​रेल पटरियों की सेहत सुधारेगा मालदा मंडल: बरहरवा और साहिबगंज पैसेंजर ट्रेनों के समय में बदलाव; 31 मई तक गुरुवार और रविवार को रहेगा ‘ब्लॉक’

मालदा/कोलकाता। भारतीय रेलवे के मालदा रेल मंडल अंतर्गत रेल यात्रा करने वाले दैनिक यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी सूचना सामने आई है। रेल पटरियों के सुरक्षित और सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए पूर्व रेलवे (Eastern Railway) ने मालदा मंडल के बल्लालपुर – न्यू फरक्का अप लाइन (Ballalpur – New Farakka UP line) पर विशेष ‘ट्रैक मेंटेनेंस’ (Track Maintenance) कार्य करने का निर्णय लिया है। मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को कोलकाता स्थित मुख्य जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति (संख्या: 2026/04/67) के अनुसार, इस मरम्मत कार्य के कारण आगामी 31 मई 2026 तक सप्ताह के दो महत्वपूर्ण दिनों—गुरुवार और रविवार—को ट्रेनों के परिचालन समय में बदलाव किया गया है। पटरियों के रखरखाव के लिए लिए जाने वाले इस ‘ट्रैफिक ब्लॉक’ के कारण अंग क्षेत्र और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों को जोड़ने वाली दो प्रमुख पैसेंजर ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से खुलेंगी। रेलवे का तर्क है कि मानसून की दस्तक से पहले और भीषण गर्मी के दौरान पटरियों की गुणवत्ता की जांच करना यात्रियों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है, भले ही इससे क्षणिक असुविधा हो।

चार घंटे का मेगा ब्लॉक: समय और रूट का विवरण

​रेलवे द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, मालदा मंडल के बल्लालपुर से न्यू फरक्का के बीच ‘अप लाइन’ पर हर गुरुवार और रविवार को चार घंटे का कार्य ब्लॉक लिया जाएगा। यह ब्लॉक दोपहर 13:45 बजे से शाम 17:45 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि के दौरान रेलवे की इंजीनियरिंग टीम अत्याधुनिक मशीनों के जरिए पटरियों की पैकिंग, स्लीपरों की जांच और ‘अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन’ (USFD) जैसे महत्वपूर्ण कार्य करेगी।

​चूंकि यह ब्लॉक मुख्य ‘अप लाइन’ पर लिया जा रहा है, इसलिए उस दिशा से गुजरने वाली ट्रेनों की रफ्तार और समय पर इसका सीधा असर पड़ना तय है। यह व्यवस्था 31 मई 2026 तक लागू रहेगी, जिसका अर्थ है कि यात्रियों को अगले एक महीने से अधिक समय तक इन दो दिनों (गुरुवार और रविवार) को अपनी यात्रा की योजना रेलवे की नई समय सारणी के अनुसार बनानी होगी।

कौन सी ट्रेनें हुईं प्रभावित? जानिए नया समय

​ट्रैक मेंटेनेंस के इस कार्य की वजह से दो सबसे लोकप्रिय लोकल पैसेंजर ट्रेनों के समय में ‘री-शेड्यूलिंग’ (Rescheduling) की गई है। ये दोनों ट्रेनें दैनिक यात्रियों, छोटे व्यापारियों और छात्रों के लिए जीवन रेखा मानी जाती हैं।

  • 53434 बरहरवा – अजीमगंज पैसेंजर: यह ट्रेन ब्लॉक वाले दिनों (गुरुवार और रविवार) को अपने निर्धारित समय से 120 मिनट (2 घंटे) की देरी से रवाना होगी। बरहरवा से अजीमगंज के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को अब दो घंटे अतिरिक्त इंतजार करना होगा।
  • 63422 साहिबगंज – अजीमगंज पैसेंजर: इस ट्रेन के समय में भी बदलाव किया गया है। यह ट्रेन ब्लॉक के दिनों में अपने मूल समय से 60 मिनट (1 घंटे) की देरी से संचालित की जाएगी।

​अजीमगंज जाने वाली इन ट्रेनों के समय में बदलाव से उन यात्रियों को अधिक परेशानी हो सकती है जो आगे की कनेक्टिंग ट्रेनें पकड़ते हैं। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि केवल ब्लॉक के दिनों को छोड़कर अन्य दिनों में ये ट्रेनें अपने नियमित समय पर ही चलेंगी।

ट्रैक मेंटेनेंस: क्यों जरूरी है ‘रेल की पटरियों का इलाज’?

​आम यात्रियों को लग सकता है कि ट्रेनों को रोकना या उनके समय में बदलाव करना परेशानी का सबब है, लेकिन रेल इंजीनियरिंग की दृष्टि से ‘ब्लॉक’ लेना अनिवार्य होता है। 2026 की आधुनिक रेल व्यवस्था में पटरियों पर दबाव बढ़ा है।

  1. गर्मी का प्रभाव: अप्रैल और मई के महीने में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है, जिससे लोहे की पटरियों में ‘बकलिंग’ (टेढ़ापन) आने का खतरा रहता है। ब्लॉक के दौरान पटरियों के तनाव को कम करने का काम किया जाता है।
  2. सुरक्षा सर्वोपरि: बल्लालपुर – न्यू फरक्का खंड पर भारी मालगाड़ियों का भी दबाव रहता है। पटरियों की नियमित जांच से भविष्य में होने वाली रेल दुर्घटनाओं की संभावना शून्य हो जाती है।
  3. स्पीड अपग्रेडेशन: रेलवे का लक्ष्य इस रूट पर ट्रेनों की गति बढ़ाना है, जिसके लिए गिट्टियों (Ballast) की सफाई और स्लीपरों का सुदृढ़ीकरण आवश्यक है।

​रेलवे प्रशासन ने माना है कि सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता, इसलिए यात्रियों से इस तकनीकी कार्य में सहयोग की अपील की गई है।

यात्रियों पर असर: कार्यालय और बाजार जाने वालों की बढ़ी चिंता

​बरहरवा और साहिबगंज से अजीमगंज जाने वाली ये ट्रेनें सुबह और दोपहर के समय में इस क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों की धुरी हैं। गुरुवार को लगने वाले ब्लॉक से उन व्यापारियों पर असर पड़ेगा जो साप्ताहिक हाट या बाजारों में सामान पहुँचाने के लिए इन ट्रेनों का सहारा लेते हैं। वहीं रविवार को होने वाली देरी से उन लोगों को असुविधा होगी जो छुट्टियों में अपने पैतृक गाँवों या रिश्तेदारों के घर जाते हैं।

​स्थानीय यात्रियों का कहना है कि 2 घंटे की देरी से पहुँचना उनके पूरे दिन के कार्यक्रम को बिगाड़ देता है। हालांकि, रेलवे ने सुझाव दिया है कि यात्री ‘नेशनल ट्रेन इन्क्वायरी सिस्टम’ (NTES) और रेलवे के हेल्पलाइन नंबर 139 के माध्यम से अपनी ट्रेन की लाइव स्थिति जांच कर ही घर से निकलें।

मालदा मंडल की आगामी योजनाएं और प्रबंधन

​मालदा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) के मार्गदर्शन में इंजीनियरिंग विभाग इस ब्लॉक को प्रभावी ढंग से संचालित करने की तैयारी कर चुका है। कोशिश यह की जा रही है कि कार्य को निर्धारित 4 घंटों में ही समेटा जाए ताकि ट्रेनों को और अधिक विलंब न करना पड़े। 31 मई तक की यह समय-सीमा मानसून पूर्व तैयारियों का हिस्सा है।

​प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, रेलवे का प्रयास है कि इन छोटे-छोटे ब्लॉक्स के जरिए बड़े सुधार किए जाएं ताकि मानसून के दौरान जलजमाव या पटरियों की धंसाव जैसी गंभीर स्थितियां पैदा न हों। मालदा मंडल ने यह भी संकेत दिया है कि इस मेंटेनेंस के बाद इस खंड पर ट्रेनों की पंचुअलिटी (समयबद्धता) में सुधार होगा।

धैर्य ही एकमात्र समाधान

​21 अप्रैल 2026 को जारी यह आदेश मालदा मंडल के यात्रियों के लिए एक मिश्रित संदेश लेकर आया है। एक ओर जहाँ ट्रेनों की देरी से असुविधा होगी, वहीं दूसरी ओर भविष्य में एक सुरक्षित और तीव्र रेल यात्रा की नींव रखी जा रही है। साहिबगंज और बरहरवा के यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे 31 मई तक गुरुवार और रविवार की अपनी यात्राओं को नई समय सारणी के अनुसार ही नियोजित करें। ‘वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की टीम रेल यात्रियों से अनुरोध करती है कि वे स्टेशनों पर शांति बनाए रखें और रेल कर्मियों के साथ सहयोग करें। रेलवे की यह मरम्मत आपके सुखद और सुरक्षित भविष्य के लिए ही है।

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