
पटना। बिहार की राजनीति में महिलाओं के मुद्दे पर जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब पूर्व मंत्री श्रेयसी सिंह ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बयान पर तीखा पलटवार किया है। तेजस्वी द्वारा एनडीए सरकार पर “महिलाओं के साथ विश्वासघात” के आरोप लगाने के बाद श्रेयसी सिंह ने इसे पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है।
सोमवार को जारी अपने बयान में श्रेयसी सिंह ने कहा कि तेजस्वी यादव को महिलाओं की वास्तविक समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है, बल्कि वे इस मुद्दे का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने महिलाओं को सशक्त, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में ऐतिहासिक काम किए हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
श्रेयसी सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार में पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं की स्थिति में जो बदलाव आया है, वह सरकार की नीतियों और योजनाओं का परिणाम है। उन्होंने दावा किया कि आज महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि वे प्रशासन, पुलिस और अन्य क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
तेजस्वी यादव को सीधी चुनौती देते हुए श्रेयसी सिंह ने कहा कि वे एनडीए सरकार पर आरोप लगाने के बजाय अपने शासनकाल के दौरान महिलाओं के लिए किए गए कार्यों का हिसाब दें। उन्होंने कहा कि अगर तेजस्वी सच में महिलाओं के हितैषी हैं, तो उन्हें यह बताना चाहिए कि राजद शासन के दौरान महिलाओं के लिए कौन-सी ठोस योजनाएं लागू की गई थीं।
उन्होंने आगे कहा कि राजद के शासनकाल में बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति काफी खराब थी और महिलाएं असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर थीं। उस समय अपराध और उत्पीड़न की घटनाएं आम थीं, जिससे महिलाओं का बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता था।
श्रेयसी सिंह ने दावा किया कि वर्तमान में स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार के प्रयासों से महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार हुआ है, जिससे वे शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups), कौशल विकास कार्यक्रमों और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली योजनाओं ने महिलाओं को नई पहचान दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार की राजनीति में महिलाओं का वोट बैंक बेहद महत्वपूर्ण है और सभी दल इस पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं। ऐसे में महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर बयानबाजी तेज होना स्वाभाविक है।
श्रेयसी सिंह के इस बयान को भी इसी राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां एक ओर विपक्ष सरकार पर आरोप लगा रहा है, वहीं सत्तापक्ष अपनी उपलब्धियों को सामने रखकर जवाब दे रहा है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को लेकर राजनीति करने के बजाय सभी दलों को मिलकर उनके सशक्तिकरण के लिए काम करना चाहिए। समाज में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।
इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में बहस और तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी बयानबाजी देखने को मिल सकती है, क्योंकि यह विषय सीधे तौर पर बड़ी आबादी को प्रभावित करता है।
अंततः, यह स्पष्ट है कि महिलाओं के मुद्दे पर सियासत अभी और गरमाएगी। एक ओर विपक्ष सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर सत्तापक्ष अपनी उपलब्धियों का हवाला देकर जवाब दे रहा है। अब यह जनता पर निर्भर करेगा कि वह किसके दावों पर विश्वास करती है और किसे सही मानती है।


