महिला आरक्षण पर विपक्ष की सोच कुत्सित: सीएम योगी का तीखा हमला, कहा—किसी का हक नहीं छीना जा रहा

लखनऊ, 19 अप्रैल 2026। महिला आरक्षण को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों पर जोरदार हमला बोलते हुए उनकी मंशा पर सवाल उठाए हैं। लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम योगी ने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष की सोच “कुत्सित” है और वह जानबूझकर इस ऐतिहासिक कदम का विरोध कर रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस कानून के जरिए किसी का भी हक नहीं छीना जा रहा है, बल्कि यह महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने हमेशा समाज के सभी वर्गों—महिलाओं, गरीबों, युवाओं और किसानों—के विकास को प्राथमिकता दी है। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 में सत्ता संभालते ही प्रधानमंत्री ने इन चार वर्गों को देश की प्रमुख ताकत बताया था और उसी दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। योगी ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल इस तरह के प्रगतिशील कदमों का विरोध केवल राजनीतिक स्वार्थ के कारण करते हैं।

सीएम योगी ने संसद में महिला आरक्षण बिल पर हुई बहस का जिक्र करते हुए कहा कि जो दृश्य वहां देखने को मिला, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। उन्होंने इसकी तुलना महाभारत के “द्रौपदी चीर हरण” जैसे अपमानजनक प्रसंग से की और कहा कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनके मुताबिक, विपक्ष ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेने के बजाय इसे राजनीतिक बहस का विषय बना दिया।

उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग उठाई, जो संविधान के खिलाफ है। योगी ने कहा कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता, ऐसे में इस तरह की मांगें केवल भ्रम फैलाने और समाज को बांटने की कोशिश हैं। उन्होंने कांग्रेस पर भी हमला करते हुए शाहबानो प्रकरण का जिक्र किया और कहा कि उस समय कांग्रेस ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन किया था। वहीं, जब केंद्र सरकार ने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया, तब भी विपक्ष ने उसका विरोध किया।

परिसीमन को लेकर उठे विवाद पर भी मुख्यमंत्री ने विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि जानबूझकर यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि महिला आरक्षण लागू होने से कुछ राज्यों की सीटें कम हो जाएंगी। योगी ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों ने इस बात का आश्वासन दिया है कि किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का विस्तार सभी राज्यों में समान अनुपात में होगा, जिससे किसी क्षेत्र के साथ अन्याय नहीं होगा।

सीएम योगी ने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने बताया कि इस कानून के तहत लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है और इसके लिए अतिरिक्त सीटें बढ़ाई जाएंगी, ताकि किसी अन्य वर्ग का प्रतिनिधित्व प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि सरकार ने महिलाओं और सामाजिक संगठनों की मांगों को ध्यान में रखते हुए इस कानून को लागू करने की प्रक्रिया में भी संशोधन किए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी दलों के पास इस कानून के माध्यम से अपने पुराने “पापों” का प्रायश्चित करने का मौका था, लेकिन उन्होंने इसे गंवा दिया। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर तंज कसते हुए “गेस्ट हाउस कांड” का जिक्र किया और कहा कि यह अवसर था कि वे अपनी छवि सुधारते, लेकिन उन्होंने इसके बजाय विरोध का रास्ता चुना।

योगी आदित्यनाथ ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दलों की सोच केवल अपने परिवार और सीमित राजनीतिक हितों तक सिमटी हुई है। उन्होंने कहा कि ये दल नहीं चाहते कि युवाओं, महिलाओं और गरीबों को उनका हक मिले। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने समाज के हर वर्ग के लिए काम किया है और उत्तर प्रदेश की जनता इस दिशा में पूरी तरह उनके साथ खड़ी है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि महिला आरक्षण केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि देश की “आधी आबादी” इस मुद्दे को गंभीरता से देख रही है और भविष्य में इसका जवाब भी देगी। उन्होंने कहा कि जो लोग इस कानून का विरोध कर रहे हैं, उन्हें जनता कभी माफ नहीं करेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण को लेकर यह बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। एक ओर सरकार इसे ऐतिहासिक सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष इसके कुछ प्रावधानों पर सवाल उठा रहा है। हालांकि, इस मुद्दे पर जनता की राय भी अहम होगी, क्योंकि यह सीधे तौर पर महिलाओं के प्रतिनिधित्व और अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान साफ तौर पर संकेत देता है कि महिला आरक्षण को लेकर सियासी संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच यह टकराव किस दिशा में जाता है और क्या यह कानून देश की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव ला पाता है या नहीं।

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