
पटना, 02 मई। बिहार की धरती पर बनी हिंदी फिल्म ‘सरकारी मीडियम’ की शूटिंग सफलतापूर्वक पूरी हो गई है। इस फिल्म की खासियत यह है कि इसमें न सिर्फ बिहार की वास्तविक लोकेशन दिखाई देगी, बल्कि राज्य के स्थानीय कलाकारों को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है। फिल्म की अंतिम शूटिंग पूर्वी चम्पारण जिले के मोतिहारी स्थित महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी और चन्द्रहिया के आसपास के गांवों में संपन्न हुई।
यह फिल्म 17 अप्रैल से 1 मई तक पूर्वी चम्पारण के विभिन्न स्थानों पर शूट की गई। अब इसके पोस्ट-प्रोडक्शन का कार्य अगले महीने से शुरू होगा और उम्मीद है कि इसी वर्ष यह फिल्म सिनेमाघरों में दर्शकों के बीच पहुंचेगी।
सामाजिक सरोकार पर आधारित है फिल्म
फिल्म के अभिनेता कुमार कन्हैया सिंह ने बताया कि ‘सरकारी मीडियम’ एक सामाजिक सरोकार से जुड़ी फिल्म है, जो समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाती है। उन्होंने कहा कि इस तरह की फिल्मों में काम करना उनके लिए संतोषजनक अनुभव होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में शूटिंग का अनुभव बेहद सकारात्मक रहा और यहां के माहौल, सहयोग और संसाधनों ने उन्हें काफी प्रभावित किया। अभिनेता ने संकेत दिया कि वे भविष्य में भी बिहार में फिल्म निर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करना चाहते हैं और इसके लिए कई निर्माताओं से बातचीत चल रही है।
स्थानीय कलाकारों को मिला अवसर
इस फिल्म में बिहार के कई प्रतिभाशाली कलाकारों को अभिनय का मौका मिला है। मुख्य भूमिकाओं में कुमार कन्हैया सिंह, डॉ. तृष्या श्री, प्रिंस गुप्ता, आयुष पाण्डेय, कमल घिमेरे, रविकांत, गौतम गुलाल और सुकन्या पंडित नजर आएंगे।
स्थानीय कलाकारों की भागीदारी न केवल फिल्म को वास्तविकता के करीब लाती है, बल्कि राज्य की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का भी माध्यम बनती है।
बिहार में फिल्म निर्माण को मिल रहा बढ़ावा
बिहार सरकार द्वारा फिल्म निर्माताओं के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे शूटिंग की अनुमति लेना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। अब फिल्म निर्माताओं को अलग-अलग विभागों में आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है।
इसके अलावा, बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम द्वारा स्थानीय कलाकारों और तकनीकी सहयोगियों (वेंडर्स) का एक डेटाबेस भी तैयार किया जा रहा है। इससे फिल्म निर्माताओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। इच्छुक कलाकार और वेंडर इस पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
प्रशासन और विभागों का मिला सहयोग
फिल्म के निर्देशक राज सागर ने बताया कि शूटिंग तय समय सीमा के भीतर पूरी कर ली गई और इस दौरान किसी प्रकार की बाधा नहीं आई। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, कला एवं संस्कृति विभाग और फिल्म विकास निगम का भरपूर सहयोग मिला, जिससे काम सुचारू रूप से संपन्न हो सका।
राज सागर, जो मूल रूप से मोतिहारी के निवासी हैं, पिछले एक दशक से मुंबई फिल्म उद्योग में सक्रिय हैं। उन्होंने कई वीडियो एलबम और शॉर्ट फिल्मों का निर्देशन किया है और अब अपनी इस फिल्म के माध्यम से बिहार की कहानियों को बड़े पर्दे पर लाने का प्रयास किया है।
बिहार की विविधता बनी आकर्षण का केंद्र
निर्देशक ने यह भी कहा कि बिहार की सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता फिल्म निर्माण के लिए बेहद अनुकूल है। यहां के गांव, शहर, ऐतिहासिक स्थल और प्राकृतिक दृश्य किसी भी कहानी को जीवंत बनाने की क्षमता रखते हैं।
उनका मानना है कि यदि इसी तरह सहयोग मिलता रहा, तो आने वाले समय में बिहार फिल्म निर्माण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
तकनीकी टीम ने निभाई अहम भूमिका
फिल्म के निर्माण में तकनीकी टीम का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आर्ट डायरेक्टर सह लाइन प्रोडक्शन रामू राय, एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर एवं क्रिएटिव डायरेक्टर अनिल कमल चौहान, डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी नरेश चंद्र, सह निर्देशक सुभाष कुमार और प्रोडक्शन हेड अंकित कुमार राजेश ने फिल्म को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
फिल्म ‘सरकारी मीडियम’ न केवल एक मनोरंजक कहानी लेकर आ रही है, बल्कि यह बिहार की प्रतिभा, संस्कृति और संभावनाओं को भी उजागर करेगी। इस फिल्म के जरिए यह संदेश भी जाता है कि यदि सही दिशा और सहयोग मिले, तो क्षेत्रीय प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।
अब दर्शकों को इस फिल्म के रिलीज होने का इंतजार है, जो न केवल एक कहानी सुनाएगी, बल्कि बिहार की मिट्टी की खुशबू भी बड़े पर्दे पर लेकर आएगी।


