​भागलपुर में मासूम की हत्या: कूड़े के ठेले में मिला 10 वर्षीय समीर का शव, भारी बवाल

अंग जनपद की धरती सोमवार की सुबह एक ऐसी खबर से दहल उठी जिसने मानवता और संवेदनाओं को शर्मसार कर दिया है। भागलपुर के ललमटिया थाना क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध श्री चंपालपुर दिगंबर जैन मंदिर के पास उस समय कोहराम मच गया, जब नगर निगम के एक कूड़ा ढोने वाले ठेले में 10 वर्षीय मासूम का निर्जीव शरीर बरामद हुआ। यह केवल एक शव नहीं था, बल्कि उस क्रूर मानसिकता का प्रमाण था जिसने एक अबोध बालक की जान लेकर उसे कचरे के ढेर में फेंकना मुनासिब समझा। मृतक की पहचान साहेबगंज कबीरपुर निवासी मोहम्मद इजहार के पुत्र मोहम्मद समीर के रूप में हुई है। इस घटना ने न केवल पुलिसिया गश्त पर सवाल उठाए हैं, बल्कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। जैसे ही कूड़े के ठेले से मासूम का शव मिलने की खबर फैली, हजारों की भीड़ सड़क पर उतर आई। आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिसके बाद स्थिति को संभालने के लिए चार थानों की पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा।

सफाईकर्मियों ने देखा खौफनाक मंजर: कचरे में छिपा था ‘कल’

​घटना की शुरुआत सोमवार की अलसुबह हुई जब नगर निगम के सफाईकर्मी अपनी रोजमर्रा की ड्यूटी के तहत जैन मंदिर रोड पर कूड़ा उठाने पहुँचे थे। गलियों से कचरा इकट्ठा कर जब वे मुख्य ठेले के पास पहुँचे, तो उन्हें कचरे के बीच कुछ संदिग्ध दिखाई दिया। जैसे ही उन्होंने कूड़े को हटाया, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वहां एक छोटे बच्चे का शव पड़ा था। सफाईकर्मियों के शोर मचाते ही आसपास के लोग जमा हो गए।

​देखते ही देखते यह खबर पूरे ललमटिया और साहेबगंज इलाके में आग की तरह फैल गई। समीर के परिजन, जो रविवार शाम से ही उसकी तलाश में भटक रहे थे, बदहवास होकर मौके पर पहुँचे। अपने लाडले को इस हाल में देखकर पिता मोहम्मद इजहार और मां का रो-रोकर बुरा हाल था। समीर के मामा ने रुंधे गले से बताया कि समीर रविवार शाम को घर से बाहर निकला था, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। परिजनों को अंदेशा था कि वह शायद कहीं रास्ता भटक गया है, लेकिन उन्हें क्या पता था कि सुबह उसकी लाश कचरे के ढेर में मिलेगी।

साक्ष्य मिटाने की साजिश: हत्या कर ठेले में फेंका शव

​समीर के शरीर पर मौजूद निशान और घटनास्थल की स्थिति को देखकर स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि यह एक सोची-समझी हत्या है। परिजनों का कहना है कि किसी अज्ञात अपराधी ने मासूम समीर का गला घोंटकर या किसी अन्य तरीके से हत्या की और फिर कानून की नजरों से बचने के लिए साक्ष्य छिपाने की नीयत से शव को नगर निगम के कूड़े वाले ठेले में डाल दिया। यह स्थान जैन मंदिर के समीप होने के कारण अक्सर चहल-पहल वाला रहता है, बावजूद इसके अपराधी ने इतनी जघन्य वारदात को अंजाम देने का दुस्साहस दिखाया।

​पुलिस की प्रारंभिक जांच में भी यह संकेत मिल रहे हैं कि हत्या कहीं और की गई और बाद में शव को यहाँ लाकर ठिकाने लगाया गया। कूड़े के ठेले का चयन इसलिए किया गया ताकि सुबह जब कूड़ा गाड़ी इसे उठाकर डंपिंग यार्ड ले जाए, तो शव वहां दब जाए और कभी किसी को पता न चले। लेकिन सफाईकर्मियों की मुस्तैदी ने इस साजिश को नाकाम कर दिया। समीर के पिता ललमटिया चौक पर एक मीट की दुकान में काम करते हैं और एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में मासूम की हत्या के पीछे की रंजिश क्या हो सकती है, यह अभी भी एक बड़ा रहस्य बना हुआ है।

पुलिस छावनी में तब्दील हुआ ललमटिया: FSL की टीम ने संभाला मोर्चा

​मामले की गंभीरता और बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए भागलपुर पुलिस ने तुरंत हरकत दिखाई। ललमटिया थाना, नाथनगर थाना, और विश्वविद्यालय थाना समेत कुल चार थानों की पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए सिटी डीएसपी 2 राकेश कुमार स्वयं कमान संभालने पहुँचे। पुलिस ने सबसे पहले आक्रोशित भीड़ को शांत कराया और शव के आसपास के इलाके को ‘क्राइम सीन’ घोषित कर घेराबंदी कर दी।

​जांच को वैज्ञानिक दिशा देने के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की टीम को भी बुलाया गया। एफएसएल विशेषज्ञों ने कूड़े के ठेले और उसके आसपास से कई वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं। टीम ने फिंगरप्रिंट्स और मिट्टी के नमूनों के साथ-साथ अन्य सूक्ष्म साक्ष्यों को एकत्रित किया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि शव को ठेले में रखते समय किन लोगों की मौजूदगी रही होगी। सिटी डीएसपी 2 राकेश कुमार ने बताया कि पुलिस हर बिंदु पर जांच कर रही है और अपराधियों की धरपकड़ के लिए एक विशेष टीम का गठन कर दिया गया है। उन्होंने परिजनों को आश्वासन दिया कि किसी भी सूरत में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

जनाक्रोश और हंगामा: इंसाफ के लिए सड़क पर उतरे लोग

​मासूम समीर की मौत ने पूरे इलाके के लोगों के भीतर भरे गुस्से को विस्फोट में बदल दिया। स्थानीय लोगों ने पुलिस पर सुस्ती का आरोप लगाते हुए सड़क जाम कर दी और जमकर हंगामा किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पिछले कुछ समय से ललमटिया और आसपास के इलाकों में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बढ़ गया है। नशेड़ियों और जुआरियों की वजह से बच्चों और महिलाओं का घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है।

​जाम के कारण घंटों तक आवागमन बाधित रहा। लोग आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग पर अड़े रहे। सिटी डीएसपी 2 राकेश कुमार ने लोगों से सीधा संवाद किया और उन्हें समझाया कि पुलिस अपनी पूरी ताकत से जांच में जुटी है। उन्होंने बताया कि ललमटिया थाना क्षेत्र के सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। विशेष रूप से जैन मंदिर रोड पर जाने वाले रास्तों के कैमरों को स्कैन किया जा रहा है ताकि उन संदिग्धों की पहचान हो सके जो रात के अंधेरे में कूड़े के ठेले के पास देखे गए थे। पुलिस की इस सक्रियता और आश्वासन के बाद ही लोग शांत हुए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की अनुमति दी।

सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्य: जांच की दिशा

​पुलिस के लिए इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने में सीसीटीवी फुटेज सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है। पुलिस ने ललमटिया चौक से लेकर जैन मंदिर रोड तक के कम से कम एक दर्जन कैमरों का डेटा कब्जे में लिया है। पुलिस यह देख रही है कि रविवार की रात 12 बजे से लेकर सोमवार सुबह 4 बजे के बीच उस रास्ते पर किन वाहनों या व्यक्तियों की आवाजाही हुई।

​इसके साथ ही, पुलिस समीर के मोबाइल रिकॉर्ड्स (यदि कोई था) और उसके दोस्तों से भी पूछताछ कर रही है। सिटी डीएसपी 2 राकेश कुमार के अनुसार, कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या इजहार के परिवार का किसी से पुराना विवाद था या यह किसी आकस्मिक घटना का परिणाम है। एफएसएल की रिपोर्ट और पोस्टमार्टम की शुरुआती रिपोर्ट के आने के बाद पुलिस को हत्या के तरीके के बारे में ठोस जानकारी मिलेगी, जिससे जांच का दायरा और भी स्पष्ट हो जाएगा।

मासूम की मौत ने खड़े किए सुरक्षा पर सवाल

​20 अप्रैल 2026 की यह सुबह भागलपुर के इतिहास में एक और काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। समीर की हत्या ने यह साबित कर दिया है कि अपराधियों के मन में अब न तो ईश्वर का भय रहा और न ही कानून का। जैन मंदिर जैसी पवित्र जगह के पास एक मासूम का शव मिलना सामाजिक पतन की पराकाष्ठा है। 10 वर्षीय समीर, जिसका पूरा भविष्य उसके सामने था, वह अब केवल एक फाइल का नंबर बनकर रह गया है।

​सिटी डीएसपी 2 राकेश कुमार के नेतृत्व में पुलिस की टीम छापेमारी कर रही है, लेकिन असली चुनौती उस डर को खत्म करने की है जो अब ललमटिया के हर घर में बैठ गया है। क्या अब भागलपुर की गलियों में बच्चे सुरक्षित नहीं हैं? क्या कचरे के ढेर ही अब मासूमों का आखिरी ठिकाना बनेंगे? यह सवाल आज हर भागलपुरवासी पूछ रहा है। फिलहाल, पूरे इलाके में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है और हर आंख उस दिन का इंतजार कर रही है जब समीर के हत्यारे सलाखों के पीछे होंगे।

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