बिहार में 11 सैटेलाइट टाउनशिप: किसानों को 55% विकसित जमीन लौटेगी, सरकार ने तय किए नए नियम

बिहार सरकार ने राज्य में प्रस्तावित 11 सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर बड़ा फैसला लिया है। इस योजना के तहत टाउनशिप क्षेत्र में आने वाले जमीन मालिक किसानों को परियोजना में भागीदार बनाया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी किसान भूमिहीन न हो। सरकार किसानों को उनकी जमीन का 55 प्रतिशत हिस्सा विकसित कर वापस देगी।

नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने सोमवार को सूचना भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि टाउनशिप के लिए खाता-खेसरा सहित प्रारूप अक्टूबर-नवंबर तक प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद आम लोगों और किसानों से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो किसान अपनी जमीन देना नहीं चाहेंगे, उनसे जमीन बाजार दर से चार गुना अधिक कीमत पर खरीदी जाएगी। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा पूरी की जाएगी, जबकि विवादों के निपटारे के लिए ट्रिब्यूनल की व्यवस्था होगी। सभी निर्णय जमीन मालिकों की सहमति से लिए जाएंगे।

टाउनशिप क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री पर फिलहाल लगाई गई अस्थायी रोक को सरकार ने किसानों के हित में बताया है। इससे बिचौलियों द्वारा कम कीमत पर जमीन खरीदने पर रोक लगेगी और किसानों को उनकी जमीन का उचित मूल्य मिल सकेगा। योजना पूरी होने के बाद विकसित बुनियादी ढांचे के साथ किसान अपनी संपत्ति को बेहतर कीमत पर बेच या विकसित कर सकेंगे।

योजना के तहत कुल 22 प्रतिशत क्षेत्र सड़क और बुनियादी ढांचे के लिए निर्धारित किया गया है, जबकि 5 प्रतिशत भूमि पार्क, खेल मैदान, उद्यान, स्कूल, औषधालय और अग्निशमन सेवाओं के लिए आरक्षित होगी। सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के आवास के लिए 3 प्रतिशत भूमि रखी जाएगी। इसके अलावा, 15 प्रतिशत जमीन का उपयोग सड़क, बिजली, ड्रेनेज और सीवर जैसी सुविधाओं के विकास की लागत वसूली के लिए किया जाएगा।

सरकार ने सैटेलाइट टाउनशिप के लिए चिन्हित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री पर अस्थायी रोक भी लगाई है। पटना, सोनपुर, गया, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर में यह रोक 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगी, जबकि मुजफ्फरपुर, छपरा, भागलपुर और सीतामढ़ी में 30 जून 2027 तक प्रभावी रहेगी। हालांकि, प्रारूप पर किसानों की सहमति बनने के बाद इस रोक को हटाया जा सकता है।

सरकार का दावा है कि यह पूरी टाउनशिप योजना पारदर्शी होगी और ड्राफ्ट प्लान से लेकर प्लॉटों के पुनर्गठन तक हर चरण में भू-मालिकों और आम जनता से परामर्श लिया जाएगा।

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