
भागलपुर। रेशम नगरी भागलपुर के आसमान और गलियों में एक अदृश्य और घातक खतरे ने दस्तक दी है। बरारी स्थित क्षेत्रीय कुक्कुट केंद्र में पिछले कुछ दिनों से हो रही पक्षियों की संदिग्ध मौत ने अब एक डरावनी हकीकत का रूप ले लिया है। भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान (NIHSAD) की प्रयोगशाला से आई रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि यहाँ के मुर्गे-मुर्गियों में बर्ड फ्लू (H5N1) वायरस फैल चुका है। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही भागलपुर जिला प्रशासन ‘रेड अलर्ट’ मोड में आ गया है। मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 की सुबह से ही प्रशासनिक मशीनरी हरकत में है और गृह मंत्रालय के मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत संक्रमण को रोकने के लिए कड़े और कड़वे कदम उठाए जा रहे हैं। भागलपुर के जिलाधिकारी और संबंधित विभागों ने संयुक्त आदेश जारी कर प्रभावित क्षेत्र की घेराबंदी शुरू कर दी है, जिससे न केवल पोल्ट्री व्यवसायियों में हड़कंप है, बल्कि आम नागरिकों में भी दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है।
बरारी कुक्कुट केंद्र बना ‘हाई रिस्क जोन’: भोपाल लैब की रिपोर्ट से मचा हड़कंप
बरारी का क्षेत्रीय कुक्कुट केंद्र, जो कभी इस क्षेत्र में उन्नत पोल्ट्री पालन का केंद्र था, अब संक्रमण का मुख्य केंद्र (एपिक सेंटर) घोषित कर दिया गया है। पिछले सप्ताह यहाँ अचानक बड़ी संख्या में मुर्गियों की मौत होने लगी थी, जिसके बाद नमूनों को जांच के लिए भोपाल भेजा गया था। सोमवार की देर शाम आई रिपोर्ट ने प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी। रिपोर्ट में वायरस के अत्यंत संक्रामक H5N1 स्ट्रेन की पुष्टि हुई है, जो न केवल पक्षियों के लिए घातक है बल्कि इंसानों में भी फैलने की क्षमता रखता है।
कुक्कुट केंद्र के सहायक निदेशक डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को राजधानी पटना से विशेषज्ञों की एक विशेष टीम भागलपुर पहुँच रही है। यह टीम आधुनिक उपकरणों के साथ पूरे शेड को वैज्ञानिक पद्धति से सैनिटाइज करेगी और पूरे परिसर को आधिकारिक तौर पर ‘हाई रिस्क जोन’ घोषित कर देगी। परिसर के भीतर बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित कर दिया गया है और वहां तैनात कर्मियों को भी सख्त मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत रखा गया है।
एक किलोमीटर का ‘किल जोन’: पक्षियों को मारने और दुकानों को बंद करने का आदेश
संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए प्रशासन ने अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। एपिक सेंटर यानी बरारी कुक्कुट केंद्र से एक किलोमीटर की परिधि को पूरी तरह प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। इस दायरे में आने वाले सभी निजी पोल्ट्री फॉर्म और मुर्गे के मांस की बिक्री करने वाली दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद रखने का निर्देश दिया गया है।
जिला प्रशासन ने आदेश दिया है कि इस एक किलोमीटर के दायरे में जितने भी पालतू पक्षी—चाहे वे मुर्गे-मुर्गियाँ हों या बत्तख—उन्हें वैज्ञानिक तरीके से मार दिया (Culling) जाएगा। इसके लिए रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) का गठन किया गया है। तीन अलग-अलग टीमें नगर निगम के वार्ड संख्या 27, 28 और 29 में घर-घर जाकर पक्षियों की पहचान करेंगी और उन्हें मारकर उनके शवों का सुरक्षित निपटान करेंगी। इस प्रक्रिया के दौरान संक्रमण न फैले, इसके लिए टीम के सभी सदस्यों को पीपीई किट, मास्क और सैनिटाइजर जैसे सुरक्षात्मक प्रबंध पर्याप्त संख्या में उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही, प्रभावित क्षेत्रों में मुर्गियों के लिए इस्तेमाल होने वाले दाने और चारे को भी नष्ट करने का आदेश दिया गया है ताकि संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ा जा सके।
निगरानी का दायरा 10 किमी तक बढ़ा: चेकप्वाइंट और सैंपल कलेक्शन शुरू
बर्ड फ्लू का खतरा केवल एक किलोमीटर तक सीमित नहीं है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर एपिक सेंटर से 10 किलोमीटर के दायरे को ‘सर्वेक्षण क्षेत्र’ (Surveillance Zone) घोषित किया है। इस क्षेत्र में आने वाले सभी चिकन सेंटरों और पोल्ट्री फॉर्मों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। पशुपालन विभाग की टीमें इन इलाकों की दुकानों से पक्षियों के रक्त के नमूने (Blood Samples) लेंगी और उन्हें जांच के लिए लैब भेजेंगी।
दूसरे जिलों और राज्यों से आने वाली मुर्गियों के माध्यम से नए संक्रमण के प्रवेश को रोकने के लिए भागलपुर की सीमाओं पर विशेष चेकप्वाइंट बनाए गए हैं। यहाँ तैनात कर्मियों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी पोल्ट्री वाहन को बिना गहन जांच और स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के जिले के अंदर प्रवेश की अनुमति न दें। इन चेकप्वाइंट्स पर पूरी मुस्तैदी बरती जा रही है ताकि भागलपुर के अन्य हिस्सों को इस महामारी से बचाया जा सके।
प्रशासनिक मुस्तैदी: नियंत्रण कक्ष और जन जागरूकता अभियान
कार्यवाही को सुव्यवस्थित करने के लिए एसडीओ (SDO) कार्यालय और सिटी डीएसपी को निर्देश दिया गया है कि वे एक किलोमीटर की प्रतिबंधित परिधि के ठीक बाहर एक नियंत्रण कक्ष (Control Room) स्थापित करें। यह कंट्रोल रूम 24 घंटे कार्य करेगा और सीलिंग, सैनिटाइजेशन और कलिंग की प्रक्रिया की पल-पल की रिपोर्ट जिला मुख्यालय को भेजेगा।
प्रशासन केवल प्रतिबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए व्यापक अभियान भी शुरू किया गया है। क्षेत्र में माइकिंग के जरिए लोगों को बर्ड फ्लू के लक्षणों और बचाव के तरीकों के बारे में बताया जा रहा है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे संक्रमित क्षेत्र में जाने से बचें और यदि उनके आसपास किसी पक्षी की संदिग्ध मौत होती है, तो इसकी सूचना तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय या नियंत्रण कक्ष को दें। सूचना सामग्री और पोस्टरों का वितरण भी वार्डों में किया जा रहा है ताकि अफवाहों पर लगाम कसी जा सके।
मृत पक्षियों का सुरक्षित निपटान और सैनिटाइजेशन
पक्षियों को मारने के बाद उनके शवों का निपटान सबसे बड़ी चुनौती है। रैपिड रिस्पांस टीम को निर्देश दिया गया है कि मृत पक्षियों को गहरे गड्ढों में चूना और ब्लीचिंग पाउडर के साथ दबाया जाए ताकि वायरस जमीन के अंदर ही समाप्त हो जाए। पूरे प्रभावित एरिया को कीटाणुनाशक रसायनों से सैनिटाइज करने का काम नगर निगम और पशुपालन विभाग की संयुक्त टीमें करेंगी। अभियान में शामिल सदस्यों को एसओपी के अनुरूप सभी आवश्यक सामग्री लेकर ही निकलने का सख्त निर्देश दिया गया है ताकि वे स्वयं संक्रमण की चपेट में न आएं।


