुसकर दुस्साहस का परिचय दिया था।

​शहर के हर चौक-चौराहे पर केवल उनके स्वास्थ्य की ही चर्चा हो रही है। लोग राजकुमार गुड्डू के मिलनसार स्वभाव और आम जनता के लिए उनकी उपलब्धता को याद कर रहे हैं। कई स्थानीय मंदिरों में उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए महामृत्युंजय जाप और विशेष पूजा-अर्चना का दौर जारी है। लोगों का कहना है कि सुल्तानगंज ने एक समर्पित जनप्रतिनिधि चुना था और अब वे उन्हें किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहते। स्थानीय लोगों में अपराधियों के प्रति भारी आक्रोश है, लेकिन फिलहाल सबकी प्राथमिकता केवल उनके सभापति की सलामती है।

मेडिकल बुलेटिन और भविष्य की संभावनाएं

​डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही राजकुमार गुड्डू का शरीर ऑपरेशन के अनुकूल स्थिति में आएगा, बिना एक पल गंवाए सर्जरी शुरू कर दी जाएगी। शरीर के किस हिस्से में गोलियां फंसी हैं, यह बात काफी संवेदनशील है, क्योंकि उन्हें निकालने की प्रक्रिया में नसों या धमनियों को नुकसान पहुँचने का खतरा रहता है।

​आगामी 24 से 48 घंटे उनकी सेहत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं। चिकित्सा टीम का लक्ष्य है कि दवाओं के जरिए पहले इन्फेक्शन को कंट्रोल किया जाए और फिर ब्लड प्रेशर को एक स्थिर मानक पर लाया जाए। भागलपुर और पटना की जनता इस समय सांसें थामकर अगले मेडिकल बुलेटिन का इंतजार कर रही है। सुल्तानगंज के इस जनप्रतिनिधि के जीवन के लिए चल रहा यह संघर्ष अब एक सामूहिक प्रार्थना का रूप ले चुका है। प्रशासन की ओर से भी अस्पताल प्रबंधन के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया है ताकि किसी भी अतिरिक्त चिकित्सकीय संसाधन की आवश्यकता पड़ने पर उसे तुरंत उपलब्ध कराया जा सके।

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