​गया के लाल का नेशनल फलक पर धमाका: जेईई मेन में शुभम कुमार बने बिहार टॉपर, देश में हासिल किया छठा स्थान

पटना। इंजीनियरिंग की दुनिया में कदम रखने की चाह रखने वाले लाखों युवाओं के लिए सोमवार की शाम खुशियों और उम्मीदों का पैगाम लेकर आई। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में से एक, जेईई-मेन 2026 के अंतिम परिणाम घोषित कर दिए हैं। इस परिणाम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बिहार की मिट्टी में मेधा की कोई कमी नहीं है। गया के रहने वाले शुभम कुमार ने अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर न केवल बिहार में पहला स्थान प्राप्त किया है, बल्कि पूरे देश में छठा स्थान हासिल कर राज्य का मान बढ़ाया है। शुभम उन 26 चुनिंदा छात्रों में शामिल हैं जिन्होंने ‘परफेक्ट 100 परसेंटाइल’ का जादुई आंकड़ा छुआ है। इस सफलता के साथ ही शुभम ने यह भी साफ कर दिया है कि जब लक्ष्य बड़ा हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो सफलता का रास्ता खुद-ब-खुद बन जाता है।

गया से मुंबई तक का सपना: शुभम की शानदार उड़ान

​शुभम कुमार की यह सफलता अचानक नहीं मिली है। इसकी नींव उन्होंने पहले चरण की परीक्षा में ही रख दी थी। आपको बता दें कि जेईई मेन के पहले सत्र में शुभम देश भर में तीसरे स्थान पर रहे थे और उस समय भी वे बिहार के टॉपर थे। दूसरे सत्र के बाद जब एनटीए ने दोनों चरणों के आधार पर फाइनल मेरिट लिस्ट तैयार की, तो शुभम ने देश में ओवरऑल छठा स्थान (AIR 6) पक्का किया। 100 परसेंटाइल स्कोर करना किसी भी छात्र के लिए एक सपने जैसा होता है, और शुभम ने इस सपने को हकीकत में तब्दील कर दिखाया है।

​अब शुभम का अगला पड़ाव देश का सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी मुंबई है। वे वहां से कंप्यूटर साइंस (CS) में पढ़ाई करना चाहते हैं। कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग का वह क्षेत्र है जहाँ प्रवेश पाना देश के टॉप रैंकर्स के लिए भी एक बड़ी चुनौती होती है, लेकिन शुभम के मौजूदा प्रदर्शन को देखते हुए उनकी यह राह अब काफी आसान नजर आ रही है। गया जैसे ऐतिहासिक शहर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखते हैं।

बिहार की मेधा का दबदबा: 99 परसेंटाइल क्लब में कई छात्र

​जेईई मेन के परिणामों में केवल शुभम ही अकेले चमकता सितारा नहीं हैं, बल्कि बिहार के कई अन्य छात्रों ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में ऐसे छात्र सामने आए हैं जिन्होंने 99 परसेंटाइल से अधिक स्कोर हासिल किया है। पटना, भागलपुर, गया और मुजफ्फरपुर जैसे केंद्रों से छात्रों की सफलता की कहानियां लगातार सामने आ रही हैं।

​एनटीए के आंकड़ों के अनुसार, इस बार बिहार के छात्रों का प्रदर्शन पिछले साल की तुलना में काफी बेहतर रहा है। बड़ी संख्या में छात्रों ने न केवल परीक्षा पास की है, बल्कि वे जेईई एडवांस्ड (JEE Advanced) के लिए भी क्वालीफाई कर चुके हैं। अब इन छात्रों की असली अग्निपरीक्षा आगामी 24 मई को होने वाली जेईई एडवांस्ड परीक्षा में होगी, जो देश के 23 आईआईटी संस्थानों में प्रवेश का एकमात्र रास्ता है। शुभम की सफलता ने बिहार के बाकी छात्रों में भी एक नया जोश भर दिया है।

एनटीए का रिजल्ट कार्ड: ‘परफेक्ट 26’ की कहानी

​राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा जारी आधिकारिक बुलेटिन के मुताबिक, इस साल कुल 26 छात्रों ने 100 परसेंटाइल का स्कोर हासिल किया है। यह आंकड़ा परीक्षा की कठिन प्रकृति और बढ़ते कॉम्पिटिशन को दर्शाता है। दिलचस्प बात यह है कि इन 26 टॉपर्स में से 24 छात्र अनारक्षित (General) श्रेणी से आते हैं, जबकि 2 छात्र अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से हैं।

​एनटीए ने इस बार परिणामों को दो सत्रों के प्रदर्शन के आधार पर संकलित किया है। पहले सत्र (जनवरी) में जहाँ 12 छात्र टॉप स्कोरर रहे थे, वहीं दूसरे सत्र (अप्रैल) में यह संख्या बढ़कर 14 हो गई। शुभम कुमार उन विरले छात्रों में से हैं जिन्होंने दोनों सत्रों में अपनी बादशाहत कायम रखी। एनटीए की रिपोर्ट बताती है कि इस साल लगभग 8 लाख ऐसे छात्र थे जिन्होंने दोनों ही चरणों की परीक्षा दी थी, ताकि वे अपने स्कोर में सुधार कर सकें।

सफलता का गणित: कैसे तैयार हुआ फाइनल स्कोर?

​जेईई मेन की परीक्षा दो अलग-अलग सत्रों में आयोजित की जाती है ताकि छात्रों को अपना प्रदर्शन सुधारने का मौका मिले। एनटीए की कार्यप्रणाली के अनुसार, यदि कोई छात्र दोनों सत्रों में शामिल होता है, तो उसके दोनों में से जो सबसे अच्छा परसेंटाइल होता है, उसे ही फाइनल स्कोर माना जाता है। शुभम कुमार ने पहले चरण में ही 100 परसेंटाइल हासिल कर लिया था, जिसे उन्होंने दूसरे सत्र में भी बरकरार रखा।

​इस बार कुल आवेदकों की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी देखी गई थी, जिससे इस परीक्षा की गंभीरता और बढ़ गई। 100 परसेंटाइल का मतलब है कि उस छात्र ने अपनी शिफ्ट में शामिल सभी छात्रों से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। शुभम कुमार की ऑल इंडिया रैंक 6 इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने न केवल अपनी शिफ्ट में, बल्कि देश भर के टॉपर्स के बीच भी अपनी जगह मजबूती से बनाई है।

इंजीनियरिंग की रेस और बिहार का भविष्य

​बिहार हमेशा से ही प्रतियोगी परीक्षाओं का गढ़ रहा है। यहाँ के छात्रों में गणित और विज्ञान के प्रति एक स्वाभाविक रुझान देखा जाता है। शुभम कुमार की सफलता इसी परंपरा की एक नई कड़ी है। गया जैसे जिले, जो कभी केवल धार्मिक पर्यटन के लिए जाने जाते थे, अब शिक्षा के ‘पावरहाउस’ के रूप में उभर रहे हैं।

​विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार के छात्रों की सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने का जज्बा होता है। शुभम कुमार की उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि यह बिहार के शिक्षा तंत्र के लिए भी एक सुखद संदेश है। जिस तरह से बिहार के छात्र अब राष्ट्रीय स्तर पर सिंगल डिजिट रैंक (AIR 1-10) में जगह बना रहे हैं, वह दिन दूर नहीं जब आईआईटी जैसे संस्थानों में बिहार का प्रतिनिधित्व और भी अधिक बढ़ेगा।

तैयारी और मानसिक दृढ़ता का मेल

​जेईई मेन जैसी परीक्षा केवल किताबी ज्ञान की नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती की भी परीक्षा होती है। शुभम कुमार ने अपनी तैयारी के दौरान जिस निरंतरता का परिचय दिया, वह काबिले तारीफ है। पहले चरण में देशभर में तीसरे स्थान पर रहने के बाद भी उन्होंने अपनी एकाग्रता नहीं खोई। अक्सर छात्र पहले सत्र में अच्छा करने के बाद थोड़ा शिथिल हो जाते हैं, लेकिन शुभम ने दूसरे सत्र में भी वही धार बनाए रखी।

​उनकी सफलता में उनके शिक्षकों और परिजनों का भी बड़ा योगदान रहा है। शुभम की यह जीत उन शिक्षकों की भी जीत है जो बिहार की गलियों में बैठकर ग्लोबल स्तर के इंजीनियर तैयार कर रहे हैं। शुभम ने साबित किया है कि अगर आपके पास प्रतिभा है और आप सही दिशा में प्रयास कर रहे हैं, तो दिल्ली या कोटा जैसे बड़े शहरों में जाना अनिवार्य नहीं है, आप अपने शहर में रहकर भी दुनिया जीत सकते हैं।

अगला लक्ष्य: मिशन आईआईटी एडवांस्ड

​जेईई मेन के नतीजे आने के साथ ही अब सभी सफल छात्रों का ध्यान ‘जेईई एडवांस्ड’ पर टिक गया है। जेईई मेन केवल क्वालीफाइंग राउंड और एनआईटी (NITs) में प्रवेश का जरिया है, जबकि देश के प्रीमियम आईआईटी संस्थानों का रास्ता एडवांस्ड की कठिन परीक्षा से होकर गुजरता है।

​शुभम कुमार अब अपनी पूरी ऊर्जा आईआईटी एडवांस्ड के लिए झोंक रहे हैं। उनका सपना आईआईटी मुंबई में दाखिला लेना है, जो हर इंजीनियरिंग छात्र के लिए ‘स्वर्ग’ माना जाता है। शुभम की वर्तमान रैंकिंग उन्हें एक बड़ा मनोवैज्ञानिक लाभ देगी। बिहार की नजरें अब शुभम पर टिकी हैं कि क्या वे एडवांस्ड में भी इसी तरह का इतिहास दोहरा पाएंगे। फिलहाल, गया से लेकर पटना तक शुभम कुमार की इस जीत का जश्न मनाया जा रहा है और वे हर उस बिहारी युवा के लिए एक रोल मॉडल बन चुके हैं जो विज्ञान और तकनीक की दुनिया में अपना नाम बनाना चाहता है।

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