
पटना। बिहार की सियासत में सत्ता के फेरबदल और नई सरकार के गठन के बाद अब शासन की प्राथमिकताएं और सुरक्षा के समीकरण भी बदलते नजर आ रहे हैं। राज्य सुरक्षा समिति की उच्चस्तरीय बैठक के बाद बिहार सरकार के गृह विभाग ने वीआईपी सुरक्षा (VIP Security) को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला निर्णय लिया है। इस नए आदेश के तहत बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता विजय कुमार सिन्हा की सुरक्षा में कटौती की गई है। अब उन्हें मिलने वाली हाई-प्रोफाइल ‘Z+’ (जेड प्लस) कैटेगरी की सुरक्षा को घटाकर ‘Z’ (जेड) कैटेगरी कर दिया गया है। वहीं, दूसरी ओर मुख्यमंत्री के पुत्र निशांत कुमार को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए उन्हें पहली बार ‘Z’ कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान की है। सुरक्षा समिति की इस समीक्षा बैठक में राज्य के कई अन्य मंत्रियों और दिग्गज नेताओं के खतरे के आकलन (Threat Assessment) पर भी चर्चा हुई, जिसके बाद उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव सहित कई अन्य चेहरों की सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। यह फैसला न केवल प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि इसके राजनैतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
विजय कुमार सिन्हा: क्यों घटी सुरक्षा की श्रेणी?
विजय कुमार सिन्हा बिहार की राजनीति में एक प्रभावी नाम रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष से लेकर उपमुख्यमंत्री पद तक का सफर तय करने वाले सिन्हा को अब तक राज्य की सबसे कड़ी सुरक्षा श्रेणियों में से एक ‘Z+’ सुरक्षा मिल रही थी। गृह विभाग के ताज़ा आदेश के अनुसार, अब उनकी सुरक्षा को एक पायदान नीचे लाकर ‘Z’ श्रेणी में तब्दील कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, समय-समय पर नेताओं के संभावित खतरों की समीक्षा की जाती है। इसी समीक्षा के आधार पर राज्य सुरक्षा समिति ने पाया कि वर्तमान परिस्थितियों में विजय सिन्हा के लिए ‘Z’ कैटेगरी पर्याप्त है।
इस बदलाव का सीधा असर उनके सुरक्षा दस्ते पर पड़ेगा। जहाँ ‘Z+’ श्रेणी में परिष्कृत हथियारों से लैस कमांडो और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहते थे, वहीं अब ‘Z’ श्रेणी में सुरक्षाकर्मियों की कुल संख्या पहले के मुकाबले कम होगी। हालांकि, ‘Z’ श्रेणी भी भारत में उच्च स्तर की सुरक्षा मानी जाती है, लेकिन ‘Z+’ से इसका घटना यह संकेत देता है कि सुरक्षा एजेंसियां अब उनके ऊपर खतरे के स्तर को पहले की तुलना में कम आंक रही हैं। विजय सिन्हा के घर, उनके दौरों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में अब उसी अनुपात में सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी जो ‘Z’ कैटेगरी के मानकों के अनुरूप होगी।
निशांत कुमार: पहली बार ‘Z’ कैटेगरी के घेरे में
इस पूरी सुरक्षा समीक्षा में सबसे अधिक ध्यान खींचने वाला नाम निशांत कुमार का है। नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार, जो आमतौर पर राजनैतिक चकाचौंध से दूर रहना पसंद करते हैं, उन्हें सरकार ने पहली बार ‘Z’ कैटेगरी की सुरक्षा देने का फैसला किया है। अब तक निशांत कुमार की सुरक्षा को लेकर इस स्तर का कड़ा इंतजाम नहीं देखा गया था, लेकिन हालिया सुरक्षा इनपुट और उनके सार्वजनिक जीवन की गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा समिति ने उन्हें ‘Z’ कवर देने की सिफारिश की थी।
निशांत कुमार को इस स्तर की सुरक्षा मिलना यह दर्शाता है कि खुफिया एजेंसियां उनके प्रति भी किसी न किसी प्रकार के सुरक्षा जोखिम की संभावना देख रही हैं। ‘Z’ कैटेगरी के तहत अब उनके साथ 24 घंटे करीब 22 सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे। इनमें पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों के साथ-साथ विशेष अंगरक्षक भी शामिल होंगे। इसके अलावा उनके साथ एस्कॉर्ट गाड़ियां भी चलेंगी और उनके आवास पर आधुनिक संचार उपकरणों से लैस एक सुरक्षा पोस्ट भी बनाई जाएगी। निशांत कुमार की सुरक्षा बढ़ाना इस बात की भी पुष्टि करता है कि राज्य में महत्वपूर्ण हस्तियों के परिवार के सदस्यों की सुरक्षा को लेकर सरकार अब किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लेना चाहती है।

उपमुख्यमंत्रियों और श्रवण कुमार की सुरक्षा में भी इजाफा
गृह विभाग द्वारा जारी आदेश केवल विजय सिन्हा या निशांत कुमार तक ही सीमित नहीं है। राज्य के दोनों नवनियुक्त उपमुख्यमंत्री—विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव—की सुरक्षा को भी बढ़ाकर ‘Z’ कैटेगरी कर दिया गया है। सरकार का तर्क है कि दोनों नेता वर्तमान में कैबिनेट में सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं और उनकी आवाजाही राज्य के विभिन्न हिस्सों में निरंतर होती रहती है। ऐसे में उनकी सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करना अनिवार्य था।
उपमुख्यमंत्रियों के अलावा मंत्री श्रवण कुमार की सुरक्षा श्रेणी में भी बदलाव किया गया है। उन्हें अब ‘Y+’ (वाई प्लस) कैटेगरी की सुरक्षा दी गई है। ‘Y+’ श्रेणी में भी पुलिस सुरक्षा का खास इंतजाम होता है, जिसमें मोबाइल सिक्योरिटी के साथ-साथ स्थायी तौर पर गार्ड तैनात रहते हैं। इन निर्णयों के बाद अब बिहार के सत्ता प्रतिष्ठान में सुरक्षा का एक नया ‘प्रोटोकॉल’ दिखाई देगा। मुख्यमंत्री आवास से लेकर इन मंत्रियों के दफ्तरों तक अब पुलिस और अर्धसैनिक बलों की बढ़ी हुई मौजूदगी देखी जा सकेगी।
क्या है ‘Z’ कैटेगरी की सुरक्षा और उसकी ताकत?
भारत में सुरक्षा व्यवस्था के विभिन्न स्तर होते हैं, जिनमें ‘Z’ कैटेगरी को अत्यंत विशिष्ट माना जाता है। इस सुरक्षा घेरे की खासियत और इसमें मिलने वाली सुविधाओं को समझना जरूरी है:
- सुरक्षाकर्मियों की संख्या: ‘Z’ कैटेगरी में करीब 22 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। इनमें एनएसजी (NSG) कमांडो के साथ-साथ पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान शामिल होते हैं।
- एस्कॉर्ट और वाहन: इस श्रेणी की सुरक्षा पाने वाले व्यक्ति के साथ हमेशा एस्कॉर्ट गाड़ियां मौजूद रहती हैं, जो यात्रा के दौरान सुरक्षा घेरा बनाने का काम करती हैं।
- आधुनिक हथियार: तैनात जवान आधुनिक हथियारों जैसे एमपी-5 (MP-5) और एके-47 (AK-47) जैसे हथियारों से लैस होते हैं।
- 24 घंटे निगरानी: यह सुरक्षा केवल यात्रा तक सीमित नहीं होती, बल्कि उनके आवास पर भी 24 घंटे कड़ी निगरानी रखी जाती है। घर के प्रवेश और निकास द्वार पर स्कैनर और अन्य सुरक्षा उपकरण लगाए जाते हैं।
- ट्रैफिक क्लियरेंस: विशिष्ट परिस्थितियों में इन नेताओं के काफिले को ट्रैफिक में प्राथमिकता भी दी जाती है ताकि सुरक्षा कारणों से उनकी रफ़्तार सुस्त न पड़े।
सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और खतरे का आकलन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा श्रेणियों में किया गया यह बदलाव किसी राजनैतिक मंशा से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से खुफिया एजेंसियों (Intelligence agencies) की रिपोर्ट और खतरे के विश्लेषण पर आधारित है। राज्य सुरक्षा समिति, जिसमें गृह सचिव, डीजीपी और खुफिया विभाग के प्रमुख शामिल होते हैं, समय-समय पर नेताओं की गतिविधियों और उनके प्रति संभावित साजिशों की समीक्षा करती है।
विजय सिन्हा की सुरक्षा घटने के पीछे का कारण उनकी भूमिका में आया बदलाव भी हो सकता है। अक्सर देखा जाता है कि जब कोई व्यक्ति सरकार के शीर्ष पदों से हटता है, तो उसके खतरे का स्तर भी दोबारा जांचा जाता है। वहीं, निशांत कुमार जैसे लोगों के लिए सुरक्षा बढ़ाना एक ‘एहतियाती कदम’ (Precautionary Measure) हो सकता है ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके। सुरक्षा समिति की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में वर्तमान राजनैतिक हलचल और हाल की कुछ घटनाओं को देखते हुए वीआईपी सुरक्षा को नया रूप देना जरूरी हो गया था।
राजनैतिक गलियारों में चर्चा और प्रतिक्रियाएं
भले ही सरकार इसे प्रशासनिक प्रक्रिया बताए, लेकिन राजनैतिक हलकों में इसे लेकर सुगबुगाहट तेज है। विपक्ष के कुछ नेताओं का मानना है कि विजय सिन्हा की सुरक्षा कम करना एक तरह का संकेत है। हालांकि, भाजपा खेमे से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक विरोध सामने नहीं आया है, क्योंकि सरकार में उनकी भी बराबर की भागीदारी है। दूसरी ओर, निशांत कुमार को सुरक्षा कवच मिलना इस बात की ओर इशारा करता है कि वे भी अब सार्वजनिक जीवन में अधिक सक्रिय हो सकते हैं।
श्रवण कुमार को ‘Y+’ सुरक्षा मिलना उनके बढ़ते कद और विभाग की संवेदनशीलता को दर्शाता है। बिहार जैसे राज्य में जहाँ अपराध और राजनीति अक्सर आमने-सामने होते हैं, वहां सुरक्षा श्रेणियों का बढ़ना या घटना केवल प्रतिष्ठा का विषय नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा से जुड़ा एक अनिवार्य पहलू है। पुलिस और संबंधित विभागों को गृह विभाग की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इन नई श्रेणियों को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए।
सुरक्षा ऑडिट की निरंतरता और भविष्य की चुनौतियां
गृह विभाग के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था एक स्थिर प्रक्रिया नहीं है। हर छह महीने में एक ‘सुरक्षा ऑडिट’ (Security Audit) किया जाता है। इसमें देखा जाता है कि किन नेताओं को वास्तव में सुरक्षा की जरूरत है और किनकी सुरक्षा को तर्कसंगत बनाया जा सकता है। यह निर्णय राज्य के संसाधनों के सही उपयोग के लिए भी किया जाता है ताकि सुरक्षा बलों की तैनाती वहां हो जहाँ वास्तव में जरूरत है।
18 अप्रैल 2026 के इस फैसले के बाद अब पटना की सड़कों पर इन नेताओं के काफिले बदले हुए स्वरूप में दिखेंगे। विजय सिन्हा के साथ अब ‘Z+’ की जगह ‘Z’ कवर होगा, जबकि निशांत कुमार अब पहली बार भारी सुरक्षा घेरे के बीच नज़र आएंगे। बिहार की कानून व्यवस्था और वीआईपी सुरक्षा के बीच का यह संतुलन आने वाले दिनों में और भी कई बड़े बदलावों की आहट दे रहा है। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियों ने सभी संबंधित नेताओं को नए प्रोटोकॉल के बारे में ब्रीफ कर दिया है और नई तैनाती की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर जारी है।


