
पटना, 27 अप्रैल। बिहार सरकार के मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए राजस्व संग्रह के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विभाग ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक राजस्व अर्जित करते हुए 101.86 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है। इस उल्लेखनीय सफलता से उत्साहित विभाग ने अब वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
उपमुख्यमंत्री सह विभागीय मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सोमवार को पटना स्थित सूचना भवन के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में विभाग ने 8 हजार 250 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 8 हजार 403 करोड़ 46 लाख रुपये का राजस्व संग्रह किया, जो लक्ष्य का 101.86 प्रतिशत है। उन्होंने इसे विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि मजबूत कार्यप्रणाली, तकनीकी नवाचार, प्रभावी निगरानी और कर्मियों के समर्पित प्रयासों का परिणाम है।
मंत्री ने बताया कि विभाग के राजस्व संग्रह में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2024-25 में विभाग ने 7 हजार 648 करोड़ 88 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया था, जबकि वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 8 हजार 403 करोड़ रुपये से अधिक हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2020-21 में यह आंकड़ा 4 हजार 257 करोड़ रुपये था, जिससे स्पष्ट होता है कि विभाग ने बीते वर्षों में निरंतर प्रगति की है।
भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने “बिहार निबंधन नियमावली 2026” को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस बनाया जाएगा। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद दस्तावेजों को कागज पर तैयार करने की आवश्यकता नहीं होगी और सभी कार्य डिजिटल माध्यम से संपन्न होंगे। इसमें संबंधित पक्षों और अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर होंगे, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल बन सकेगी।
उन्होंने कहा कि विभाग पुराने दस्तावेजों के डिजिटलीकरण पर भी तेजी से काम कर रहा है। वर्ष 1995 से 2026 तक के 2 करोड़ 34 लाख दस्तावेजों को पहले ही डिजिटल किया जा चुका है, जबकि इससे पहले के दस्तावेजों के डिजिटलीकरण का कार्य भी जारी है। इसके पूरा होने के बाद आम लोगों को दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।
मंत्री ने यह भी घोषणा की कि 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को अब संपत्ति निबंधन की सुविधा घर बैठे उपलब्ध कराई जाएगी। इससे बुजुर्गों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और वे आसानी से अपनी संपत्ति का पंजीकरण करा सकेंगे।
पंजीकरण प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए विभाग मोबाइल एप और जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (GIS) तकनीक का उपयोग करेगा। इससे जमीन की सही स्थिति और श्रेणी का निर्धारण सटीक रूप से हो सकेगा तथा मानवीय हस्तक्षेप में कमी आएगी।
प्रेस वार्ता के दौरान विभाग के सचिव अजय यादव ने राज्य में लागू शराबबंदी कानून के तहत की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2016 से अब तक कुल 17 लाख 18 हजार 58 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से 7 लाख 75 हजार 979 लोगों को मद्यनिषेध एवं उत्पाद विभाग ने और 9 लाख 42 हजार 79 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में कुल 11 लाख 37 हजार 731 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 5 लाख 60 हजार 639 मामले विभाग द्वारा और 5 लाख 77 हजार 92 मामले पुलिस द्वारा दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़े राज्य में शराबबंदी कानून के सख्त अनुपालन को दर्शाते हैं।
सचिव ने बताया कि इस अवधि में कुल 4 करोड़ 83 लाख 20 हजार 249 लीटर शराब बरामद की गई है, जिसमें 2 करोड़ 40 लाख 46 हजार 354 लीटर विदेशी शराब और 2 करोड़ 42 लाख 73 हजार 895 लीटर देशी शराब शामिल है। इनमें से लगभग 98 प्रतिशत यानी 4 करोड़ 73 लाख लीटर शराब को नष्ट किया जा चुका है।
राज्य में शराब तस्करी पर रोक लगाने के लिए आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है। जनवरी 2022 से मार्च 2026 तक ड्रोन की मदद से 1 लाख 64 हजार 474 छापेमारियां की गईं, जिनमें 8 हजार 834 मामले दर्ज हुए। इस दौरान 5,090 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 51 लाख 74 हजार 548 लीटर शराब तथा 366 वाहन जब्त किए गए।
इसके अलावा शराब की तस्करी पर नियंत्रण के लिए स्निफर डॉग्स की भी मदद ली जा रही है। कॉल सेंटर के माध्यम से लोगों की शिकायतें भी प्राप्त की जा रही हैं, जहां अब प्रतिदिन 300 से 400 कॉल आ रहे हैं, जो पहले 70 से 80 कॉल हुआ करते थे। इससे स्पष्ट है कि लोगों की जागरूकता और भागीदारी बढ़ी है।
कुल मिलाकर, निबंधन विभाग की यह उपलब्धि राज्य के राजस्व संग्रह में मजबूती का संकेत है, जबकि नई नियमावली और तकनीकी पहल से पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। आने वाले समय में 10 हजार करोड़ रुपये के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विभाग और अधिक प्रभावी रणनीति के साथ आगे बढ़ेगा।


