
भागलपुर। सिल्क सिटी भागलपुर में पत्रकारिता की आड़ में वसूली का एक ऐसा खेल सामने आया है जिसने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को शर्मसार कर दिया है। शहर के जोगसर थाना क्षेत्र में ‘माइक और कैमरे’ का खौफ दिखाकर रंगदारी मांगने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 की दोपहर इन कथित पत्रकारों ने एक प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट में घुसकर न केवल हंगामा किया, बल्कि मालिक से प्रति माह एक लाख रुपये की रंगदारी की मांग भी की। हालांकि, इस बार ‘साहब’ का पासा उल्टा पड़ गया। रेस्टोरेंट संचालक की सूझबूझ और पुलिस की तत्परता ने इस फर्जीवाड़े का अंत कर दिया। भागलपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो महिलाओं सहित सात आरोपियों में से पांच को रंगे हाथ दबोच लिया है। शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने इस मामले की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि अब इन ‘आईडी कार्ड’ वालों के संस्थानों की वास्तविकता और इनके क्रेडेंशियल की गहन जांच की जा रही है।
‘रॉयल 2.0’ में हाई वोल्टेज ड्रामा: 3:00 बजे का ‘छापा’
घटना जोगसर थाना क्षेत्र के मुंदीचक निवासी अभिषेक कुमार के रेस्टोरेंट ‘रॉयल 2.0’ की है। अभिषेक के अनुसार, गुरुवार दोपहर करीब 3 बजे पांच पुरुष और दो महिलाएं अचानक उनके रेस्टोरेंट में दाखिल हुए। इनके हाथों में अलग-अलग मीडिया संस्थानों के लोगो वाले माइक थे। रेस्टोरेंट में घुसते ही इन्होंने किसी असली जांच टीम की तरह व्यवहार करना शुरू कर दिया।
आरोपियों ने बिना अनुमति के रेस्टोरेंट की वीडियो फुटेज बनानी शुरू कर दी और संचालक पर आरोप लगाया कि वे अवैध तरीके से कारोबार कर रहे हैं और ‘मोटी कमाई’ कर रहे हैं। धमकाते हुए उन्होंने कहा कि अगर रेस्टोरेंट शांति से चलाना है, तो हर महीने 1 लाख रुपये की रंगदारी देनी होगी। संचालक ने जब इसका विरोध किया, तो वे संचालक का बयान रिकॉर्ड करने लगे और लाइसेंस दिखाने का दबाव बनाने लगे। इतना ही नहीं, वहां खाना खा रहे भाई-बहन को भी डराया गया और उनकी वीडियो बनाकर उन्हें असहज किया गया।
डायल 112 ने बिगाड़ा खेल: “हम तो खाना खाने आए हैं”
जब फर्जी पत्रकारों का दबाव बढ़ने लगा, तो संचालक अभिषेक कुमार ने घबराने के बजाय डायल 112 को कॉल कर पुलिस बुला ली। पुलिस टीम के पहुँचते ही ‘दबंग पत्रकारों’ के तेवर ढीले पड़ गए। पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने तुरंत अपनी कहानी बदल ली और पुलिस को बताने लगे कि वे तो वहां केवल ‘खाना खाने’ आए थे।
हालांकि, मौके पर मौजूद ग्राहकों के बयान और संचालक की शिकायत के बाद जोगसर थानाध्यक्ष मंटू कुमार ने सभी को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने मौके से उन माइक और कैमरों को भी जब्त किया है, जिनका इस्तेमाल डराने के लिए किया जा रहा था। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि ये लोग खुद को बड़े संस्थानों का रिपोर्टर बता रहे थे, लेकिन इनके पास कोई वैध पहचान पत्र या क्रेडेंशियल नहीं था।
31 मार्च को भी की थी वसूली: शातिर गिरोह का पुराना रिकॉर्ड
थाने में हुई पूछताछ के दौरान इस गिरोह के कई और काले कारनामे उजागर हुए हैं। संचालक ने बताया कि यह गिरोह पहले भी सक्रिय रहा है। 31 मार्च को भीखनपुर स्थित एक अन्य रेस्टोरेंट से इन लोगों ने डर दिखाकर 70 हजार रुपये वसूल लिए थे। वहीं, एक अन्य रेस्टोरेंट से भी 50 हजार रुपये की वसूली की बात सामने आ रही है।
एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने बताया, “हमें पहले भी इनके बारे में शिकायतें मिली थीं, लेकिन तब ये बच निकलने में कामयाब रहे थे। इस बार संचालक की बहादुरी से ये पकड़े गए हैं। इनके नाम कई अन्य मामलों में भी सामने आ रहे हैं।”
दो महिला समेत सात बने आरोपी: कौन हैं ये ‘रंगदार’?
पुलिस ने संचालक अभिषेक कुमार के लिखित आवेदन पर सात लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपियों की सूची इस प्रकार है:
- गौतम कुमार गजनी: जानकी प्रसाद लेन।
- अरविन्द कुमार: जमालपुर, शाहकुंड।
- अजय कुमार: कोयला घाट।
- संजीव मिश्रा: सबौर।
- मो. शमीदुल्लाह: कजरैली सिमरिया।
- कोमल: (महिला आरोपी)।
- एक अज्ञात महिला।
पुलिस फिलहाल इन पांच पुरुषों को गिरफ्तार कर जेल भेजने की तैयारी कर रही है, जबकि फरार महिला आरोपी की तलाश जारी है।
पत्रकारिता की आड़ में धंधा: समाज के लिए बड़ा खतरा
भागलपुर की यह घटना एक बढ़ती हुई समस्या की ओर इशारा करती है, जहाँ कुछ लोग ‘यूट्यूब’ या ‘पोर्टल’ के नाम पर माइक उठाकर रंगदारी को अपना पेशा बना चुके हैं।
- पहचान का संकट: कोई भी व्यक्ति माइक लेकर खुद को पत्रकार बताकर किसी भी संस्थान में घुस जाता है।
- भय का माहौल: छोटे व्यापारियों को ‘लाइसेंस’ और ‘अनियमितताओं’ के नाम पर डराकर पैसे ऐठना इस गिरोह का मुख्य काम था।
- विश्वसनीयता पर प्रहार: ऐसी घटनाओं से उन ईमानदार पत्रकारों की छवि भी धूमिल होती है जो समाज के मुद्दों को निष्पक्षता से उठाते हैं।
सुशासन का प्रहार और जनता से अपील
अंततः, जोगसर पुलिस की यह कार्रवाई भागलपुर के व्यापारियों के लिए एक बड़ी राहत है। 24 अप्रैल 2026 की यह घटना साबित करती है कि अगर जनता जागरूक हो और पुलिस का साथ दे, तो ऐसे ‘फर्जी’ तत्वों पर लगाम लगाई जा सकती है। एसएसपी ने साफ कर दिया है कि मीडिया के नाम पर किसी को भी ब्लैकमेल करने की छूट नहीं दी जाएगी।
वॉयस ऑफ बिहार (VOB) इस साहस के लिए रेस्टोरेंट संचालक की सराहना करता है। हम शहर के अन्य व्यापारियों से भी अपील करते हैं कि यदि कोई भी व्यक्ति माइक या आईडी कार्ड दिखाकर आपसे अवैध मांग करता है, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। पत्रकारिता सूचना देने का माध्यम है, डराने का हथियार नहीं।


