खरीक में स्कूल वैन चालक की खुदकुशी: सीसीटीवी में कैद हुआ खौफनाक मंजर; पारिवारिक कलह और नशे की लत ने छीनी जिंदगी

नवगछिया। भागलपुर जिले के नवगछिया पुलिस जिला अंतर्गत खरीक बाजार में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ एक निजी स्कूल के वैन चालक ने स्कूल परिसर के भीतर ही फंदे से लटककर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। यह घटना केवल एक आत्महत्या नहीं है, बल्कि एक टूटते परिवार, नशे की गिरफ्त और लंबे समय से चल रहे मानसिक द्वंद्व का दुखद अंत है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मौत का यह पूरा खौफनाक मंजर स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है, जो चीख-चीखकर एक अकेले इंसान की बेबसी बयां कर रहा है। मृतक की पहचान खरीक बाजार निवासी डब्लू चौधरी के रूप में हुई है, जो पिछले कई वर्षों से इसी स्कूल में बच्चों को लाने-ले जाने का काम करता था। सोमवार की सुबह जब स्कूल खुला, तो वहां शिक्षा की गूँज के बजाय मातम का सन्नाटा पसरा था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस घटना ने स्थानीय स्तर पर कई अनुत्तरित सवाल छोड़ दिए हैं कि आखिर एक हंसते-खेलते स्कूल के वातावरण में ऐसी त्रासदी कैसे घट गई।

शनिवार की रात और सीसीटीवी का गवाह

​घटना की कड़ियाँ शनिवार की रात से जुड़ती हैं। स्कूल के सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि डब्लू चौधरी ने शनिवार रात करीब 9 बजे इस आत्मघाती कदम को अंजाम दिया। कैमरे में कैद तस्वीरों के अनुसार, वह उस समय स्कूल परिसर में अकेला था। रात के सन्नाटे में उसने रस्सी का इंतजाम किया और खुद को फंदे से लटका लिया। स्कूल बंद होने के कारण उस समय वहां कोई रोकने या टोकने वाला नहीं था।

​रविवार की सुबह जब स्कूल के संचालक और अन्य कर्मी रोज की भांति काम पर पहुँचे, तो उन्होंने डब्लू का शव फंदे से लटका पाया। इस दृश्य को देखते ही स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। संचालक ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय खरीक थाना को दी। सीसीटीवी फुटेज ने इस मामले में किसी भी तरह की बाहरी साजिश या संदेहास्पद गतिविधि को प्राथमिक तौर पर खारिज कर दिया है, क्योंकि इसमें डब्लू को खुद ही फंदा लगाते हुए देखा गया है। हालांकि, यह फुटेज अब पुलिस के लिए सबसे बड़ा साक्ष्य है, जिससे मौत के सटीक समय की पुष्टि हो चुकी है।

10 साल का तनाव और नारायणपुर का वह अधूरा रिश्ता

​डब्लू चौधरी की आत्महत्या के पीछे की कहानी किसी पारिवारिक त्रासदी से कम नहीं है। 45 वर्षीय डब्लू पिछले 10 वर्षों से एक गहरे घरेलू विवाद से जूझ रहा था। जानकारी के अनुसार, डब्लू नशे का आदी था और इसी नशे की लत ने उसके सुखी वैवाहिक जीवन में जहर घोल दिया था। परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि नशे की हालत में वह अपनी पत्नी प्रीतम देवी के साथ अक्सर मारपीट और प्रताड़ना करता था।

​विवाद इतना बढ़ा कि डब्लू की पत्नी पिछले एक दशक से अपने बच्चों के साथ नारायणपुर स्थित अपने मायके में रहने लगी थी। पत्नी और बच्चों के दूर चले जाने के बाद डब्लू अकेला पड़ गया था। हालांकि, इस रिश्ते को बचाने के लिए सामाजिक स्तर पर कई बार पंचायतें भी बुलाई गईं। गणमान्य लोगों ने दोनों के बीच सुलह कराने की कोशिश की, ताकि डब्लू का घर फिर से बस सके, लेकिन उसकी नशे की लत और व्यवहार में सुधार न होने के कारण यह रिश्ता कभी पटरी पर नहीं लौट पाया। पत्नी का मायके में रहना और बच्चों से दूरी ने डब्लू को गहरे अवसाद (डिप्रेशन) में धकेल दिया था।

नशे की लत और सुशासन के दावों के बीच एक कड़वा सच

​यह घटना बिहार के ग्रामीण इलाकों में पैर पसार रही नशे की समस्या और उसके कारण बर्बाद हो रहे परिवारों की एक बानगी है। डब्लू चौधरी एक स्कूल वैन चालक था, जिसके कंधों पर दर्जनों बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी। लेकिन वह खुद अपनी जिंदगी की गाड़ी को नशे के अंधेरे से नहीं निकाल पाया। स्थानीय लोगों का मानना है कि डब्लू अक्सर शराब या अन्य नशीले पदार्थों के सेवन के बाद सुध-बुध खो देता था, जिससे उसकी सामाजिक और पारिवारिक छवि धूमिल हो गई थी।

​अकेलेपन और नशे के कॉम्बिनेशन ने उसके सोचने-समझने की शक्ति को क्षीण कर दिया था। शनिवार की रात भी आशंका जताई जा रही है कि वह नशे में था या फिर अपनी पारिवारिक स्थिति को लेकर इतना अधिक तनाव में था कि उसे मौत ही एकमात्र रास्ता नजर आई। एक तरफ सरकार नशामुक्ति के बड़े-बड़े अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ डब्लू जैसे लोग आज भी इस जाल में फंसकर अपना घर और अपनी जान गँवा रहे हैं।

पुलिसिया कार्रवाई और इंस्पेक्टर नरेश कुमार की जांच

​घटना की जानकारी मिलते ही खरीक थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर नरेश कुमार पुलिस बल के साथ स्कूल पहुँचे। उन्होंने सबसे पहले घटनास्थल का मुआयना किया और सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में लिया। पुलिस ने शव को फंदे से नीचे उतरवाया और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए नवगछिया अनुमंडल अस्पताल भेज दिया।

​इंस्पेक्टर नरेश कुमार ने बताया कि “अब तक की प्रारंभिक जांच और परिजनों से पूछताछ में यह बात सामने आई है कि डब्लू चौधरी अपनी पारिवारिक कलह और पत्नी के अलग रहने के कारण काफी तनाव में रहता था। नशे की आदत ने उसकी समस्याओं को और बढ़ा दिया था।” पुलिस अब इस मामले में अप्राकृतिक मौत (यूडी केस) दर्ज कर जांच कर रही है। पुलिस यह भी देख रही है कि क्या शनिवार की रात स्कूल परिसर में उसकी किसी से कोई बातचीत हुई थी या उसने मरने से पहले किसी को कोई फोन किया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस इस मामले को पूरी तरह से बंद करेगी।

निष्कर्ष: एक सामाजिक विफलता की कहानी

​20 अप्रैल 2026 की यह खबर हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे समाज में मानसिक स्वास्थ्य और नशे की समस्या कितनी गहरी हो चुकी है। डब्लू चौधरी की मौत केवल एक व्यक्ति की जान जाना नहीं है, बल्कि नारायणपुर में रह रहे उन बच्चों के सिर से पिता का साया उठना भी है, जो शायद किसी दिन अपने पिता के सुधरने का इंतजार कर रहे थे। 10 साल तक चला यह पारिवारिक युद्ध अंततः एक स्कूल के शांत परिसर में रस्सी के फंदे पर जाकर खत्म हुआ।

​स्कूल प्रशासन के लिए भी यह एक बड़ा सदमा है, क्योंकि जिस परिसर में बच्चे भविष्य गढ़ते हैं, वहां एक कर्मचारी ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली। खरीक बाजार के लोग इस घटना से मर्माहत हैं। यह मामला हमें याद दिलाता है कि परिवार के भीतर का कलह और नशा किस तरह एक इंसान को जीते-जी मार देता है। डब्लू चौधरी की कहानी उन तमाम लोगों के लिए एक चेतावनी है जो समस्याओं का समाधान संवाद के बजाय नशे और हिंसा में ढूंढते हैं। अब पुलिस की फाइल भले ही बंद हो जाए, लेकिन इस आत्महत्या के पीछे के सामाजिक जख्मों को भरने में लंबा समय लगेगा।

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