
पटना। राजधानी पटना से सटे दानापुर इलाके में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पुलिस व्यवस्था और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शाहपुर थाना क्षेत्र के मठियापुर में मंगलवार को डायल 112 की गश्ती गाड़ी ने एक छोटे स्कूली छात्र को टक्कर मार दी और चालक मौके से फरार हो गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया, जबकि घायल बच्चे को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घायल छात्र की पहचान हिमांशु कुमार के रूप में हुई है, जो मठियापुर निवासी सत्येंद्र कुमार का पुत्र है। वह ताराचक स्थित ओमेगा मिशन स्कूल में कक्षा एक का छात्र है। घटना उस समय हुई जब स्कूल की छुट्टी के बाद वह पैदल अपने घर लौट रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के मुताबिक, जैसे ही हिमांशु मठियापुर ठाकुर मोड़ के पास पहुंचा, उसी समय डायल 112 की तेज रफ्तार गाड़ी ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि बच्चा सड़क पर गिरकर घायल हो गया। घटना के तुरंत बाद वहां मौजूद लोग दौड़कर पहुंचे, लेकिन तब तक वाहन चालक मौके से भाग चुका था।
घायल छात्र के चाचा पप्पू यादव ने बताया कि हादसे के बाद चालक ने मानवीय संवेदना दिखाने के बजाय मौके से फरार होना उचित समझा, जो बेहद दुखद और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर इलाज नहीं मिलता, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए घायल छात्र को उठाया और दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। चिकित्सकों के अनुसार, फिलहाल छात्र की स्थिति स्थिर है, लेकिन उसे निगरानी में रखा गया है।
इस घटना के बाद इलाके में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों का कहना है कि डायल 112 सेवा आम जनता की सुरक्षा और सहायता के लिए बनाई गई है, लेकिन यदि वही गाड़ी इस तरह की लापरवाही करती है, तो यह बेहद चिंताजनक है। कई लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए दोषी चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
घटना की सूचना मिलते ही शाहपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। प्रभारी थानाध्यक्ष सुनील कुमार ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए जांच की जा रही है और संबंधित गाड़ी व चालक की पहचान की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि घटना की पूरी तस्वीर सामने आ सके। साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसे के समय गाड़ी किस ड्यूटी पर थी और चालक की लापरवाही का स्तर क्या था।
यह घटना न केवल एक सड़क दुर्घटना है, बल्कि यह पुलिस की जवाबदेही और संवेदनशीलता से भी जुड़ा मामला बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों को और अधिक सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ चलाया जाना चाहिए, क्योंकि उनसे आम जनता को सुरक्षा की उम्मीद रहती है।
सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करना हर चालक की जिम्मेदारी है, चाहे वह आम नागरिक हो या सरकारी वाहन चला रहा हो। तेज रफ्तार, लापरवाही और मानवीय संवेदनाओं की कमी इस तरह की घटनाओं को जन्म देती है।
प्रशासन के लिए यह जरूरी है कि इस मामले में पारदर्शी जांच हो और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही, डायल 112 जैसी महत्वपूर्ण सेवा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए भी यह आवश्यक है।
अंततः, यह घटना एक चेतावनी है कि सड़क पर जिम्मेदारी और संवेदनशीलता दोनों जरूरी हैं। खासकर जब बात बच्चों की सुरक्षा की हो, तो किसी भी प्रकार की लापरवाही अस्वीकार्य है।
अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है कि दोषी चालक की पहचान कब होती है और उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।


