कटाव की भेंट नहीं चढ़ेगी नवगछिया की धरती: सांसद अजय कुमार मंडल ने संभाला मोर्चा; स्पर 7 से 9 तक के ‘खतरनाक जोन’ का किया स्थलीय निरीक्षण, सुस्ती बरतने वाले अफसरों को कड़ी चेतावनी

नवगछिया (भागलपुर)। मानसून की आहट के साथ ही भागलपुर के नवगछिया अनुमंडल में गंगा और कोसी की लहरों का खौफ गहराने लगता है। कटाव और बाढ़ की विभीषिका झेलने वाले इस क्षेत्र के लिए सुरक्षात्मक कार्यों की अहमियत किसी जीवनदान से कम नहीं है। इसी गंभीरता को देखते हुए भागलपुर सांसद अजय कुमार मंडल ने सोमवार, 27 अप्रैल 2026 को बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल नवगछिया के अंतर्गत चल रहे बाढ़ कटाव निरोधक कार्यों का सघन निरीक्षण किया। गंगा की उफनती लहरों से उपजाऊ जमीन और रिहायशी इलाकों को बचाने के लिए करोड़ों की लागत से हो रहे इन कार्यों की जमीनी हकीकत परखने के लिए सांसद स्वयं धूप में तटबंधों पर उतरे। उन्होंने स्पर 7 से लेकर काजिकोरिया-राघोपुर सीमांत बांध तक के एक-एक हिस्से का बारीकी से मुआयना किया। निरीक्षण के दौरान सांसद का तेवर काफी सख्त नजर आया; उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जनहित के इन कार्यों में न तो गुणवत्ता से समझौता होगा और न ही समय-सीमा में कोई ढिलाई बर्दाश्त की जाएगी।

इस्माइलपुर-बिंदटोली तटबंध: ‘सुरक्षा कवच’ की मजबूती पर फोकस

​सांसद अजय कुमार मंडल के निरीक्षण का पहला पड़ाव इस्माइलपुर-बिंदटोली तटबंध रहा, जो नवगछिया की सुरक्षा के लिहाज से सबसे संवेदनशील माना जाता है। यहाँ गंगा की धारा सीधे तटबंध से टकराती है, जिससे कटाव का खतरा हमेशा बना रहता है। सांसद ने स्पर-7 और स्पर-8 के बीच क्षतिग्रस्त हुए तटबंध के हिस्सों का निरीक्षण किया। उन्होंने देखा कि पिछले वर्ष के दबाव के कारण तटबंध का जो हिस्सा कमजोर हुआ था, उसके संरक्षण के लिए कटाव रोधी कार्य किस गति से चल रहे हैं।

​अजय कुमार मंडल ने तकनीकी टीम को निर्देश दिया कि पत्थरों की स्टैकिंग और जियो बैग्स की फिलिंग में कोई कोताही न बरती जाए। उन्होंने कहा कि गंगा की प्रकृति अस्थिर है, ऐसे में यह मरम्मत कार्य केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर इतना मजबूत होना चाहिए कि वह आने वाले बाढ़ के दबाव को आसानी से झेल सके। तटबंध के इस हिस्से का संरक्षण न केवल इस्माइलपुर बल्कि पूरे नवगछिया शहर की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।

स्पर-8 से 9 के बीच विशेष तकनीकी कार्य: बारीकी से हुई समीक्षा

​निरीक्षण के दूसरे चरण में सांसद ने स्पर-8 और स्पर-9 के बीच चल रहे जटिल तकनीकी कार्यों का जायजा लिया। यहाँ सहायक अभियंता (AE) की देखरेख में कई महत्वपूर्ण कार्यों का संपादन होना है, जिसकी विस्तृत सूची पर सांसद ने अधिकारियों से चर्चा की। इन कार्यों में शामिल मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:

  • पुनर्विभाजन और सुदृढ़ीकरण: स्पर-8 और स्पर-9 के बीच क्षतिग्रस्त तटबंध के ऊपरी और निचले हिस्सों का पुनर्विभाजन किया जा रहा है, ताकि पानी का दबाव एक जगह केंद्रित न होकर वितरित हो जाए।
  • स्पर-9 का जीर्णोद्धार: सांसद ने विशेष रूप से क्षतिग्रस्त स्पर-9 की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। इसका जीर्णोद्धार और संरक्षण कार्य योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। सांसद ने निर्देश दिया कि स्पर के नोज और मुख्य बॉडी को इतनी मजबूती दी जाए कि वह धारा के प्रवाह को मोड़ सके।
  • नदी तट संरक्षण: क्षतिग्रस्त तटबंध के ऊपरी छोर और पुराने तटबंध के बीच जो गैप बना है, वहां नदी तट संरक्षण कार्य (Bank Protection) को लेकर विशेष निर्देश दिए गए। विभिन्न हिस्सों में हो रही मरम्मत की गुणवत्ता की जांच के लिए उन्होंने मौके पर मौजूद सामग्रियों का भी अवलोकन किया।

काजिकोरिया-राघोपुर सीमांत बांध: गंगा के बाएं किनारे पर मुस्तैदी

​निरीक्षण का तीसरा महत्वपूर्ण हिस्सा गंगा नदी के बाएं किनारे पर स्थित काजिकोरिया-राघोपुर सीमांत बांध रहा। यहाँ नोज-सी, डी-नोज और ई-नोज जैसे संवेदनशील स्ट्रक्चर्स के जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है। महादेवपुर घाट के निचले हिस्से (D/S) में हो रहे कटाव रोधी कार्यों की समीक्षा करते हुए अजय कुमार मंडल ने कहा कि घाट के आसपास की आबादी को सुरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकता है।

​उन्होंने कहा कि महादेवपुर घाट क्षेत्र में कटाव की समस्या पुरानी है, इसलिए यहाँ हो रहे जीर्णोद्धार कार्यों में ‘लॉन्ग टर्म सॉल्युशन’ पर ध्यान दिया जाए। नोज स्ट्रक्चर्स की रिपेयरिंग में तकनीकी मानकों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया, ताकि कटाव की दिशा को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखा जा सके।

अधिकारियों के साथ समीक्षा: “समय सीमा पार हुई तो होगी कार्रवाई”

​तटबंधों पर पैदल मार्च करने के बाद सांसद अजय कुमार मंडल ने बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल नवगछिया के वरीय अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने कार्यों की प्रगति रिपोर्ट देखी और विभिन्न प्रोजेक्ट्स की ‘डेडलाइन’ पूछी। सांसद ने दो टूक शब्दों में कहा कि मानसून आने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, इसलिए “कल का काम आज और आज का काम अभी” के सिद्धांत पर चलना होगा।

​सांसद ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा, “जनता के टैक्स का पैसा कटाव को रोकने के लिए दिया गया है, न कि उसे पानी में बहाने के लिए। यदि किसी भी कार्य में गुणवत्ता की कमी पाई गई या निर्धारित समय के भीतर काम पूरा नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों पर कड़ी कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे समय-समय पर बिना सूचना के दोबारा निरीक्षण करेंगे।

जनहित सर्वोपरि: लापरवाही की कोई जगह नहीं

​निरीक्षण के अंत में मीडिया से बात करते हुए अजय कुमार मंडल ने कहा कि नवगछिया की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहाँ हर साल हजारों एकड़ जमीन गंगा और कोसी में समाहित हो जाती है। किसानों की फसलें बर्बाद होती हैं और लोग बेघर हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में बाढ़ नियंत्रण विभाग की जिम्मेदारी दोगुनी हो जाती है।

​उन्होंने कहा, “जनहित से जुड़े इन कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मैं खुद हर गतिविधि की निगरानी कर रहा हूँ। मेरा लक्ष्य है कि इस साल बरसात के मौसम में नवगछिया का एक भी घर कटाव की वजह से न गिरे और एक भी किसान की जमीन नदी में विलीन न हो।” सांसद के इस सख्त रुख से विभाग के भीतर हड़कंप की स्थिति है और काम में तेजी आने की उम्मीद जगी है।

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