
भागलपुर, 29 अप्रैल 2026। बिहार के भागलपुर में हुए चर्चित हत्याकांड और उसके बाद पुलिस द्वारा की गई मुठभेड़ ने पूरे राज्य की सियासत को गर्मा दिया है। सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार की दिनदहाड़े हत्या के बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए मुख्य आरोपी को एनकाउंटर में ढेर कर दिया, जिसके बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर निशाना साधा और पुलिस कार्रवाई की खुलकर सराहना की।
दिनदहाड़े हुई थी हत्या
यह घटना मंगलवार शाम उस समय हुई, जब सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार अपने कार्यालय में मौजूद थे। इसी दौरान हथियारबंद अपराधियों ने कार्यालय परिसर में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग कर दी।
इस हमले में कृष्ण भूषण कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि नगर परिषद के सभापति राज कुमार उर्फ गुड्डू घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप फैल गया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
घटना के तुरंत बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए मुख्य आरोपी रामधनी यादव की तलाश शुरू की। कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें रामधनी यादव मारा गया।
बताया जा रहा है कि आरोपी का स्थानीय राजनीति से भी जुड़ाव था, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया।
पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की जहां कई लोग सराहना कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे लेकर सवाल भी उठा रहे हैं।
मांझी का तीखा बयान
इस पूरे मामले पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष पर जोरदार हमला बोला।
उन्होंने कहा कि “यह नया बिहार है, यहां गोली का जवाब तोप से दिया जाएगा।”
मांझी ने अपने बयान में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर भी तंज कसते हुए कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था को लेकर बेवजह सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर अपराधियों को करारा जवाब दिया है।
उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है और इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
सरकार का रुख और सहायता की घोषणा
इस घटना के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा शोक व्यक्त किया और मृतक अधिकारी के परिजनों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि कृष्ण भूषण कुमार का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है और सरकार उनके परिवार के साथ खड़ी है।
विपक्ष का हमला
वहीं दूसरी ओर, इस घटना को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
राजद नेताओं का कहना है कि यह घटना राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकारी अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा पर सवाल उठना लाजिमी है।
राजद ने यह भी कहा कि अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे खुलेआम दिनदहाड़े हत्या जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।
कानून व्यवस्था पर बहस तेज
भागलपुर की इस घटना ने बिहार में कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।
एक पक्ष पुलिस की त्वरित कार्रवाई को ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का उदाहरण बता रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे प्रशासनिक विफलता का परिणाम मान रहा है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मुद्दा अब राज्य की सियासत का केंद्र बन गया है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं में केवल त्वरित कार्रवाई ही नहीं, बल्कि अपराध के मूल कारणों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
सख्त कानून, बेहतर पुलिसिंग और सामाजिक जागरूकता के जरिए ही इस तरह की घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
भागलपुर में हुई इस घटना ने न सिर्फ एक अधिकारी की जान ली, बल्कि पूरे राज्य में कानून व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस की कार्रवाई, सरकार की प्रतिक्रिया और विपक्ष के आरोप—इन सबके बीच यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई से ही यह साफ हो पाएगा कि इस पूरे मामले की असली तस्वीर क्या है, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि यह घटना बिहार की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गई है।


