
पटना, 2 मई 2026। बिहार में जनगणना 2027 की प्रक्रिया ने अब रफ्तार पकड़ ली है। राजधानी पटना में इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य की औपचारिक शुरुआत जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस. एम. द्वारा की गई। शनिवार को उन्होंने दानापुर के रामजीचक (दीघा) इलाके में स्वयं घर-घर जाकर सर्वे की शुरुआत की, जिससे इस अभियान का संदेश आम जनता तक सीधे पहुंच सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह सर्वे 2 मई से 31 मई तक चलेगा, जिसके तहत जिले के हर घर तक पहुंचकर विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी।
जनगणना के पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करने और उनकी गणना का कार्य किया जा रहा है। यह प्रक्रिया भविष्य में होने वाली विस्तृत जनसंख्या गणना के लिए आधार तैयार करेगी। इस अवसर पर आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में डीडीसी श्रीकांत कुंडलिक खांडेकर, एसडीओ अनिरुद्ध पांडेय, बीडीओ आलोक कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर इस अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया।
जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस. एम. ने जनगणना के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि देश की विकास योजनाओं का आधार है। उन्होंने कहा कि सरकार की हर बड़ी योजना—चाहे वह शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार या बुनियादी ढांचा हो—इन आंकड़ों पर ही आधारित होती है। इसलिए यह जरूरी है कि हर नागरिक इस प्रक्रिया में सहयोग करे और सही जानकारी उपलब्ध कराए।
पटना जिले में इस विशाल अभियान को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारी की है। पूरे जिले को दो प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित किया गया है, ताकि कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके। पटना नगर निगम क्षेत्र की जिम्मेदारी नगर आयुक्त को दी गई है, जबकि शेष ग्रामीण और अन्य शहरी क्षेत्रों का दायित्व स्वयं जिलाधिकारी ‘प्रधान जनगणना अधिकारी’ के रूप में संभाल रहे हैं। इसके तहत कुल 40 चार्ज बनाए गए हैं, जिनके माध्यम से सर्वेक्षण कार्य को व्यवस्थित किया गया है।
जनगणना के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा भी तैयार किया गया है। जिले में कुल 8,114 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB) बनाए गए हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी घर सर्वे से छूट न जाए। इसके अलावा 7,963 प्रगणकों की तैनाती की गई है, जो घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे। इन प्रगणकों के कार्य की निगरानी के लिए 1,343 पर्यवेक्षक भी नियुक्त किए गए हैं, ताकि डेटा की गुणवत्ता और सटीकता बनी रहे।
इस बार की जनगणना को खास बनाने वाली बात इसका डिजिटल स्वरूप है। प्रशासन के अनुसार, ‘जनगणना 2027’ देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। इसमें आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे डेटा संग्रहण, प्रोसेसिंग और विश्लेषण अधिक तेज और पारदर्शी हो सकेगा। प्रगणक अब पारंपरिक कागजी फॉर्म की जगह डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे त्रुटियों की संभावना भी कम हो जाएगी।
डिजिटल प्रणाली के माध्यम से एकत्र किया गया डेटा तुरंत केंद्रीय सर्वर पर अपलोड किया जाएगा, जिससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। इससे प्रशासन को यह भी पता चलता रहेगा कि किस क्षेत्र में काम तेजी से हो रहा है और कहां सुधार की जरूरत है। यह पहल देश को डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
हालांकि, प्रशासन के सामने कई चुनौतियां भी हैं। इतने बड़े स्तर पर सर्वे करना और हर घर तक पहुंचना आसान नहीं है। खासकर शहरी क्षेत्रों में लोगों की अनुपस्थिति, समय की कमी और जागरूकता की कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच और संचार की चुनौतियां भी हैं। लेकिन प्रशासन ने इन सभी मुद्दों से निपटने के लिए पहले से ही रणनीति तैयार की है।
जिलाधिकारी ने आम जनता से अपील की है कि जब प्रगणक उनके घर आएं तो उन्हें सही और पूरी जानकारी दें। उन्होंने यह भी कहा कि यह जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और इसका उपयोग केवल सरकारी योजनाओं और नीतियों के निर्माण में किया जाता है। इसलिए लोगों को किसी भी प्रकार की आशंका नहीं रखनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना किसी भी देश के लिए एक महत्वपूर्ण अभ्यास होता है। इससे न केवल वर्तमान स्थिति का आकलन होता है, बल्कि भविष्य की योजनाओं की दिशा भी तय होती है। बिहार जैसे राज्य के लिए यह और भी महत्वपूर्ण है, जहां विकास की गति को और तेज करने की जरूरत है।
पटना में शुरू हुआ यह अभियान आने वाले दिनों में पूरे राज्य में व्यापक रूप से संचालित होगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि तय समय सीमा के भीतर सभी घरों का सर्वे पूरा कर लिया जाए। इसके लिए लगातार निगरानी और समीक्षा की जा रही है।
कुल मिलाकर, जनगणना 2027 की शुरुआत पटना में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। यह न केवल प्रशासन की तैयारियों को दर्शाता है, बल्कि डिजिटल भारत की दिशा में भी एक बड़ा संकेत है। आने वाले समय में इस प्रक्रिया से प्राप्त आंकड़े राज्य और देश के विकास की नई दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।


