
पटना: बिहार में यातायात व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार जल्द ही इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लागू करने जा रही है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फेशियल रिकॉग्निशन और उन्नत सर्विलांस तकनीकों से लैस होगा। इस हाईटेक सिस्टम के लागू होने के बाद न केवल ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती बढ़ेगी, बल्कि अपराधियों की पहचान और निगरानी भी पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगी।
यह परियोजना बिहार के प्रमुख शहरों, राष्ट्रीय राजमार्गों (NH), राज्यीय राजमार्गों (SH) और टोल प्लाजा पर लागू की जाएगी। परिवहन विभाग के अनुसार, राज्यभर में लगभग 500 से 700 स्थानों को चिन्हित किया गया है, जहां इस अत्याधुनिक तकनीक को स्थापित किया जाएगा। इस पूरे सिस्टम पर करीब 300 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिससे बिहार की ट्रैफिक व्यवस्था को डिजिटल और स्मार्ट बनाया जाएगा।
AI कैमरे करेंगे ऑटोमैटिक चालान
इस नई व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि इसमें लगे AI कैमरे पूरी तरह स्वचालित होंगे। ये कैमरे ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के वाहन चलाने जैसे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को तुरंत पहचान लेंगे और संबंधित वाहन का चालान स्वतः जारी कर देंगे। इससे न सिर्फ नियमों के पालन में सुधार होगा, बल्कि पुलिस पर निर्भरता भी कम होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
चेहरों की पहचान से अपराधियों पर भी नजर
ITMS का एक और अहम पहलू इसका फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम है। यह तकनीक कैमरों के जरिए लोगों के चेहरों की पहचान कर सकेगी। इससे बार-बार नियम तोड़ने वाले चालकों की पहचान करना आसान होगा, साथ ही वांछित अपराधियों की निगरानी में भी मदद मिलेगी।
पुलिस और प्रशासन के लिए यह सिस्टम एक बड़ी तकनीकी सहायता साबित हो सकता है, क्योंकि इससे रियल-टाइम डेटा के आधार पर कार्रवाई संभव होगी।
कंट्रोल रूम से होगी पूरी निगरानी
इस हाईटेक सिस्टम के संचालन के लिए राज्य स्तर पर एक केंद्रीय ट्रैफिक मैनेजमेंट सेंटर बनाया जाएगा, जबकि जिला स्तर पर व्यूइंग सेंटर (VC) स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों से पूरे राज्य की ट्रैफिक गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।
किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि, दुर्घटना या ट्रैफिक जाम की स्थिति में तुरंत अलर्ट जारी किया जाएगा, जिससे समय रहते कार्रवाई संभव हो सकेगी।
दुर्घटनाओं पर भी लगेगा ब्रेक
ITMS में इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम भी शामिल होगा, जो सड़क दुर्घटनाओं या आपात स्थिति का तुरंत पता लगाकर कंट्रोल रूम को सूचना देगा। इससे राहत और बचाव कार्य तेजी से शुरू किए जा सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के जरिए सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है और आपातकालीन सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत
इस सिस्टम में एडैप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल तकनीक भी शामिल होगी, जो ट्रैफिक के दबाव के अनुसार सिग्नल की टाइमिंग को स्वतः बदल देगी। इससे व्यस्त चौराहों पर वाहनों की लंबी कतार और अनावश्यक इंतजार की समस्या कम होगी।
पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे शहरों में जहां ट्रैफिक जाम एक बड़ी समस्या बन चुका है, वहां यह तकनीक काफी राहत दे सकती है।
अवैध परिवहन पर भी लगेगा अंकुश
ITMS के तहत GST ई-वे बिल वेरिफिकेशन सिस्टम को भी जोड़ा जाएगा। इससे मालवाहक वाहनों और खनिज परिवहन की निगरानी की जाएगी। अवैध परिवहन और टैक्स चोरी पर रोक लगाने में यह तकनीक कारगर साबित हो सकती है।
10 साल तक एजेंसी करेगी देखरेख
परिवहन विभाग इस परियोजना के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। चयनित एजेंसी को न केवल सिस्टम स्थापित करना होगा, बल्कि अगले 10 वर्षों तक इसके रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
इसके लिए इच्छुक एजेंसियों से आवेदन मांगे गए हैं और जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
क्या बदलेगा आम लोगों के लिए?
इस सिस्टम के लागू होने के बाद आम लोगों के लिए कई बदलाव देखने को मिलेंगे:
- ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करना महंगा पड़ेगा
- चालान प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होगी
- सड़क सुरक्षा में सुधार होगा
- जाम की समस्या में कमी आएगी
- अपराधियों की पहचान आसान होगी
हालांकि, कुछ लोग इसे निजता (Privacy) के दृष्टिकोण से भी देख रहे हैं। फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक को लेकर देशभर में पहले भी बहस होती रही है, ऐसे में बिहार में इसके लागू होने के बाद इस पर चर्चा और तेज हो सकती है।
कुल मिलाकर, ITMS बिहार के लिए एक बड़ा तकनीकी बदलाव साबित हो सकता है। यह न केवल ट्रैफिक व्यवस्था को स्मार्ट बनाएगा, बल्कि कानून-व्यवस्था को भी मजबूत करेगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है। अगर यह योजना सफल होती है, तो बिहार देश के उन राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां ट्रैफिक प्रबंधन पूरी तरह डिजिटल और AI आधारित होगा।


