
दरभंगा/पटना: बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार बनने के साथ ही मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अब पूरी तरह सक्रिय मोड में आ गया है। खासकर दरभंगा के बिरौल में हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना को लेकर पार्टी ने सरकार को घेरने की रणनीति बना ली है। यह मामला अब केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
राजद सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ने राज्यभर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय होने का निर्देश दिया है। लंबे समय तक अपेक्षाकृत शांत रहने के बाद अब पार्टी इस मुद्दे को बड़े राजनीतिक अभियान के रूप में उठाने की तैयारी में है। प्रदेश कार्यालय से जारी निर्देशों के तहत जिलास्तर पर बैठकें हो रही हैं और कार्यकर्ताओं को जनता के बीच जाकर सरकार की नीतियों और प्रशासनिक विफलताओं को उजागर करने को कहा गया है।
बिरौल गैंगरेप मामला बना राजनीतिक मुद्दा
दरभंगा जिले के बिरौल थाना क्षेत्र में एक दलित किशोरी के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है, वहीं विपक्ष ने इसे सरकार की विफलता करार दिया है। राजद ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक जांच समिति गठित की है, जो घटनास्थल पर जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात कर चुकी है।
इस टीम में पूर्व मंत्री इसराईल मंसूरी, प्रदेश उपाध्यक्ष मधु मंजरी कुशवाहा, जिलाध्यक्ष यासमीन खातून समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। टीम ने न केवल पीड़ित परिवार से बातचीत की, बल्कि स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि घटना के बाद पुलिस ने समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
राजद नेताओं ने आरोप लगाया कि घटना के बाद थाना स्तर पर लापरवाही बरती गई। बताया जा रहा है कि पीड़िता को बेहोशी की हालत में भूसा घर से बरामद किया गया, लेकिन पुलिस ने प्रारंभ में मामले को गंभीरता से नहीं लिया। विपक्ष का दावा है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो आरोपियों की गिरफ्तारी और जांच की दिशा अलग हो सकती थी।
हालांकि, मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस हरकत में आई और दो आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। बावजूद इसके, लापरवाही के आरोपों में घिरे संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं।
RJD की रणनीति: सड़क से सदन तक घेराव
राजद अब इस मुद्दे को केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि राज्यव्यापी आंदोलन का रूप देने की तैयारी में है। पार्टी नेताओं का कहना है कि दलितों और कमजोर वर्गों की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह विफल साबित हो रही है। ऐसे में यह मुद्दा आगामी दिनों में विधानसभा से लेकर सड़क तक गूंजेगा।
राजद नेता लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि सत्ता में बदलाव के बाद भी अगर कानून-व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा, तो सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। पार्टी का मानना है कि यह मामला राज्य में बढ़ते अपराध का प्रतीक है और इसे दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
तेजस्वी यादव के रुख पर सबकी नजर
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजद नेता की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि तेजस्वी यादव इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोल सकते हैं और इसे बड़े जनआंदोलन में बदलने की कोशिश करेंगे।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में तेजस्वी यादव खुद पीड़ित परिवार से मुलाकात कर सकते हैं या इस मुद्दे पर बड़ा बयान दे सकते हैं। इससे राजनीतिक माहौल और गरमा सकता है।
सत्ता परिवर्तन के बाद बढ़ी सियासी गर्मी
भाजपा के मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार की राजनीति में नई खींचतान देखने को मिल रही है। विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं सत्तापक्ष अपने कामकाज और फैसलों के जरिए स्थिति संभालने में जुटा है।
बिरौल की घटना ने इस सियासी टकराव को और तेज कर दिया है। एक तरफ सरकार कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने के दावे कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे पूरी तरह विफलता बताकर जनता के बीच मुद्दा बना रहा है।
आगे क्या?
फिलहाल इस मामले में पुलिस जांच जारी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। लेकिन राजनीतिक रूप से यह मामला थमने वाला नहीं है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि:
- सरकार इस मामले में क्या ठोस कदम उठाती है
- पुलिस पर लगे आरोपों की जांच किस दिशा में जाती है
- और विपक्ष इस मुद्दे को कितना बड़ा जनआंदोलन बना पाता है
कुल मिलाकर, बिरौल गैंगरेप केस ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है और यह आने वाले समय में सत्ता और विपक्ष के बीच बड़े टकराव की वजह बन सकता है।


