भागलपुर में इंटरनेशनल डांस डे का भव्य आयोजन, बच्चों की प्रस्तुतियों ने मोहा मन

भागलपुर: कला और संस्कृति के रंगों से सजा एक यादगार आयोजन भागलपुर में देखने को मिला, जहां इंटरनेशनल डांस डे के अवसर पर आरटी फॉर्म डांस स्टूडियो में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए दर्शकों का दिल जीत लिया। पूरे आयोजन के दौरान उत्साह, उमंग और रचनात्मकता का अनोखा संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम में शहर के प्रसिद्ध कथक गुरु निभाष मोदी, स्टूडियो की संचालिका अन्वेशा चटर्जी, प्रशिक्षक अमर और अंजलि समेत कई कलाकार और अभिभावक मौजूद रहे। बच्चों की प्रस्तुतियों ने यह साबित कर दिया कि भागलपुर में कला की प्रतिभा किसी भी स्तर पर कम नहीं है।

गणेश वंदना से हुई कार्यक्रम की शुरुआत

इस सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक गणेश वंदना से की गई, जिसने पूरे माहौल को भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। छोटे-छोटे बच्चों ने बेहद सुंदर अंदाज में प्रस्तुति दी, जिसे देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।

गणेश वंदना के बाद एक के बाद एक रंगारंग प्रस्तुतियां हुईं, जिनमें शास्त्रीय, लोक और आधुनिक नृत्य शैलियों का समावेश देखने को मिला। हर प्रस्तुति में बच्चों की मेहनत और प्रशिक्षण साफ नजर आ रहा था।

बच्चों की प्रस्तुतियों ने बटोरी तालियां

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने अलग-अलग थीम पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किए। किसी ने कथक की भाव-भंगिमाओं से प्रभावित किया, तो किसी ने फ्यूजन और वेस्टर्न डांस से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

कुमार नितेश, काव्या, खुशी, राम्या, अव्या, प्रिशा, जैवी, माहम, मायशा और जहान्वी जैसे प्रतिभाशाली बच्चों ने अपनी प्रस्तुति से मंच को जीवंत बना दिया। हर प्रस्तुति के बाद तालियों की गूंज पूरे परिसर में सुनाई देती रही।

केक कटिंग और मिठाई वितरण से बढ़ा उत्साह

कार्यक्रम के दौरान इंटरनेशनल डांस डे के अवसर पर केक काटकर इस खास दिन को सेलिब्रेट किया गया। इसके बाद सभी उपस्थित लोगों के बीच मिठाई बांटी गई। इस मौके पर बच्चों के चेहरे पर खास खुशी और उत्साह देखने को मिला।

केक कटिंग समारोह में संचालिका अन्वेशा चटर्जी, प्रशिक्षक अमर और अंजलि के साथ कथक गुरु निभाष मोदी भी शामिल हुए। यह पल कार्यक्रम के सबसे खास और यादगार क्षणों में से एक रहा।

नृत्य के महत्व पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

कार्यक्रम के दौरान कथक गुरु निभाष मोदी ने नृत्य के महत्व पर विस्तार से अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने यह भी बताया कि नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारी सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण जरिया है। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि नृत्य के माध्यम से वे न केवल अपनी प्रतिभा को निखार सकते हैं, बल्कि अपने व्यक्तित्व का भी विकास कर सकते हैं।

डिजिटल युग में कला से जुड़ने की जरूरत

कार्यक्रम में यह बात भी सामने आई कि आज के दौर में बच्चे मोबाइल और डिजिटल दुनिया में ज्यादा समय बिता रहे हैं, जिससे उनकी रचनात्मकता प्रभावित हो रही है। ऐसे में नृत्य जैसी कला से जुड़ना बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नृत्य बच्चों के लिए शारीरिक और मानसिक दोनों ही रूप से फायदेमंद होता है। इससे उनकी फिटनेस बेहतर होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और पढ़ाई में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

ग्रुप परफॉर्मेंस ने बनाया खास माहौल

कार्यक्रम के दौरान कई ग्रुप परफॉर्मेंस भी प्रस्तुत किए गए, जिनमें बच्चों की तालमेल और टीमवर्क देखने लायक था। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया और माहौल को और भी उत्साहपूर्ण बना दिया।

हर प्रस्तुति में बच्चों का आत्मविश्वास और मंच पर पकड़ साफ नजर आ रही थी, जो उनके प्रशिक्षण और मेहनत का परिणाम था।

“हम होंगे कामयाब” के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम का समापन एक प्रेरणादायक अंदाज में किया गया। सभी कलाकारों और आयोजकों ने मिलकर “हम होंगे कामयाब” गीत गाया, जिसने पूरे माहौल को भावुक और प्रेरणादायक बना दिया।

इस गीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, लेकिन बच्चों और दर्शकों के मन में इसकी यादें लंबे समय तक बनी रहेंगी।

भागलपुर में कला के लिए सकारात्मक संकेत

इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि भागलपुर में कला और संस्कृति के क्षेत्र में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। ऐसे मंच बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने और आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं।

स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन नियमित रूप से होना चाहिए, ताकि बच्चों को अपनी कला को निखारने का मौका मिलता रहे।

कुल मिलाकर, इंटरनेशनल डांस डे के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल मनोरंजन से भरपूर रहा, बल्कि इसने बच्चों और अभिभावकों को कला के महत्व का संदेश भी दिया। यह आयोजन आने वाले समय में और बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रेरणा बन सकता है।

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