अक्षय तृतीया पर इस चीज की खरीदारी करा सकती है बड़ा नुकसान, जानिए इस शुभ दिन पर क्या न लें

नई दिल्ली/पटना: हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ और फलदायी दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्य और निवेश का फल अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाला होता है। यही कारण है कि इस दिन सोना-चांदी खरीदने, नया व्यवसाय शुरू करने या संपत्ति में निवेश करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

लेकिन जहां एक ओर यह दिन समृद्धि का प्रतीक है, वहीं धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय दृष्टिकोण के अनुसार कुछ ऐसी चीजें भी हैं, जिन्हें इस दिन खरीदना शुभ नहीं माना जाता। ऐसा विश्वास है कि इन वस्तुओं की खरीदारी से घर की सुख-शांति और आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

अक्षय तृतीया 2026: तिथि और शुभ योग

साल 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को सुबह 10:50 बजे से शुरू होकर 20 अप्रैल सुबह 7:28 बजे तक रहेगी। इस दौरान रोहिणी नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और गज केसरी योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं।

इन विशेष योगों के कारण इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन बिना किसी विशेष मुहूर्त के भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

क्यों खास है यह दिन?

‘अक्षय’ का अर्थ होता है जो कभी समाप्त न हो। माना जाता है कि इस दिन किया गया दान, पूजा, जप या निवेश जीवनभर शुभ फल देता है। इसीलिए लोग इस दिन सोना, चांदी, जमीन, वाहन या अन्य मूल्यवान वस्तुएं खरीदने को प्राथमिकता देते हैं।

लेकिन हर खरीदारी इस दिन लाभकारी नहीं होती। कुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं जिन्हें इस दिन घर लाने से बचना चाहिए।

अक्षय तृतीया पर इन चीजों की खरीदारी से बचें

1. धारदार और नुकीली वस्तुएं

अक्षय तृतीया के दिन चाकू, कैंची, छुरी या अन्य धारदार वस्तुएं खरीदना अशुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये वस्तुएं घर में कलह, तनाव और विवाद का कारण बन सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिन सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने वाले कार्य करने चाहिए, जबकि नुकीली वस्तुएं नकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती हैं।

2. काले रंग की चीजें

अक्षय तृतीया पर काले रंग के वस्त्र या सामान खरीदने से भी बचने की सलाह दी जाती है। ज्योतिष के अनुसार, काला रंग शनि और नकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा होता है, जबकि यह पर्व सूर्य और विष्णु से संबंधित सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।

ऐसे में इस दिन पीले, लाल या सुनहरे रंग की चीजें खरीदना अधिक शुभ माना जाता है।

3. एल्युमिनियम, स्टील और प्लास्टिक

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन हल्की धातुओं या प्लास्टिक से बनी वस्तुओं की खरीदारी से बचना चाहिए। अक्षय तृतीया धन और समृद्धि का प्रतीक है, इसलिए इस दिन सोना, चांदी या अन्य कीमती धातुएं खरीदना ज्यादा शुभ माना जाता है।

हालांकि, जरूरत के अनुसार सामान्य उपयोग की चीजें खरीदी जा सकती हैं, लेकिन पारंपरिक मान्यता इन्हें प्राथमिकता नहीं देती।

4. उधार लेना या देना

इस दिन पैसों का लेन-देन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। बिना योजना के उधार देना या लेना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।

मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर किया गया वित्तीय व्यवहार लंबे समय तक प्रभाव डालता है, इसलिए इस दिन निवेश और खर्च दोनों में संतुलन जरूरी है।

5. नकारात्मक सोच से जुड़ी चीजें

ऐसी वस्तुएं जो मन में भय, अशांति या नकारात्मकता पैदा करें, उन्हें भी इस दिन खरीदने से बचना चाहिए। यह दिन सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और नए आरंभ का प्रतीक है, इसलिए इसी भावना के अनुरूप कार्य करना बेहतर माना जाता है।

क्या खरीदना होता है शुभ?

जहां कुछ चीजों से बचने की सलाह दी जाती है, वहीं कुछ वस्तुएं इस दिन विशेष रूप से शुभ मानी जाती हैं:

  • सोना और चांदी
  • भगवान विष्णु या माता लक्ष्मी से जुड़े प्रतीक
  • जमीन या संपत्ति
  • नए व्यवसाय की शुरुआत
  • धार्मिक सामग्री (जैसे कलश, पूजा सामग्री)
  • अनाज या धनिया (समृद्धि का प्रतीक)

इन वस्तुओं की खरीदारी को जीवन में सुख-समृद्धि और स्थिरता लाने वाला माना जाता है।

सामाजिक और आधुनिक दृष्टिकोण

आज के समय में कई लोग इन मान्यताओं को आस्था के रूप में देखते हैं, जबकि कुछ लोग इसे पारंपरिक संस्कृति का हिस्सा मानते हैं। आधुनिक जीवनशैली में हर व्यक्ति अपनी सुविधा और जरूरत के अनुसार निर्णय लेता है।

हालांकि, त्योहारों के दौरान इन परंपराओं का पालन करने से मानसिक संतुलन और सकारात्मकता बनी रहती है, जो जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

अक्षय तृतीया न केवल खरीदारी का दिन है, बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा, नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक है। इस दिन सही वस्तुओं का चयन जीवन में सुख-शांति ला सकता है, जबकि कुछ चीजों से बचना पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार बेहतर माना जाता है।

इसलिए यदि आप इस शुभ अवसर पर खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो परंपराओं और अपनी जरूरतों के बीच संतुलन बनाकर निर्णय लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम होगा।

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