वंदे भारत ट्रेन में यात्रियों से अव्यवस्था और कथित शोषण के आरोप, शिकायत पीएम और रेल मंत्रालय तक पहुंची

भागलपुर से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें वंदे भारत ट्रेन में यात्रियों के साथ अव्यवस्था और कथित शोषण के आरोप लगाए गए हैं। वाराणसी से देवघर के बीच चलने वाली वंदे भारत ट्रेन संख्या 22500 में यात्रा कर रहे कई यात्रियों ने खानपान सेवाओं को लेकर गंभीर शिकायतें दर्ज कराई हैं। आरोप है कि ट्रेन में कैंटीन सेवाओं के माध्यम से अतिरिक्त खाद्य सामग्री लेने पर यात्रियों को समय पर बिल नहीं दिया जाता, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस पूरे मामले को लेकर सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रिया तेज हो गई है और इसे उच्च स्तर तक पहुंचाया गया है।

भ्रष्टाचार मुक्त भारत मिशन के निदेशक ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रधानमंत्री, रेल मंत्री और आईआरसीटीसी के अधिकारियों को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी है। उन्होंने बताया कि यात्रियों को जब ट्रेन में अतिरिक्त खाना या अन्य सामान दिया जाता है, तो कई बार कैंटीन कर्मियों द्वारा तत्काल बिल उपलब्ध नहीं कराया जाता। यात्रियों के बार-बार मांगने के बावजूद बिल एक से दो घंटे की देरी से दिया जाता है, जिससे कई बार यात्री अपने गंतव्य स्टेशन पर उतर जाते हैं और उन्हें बिल प्राप्त ही नहीं हो पाता।

इस स्थिति को लेकर यात्रियों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि बिना बिल के सामान दिए जाने से न केवल आर्थिक पारदर्शिता पर असर पड़ता है, बल्कि यह यात्रियों के अधिकारों का भी उल्लंघन है। यात्रियों को यह भी संदेह होता है कि कहीं उनसे अधिक पैसे तो नहीं वसूले जा रहे हैं, क्योंकि बिना बिल के भुगतान की पुष्टि करना मुश्किल हो जाता है।

मामले में यह भी आरोप सामने आया है कि जब यात्री बिल की मांग करते हैं तो कुछ लाइसेंसी वेंडर उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। इससे यात्रियों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। खासकर लंबी दूरी की यात्रा के दौरान जब यात्री पहले से थके होते हैं, तब इस तरह का व्यवहार उनकी परेशानी को और बढ़ा देता है।

सामाजिक कार्यकर्ता ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि वाराणसी से देवघर के बीच चलने वाली इस वंदे भारत ट्रेन में आईआरसीटीसी के कुछ कर्मियों और लाइसेंसी वेंडरों का व्यवहार महिलाओं के लिए भी असुरक्षा का कारण बन रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को इस तरह के माहौल में डर महसूस होने लगा है, जो बेहद चिंताजनक है। उनका मानना है कि रेलवे और आईआरसीटीसी को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेना चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

यात्रियों का कहना है कि वंदे भारत ट्रेन देश की आधुनिक और प्रीमियम ट्रेन सेवाओं में गिनी जाती है, जहां यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद होती है। लेकिन इस तरह की शिकायतें सामने आने से सेवा की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। यात्रियों ने मांग की है कि ट्रेन में खानपान सेवाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और हर खरीद पर तुरंत बिल उपलब्ध कराना अनिवार्य किया जाए।

इस मामले में की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारी इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और मामले को टालने की कोशिश कर रहे हैं। इससे यात्रियों में नाराजगी और बढ़ रही है। यात्रियों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो यह एक बड़ी समस्या का रूप ले सकती है।

रेल यात्रियों के एक समूह ने यह भी बताया कि इस तरह की घटनाएं केवल एक बार नहीं बल्कि कई बार हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ट्रेन में सफर करने वाले कई लोग इस समस्या से जूझ चुके हैं, लेकिन शिकायत करने के बावजूद उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिला। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह समस्या लगातार बनी हुई है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

मनीष कुमार मिश्रा ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि अगर इस तरह की अनियमितताओं पर रोक नहीं लगाई गई तो यह रेलवे की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही यात्रियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें सुरक्षित वातावरण देने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएं।

यह मामला अब उच्च स्तर तक पहुंच चुका है, ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रेलवे और आईआरसीटीसी इस पर क्या कदम उठाते हैं। यात्रियों को उम्मीद है कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा और वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेन सेवाओं में पारदर्शिता और सुविधा सुनिश्चित की जाएगी।

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